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Saturday, 28 May 2016

जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़ियाँ करतीं थीं बसेरा ..... वहीं दाल दाल के दाने को तरसे है भाई मेरा ------ अतुल कुमार सिंह 'अंजान '



"अखंड आत्म भाव जो असीम विश्व में भरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।"
                                  (मैथिलीशरण गुप्त )

कामरेड अतुल अनजान लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और AISF के भी पूर्व अध्यक्ष तो हैं ही। वर्तमान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के 'राष्ट्रीय सचिव' तथा AIKS-अखिल भारतीय किसानसभा के 'राष्ट्रीय महामंत्री हैं'।  न केवल अपनी ओजस्वी वाक-शैली वरन जनता के मर्म को समझने वाले एक जन-प्रिय नेता के रूप में भी जाने जाते हैं। http://communistvijai.blogspot.in/2014/11/blog-post_29.html

 वह केवल जागरूक राजनीतिज्ञ ही नहीं हैं वरन कोमल हृदय कवि भी हैं। एक साक्षात्कार में उन्होने खुद ही स्पष्ट किया था कि, बचपन में कविता लिखते समय उपनाम - तख्खलुस के रूप में ' अंजान ' नाम के अंत में लगाया था जिसे पत्रकारों ने अतुल कुमार सिंह 'अंजान ' के स्थान पर मात्र अतुल अंजान लिखना शुरू कर दिया और अब यही नाम जन मानस में प्रचलित हो गया है। 

किसानों के संघर्ष में भाग लेते लेते उनकी समस्याओं ने उनके हृदय को झिंझोड़ डाला है और बरबस ही उनके मुख से कुछ पद या शेर निकल पड़ते हैं जिनमें उनकी वेदना के गूढ अर्थ छिपे होते हैं। ऐसे ही कुछ चंद शेर प्रस्तुत हैं जिनसे किसान और साधारण जनता के आज के हालात पर प्रकाश पड़ता है। 

 जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़ियाँ करतीं थीं बसेरा । 
    वहीं दाल दाल के   दाने को   तरसे है     भाई मेरा । । 
Atulanjan
2016/05/28 09:22


JAHAAN DAAL DAAL PAR SONE KI CHIDIYAAN KARTI THI BASERA. . . . . WAHEEN DAAL DAAL KE DAANE KO TARSE HAI BHAI MERA. .........ATUL  KUMAR  ANJAAN 
दो पंक्ति के इस पद के माध्यम से अंजान साहब ने भारत के प्राचीन इतिहास के संदर्भ से जनता को याद दिलाया है कि, कहाँ तो हमारा देश इतना समृद्ध था कि उसके बारे में कहा गया था कि 'जहां डाल डाल पर सोने की चिड़ियाँ करती हैं बसेरा वह भारत देश है मेरा '। और कहाँ आज क्या स्थिति है? सबसे निखद और गरीबों की मानी जाने वाली अरहर की  दाल के दाम रु 200 /- तक पहुँच गए हैं और उसके दाने दाने को सब तरस रहे हैं। दालें भारत में 'प्रोटीन ' का मुख्य आधार हैं और प्रोटीन को 'मांस निर्माता द्रव्य ' FLASH FARMING SUBSTANSE कहा जाता है। दालों के आभाव में साधारण भारतीय जन कुपोषण का शिकार हो रहा है और सरकार 'विकास ' का ढ़ोल पीट रही है। अंजान साहब याद दिला रहे हैं यह देश को कमजोर और खोखला बनाने की साजिश है। 


**Atulanjan
2016/05/28 09:34
फ़लक ज़मीन को नया आफताब देता है ।
 तो उसके साथ कई इंकलाब देता है।। 
 तपिश ज़मीन को आफताब देता है ।
 वह शोला बदले में हम को गुलाब देता है।। 
 ये पेड़ अहले सियासत का है लगाया हुआ।
 ये नफ़रतों का समर बे हेसाब  देता है। । 


JARA  GAUR KIJIYE .......

Falak zamin Ko nayaAftab deta hai. To uske saath kaee inqalab deta hai. tapish zamin KoAftab deta hai.woh shola badle me ham Ko Gulab detahai. Ye ped ahle seyasat ka hai lagaya Hua. Ye nafraton ka Samar behesaab deta hai..... ATUL  KUMAR  ANJAAN


*** ज़मीन जल चुकी है,आसमान बाकी है ।
      वो जो खेतों की मेड़ों पर उदास बैठे हैं। 
      उनही की आँखों में अब तक ईमान बाकी है। 
      बादलों अब तो बरस जाओ, सूखी ज़मीन पर । 
      किसी का मकान गिरवी है और किसी का लगान बाकी है। ।   
Atulanjan
2016/05/28 09:36

Zameen jalchuki hai ,aasman baqi hai .vo jo kheton ki medon par udas baithe hain .unhi, ki aankhon me abtak iman baqihai .badlon ab to baras jao ,sukhi zameenon par .Kisi ka makan girvi hai aur kisi ka Lagan baki hai ..........       ATUL  KUMAR  ANJAAN

****Atulanjan
2016/05/28 09:38
  वह भीड मे हमेशा हँसता रहता है । 
  वह दिल की बात औरोँ से नहीँ कहता है। । 
  अगर मिले तो मेरा सलाम कह देना। 
  वह मुस्कान हथेलियोँ मेँ छिपा लेना । ।   ...........   ATUL  KUMAR  ANJAAN

बिलकुल साफ है कि, दिल की गहराइयों से निकली बात कितनी सटीक तथा सामयिक है अंजान साहब का कवि हृदय जानता है कि, खेतों की मेड़ों पर उदास बैठा किसान ही आज 'ईमान ' का प्रतीक है बाकी इस बाजारवाद में यत्र-तत्र -सर्वत्र छल - छद्यम का बोलबाला है। ऐसे में शोले के बदले 'गुलाब' देने वाले हाथों के इंकलाबी बनने का इंतज़ार करते हुये शासक वर्ग प्रतीत होता है। 

अंजान साहब साधारण इंसान की मुस्कराहट को छिपा लेने और उसको 'सलाम' पहुंचाने की बात कह कर जन पर अपना भरोसा जतलाते हैं। उनकी प्रेरणा से उत्तर प्रदेश में अभी विगत 20 मई को किसान जागरण यात्रा सम्पन्न हुई है और प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के हितार्थ आश्वासन भी दिये गए हैं , हम कामना करते हैं कि, अंजान साहब और उनके साथियों की मेहनत ज़रूर रंग लाएगी। 
(विजय राजबली माथुर )



Tuesday, 26 April 2016

किसान बजट भी संसद में प्रस्तुत किया जाय ------ अतुल कुमार सिंह 'अंजान '

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राष्ट्रीय महासचिव - किसानसभा कामरेड अतुल कुमार सिंह 'अंजान ' 








उ.प्र.किसान सभा के प्रदेश सचिव व पूर्व विधायक राजेंद्र यादव की नैतृत्व में गाजीपुर से निकली किसान जन जागरण यात्रा बुधवार को मऊ के कलेक्ट्रेट में पहुंची। किसान सभा के महा सचिव अतुल कुमार अनजान के कहा कि अखिल भारतीय किसान सभा ने राजेंद्र यादव की अगुवायी में नंदगंज चीनी मिल गाजीपुर के सामने एक महीने तक अनवरत धरना व 15 दिन तक सरजू  पांडे पार्क में क्रमिक धरना चलाया जो की ऐतिहासिक आंदोलन था जिसमे हर दल के लोग सामिल हुए ।
उन्होंने कहा कि गन्ना सचिव व राज्य सरकार के आश्वासन के बाद भी बंद पड़ी मिलें चालू नहीं हो सकीं। कहा कि प्रदेश में सडकों की स्थिति सबसे अधिक दयनीय है। अनियमित विद्युत कटौती से प्रदेश का किसान ;व्यापारी ;छात्र; महिलायें सभी परेशान हैं।
नहरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। इस साल दैवीय आपदा के कारण किसानों की फसल बीमा व फसल मुवावजा तो केंद्र और राज्य सरकार द्वारा घोषित धनराशि का लाभ प्रदेश के 70 प्रतिशत किसानों को नहीं मिल रहा है।
किसान सभा जनजागरण यात्रा की प्रमुख मागों को बताते हुए अतुल कुमार अनजान ने बताया कि 60 साल से अधिक उम्र के सभी किसान, मजदूर ,बडई, शिल्पकार,स्त्री-पुरुष को 6000 रूपये मासिक पेन्शन प्रदेश व केंद्र सरकार मिलकर दे ।
प्रदेश में रवी व खरीफ की फसल बर्बाद होने के बाद प्रदेश व केंद्र सरकार ने छतिपूर्ति देने का वादा किया था लेकिन अब तक 30 प्रतिशत किसानों को ही मिल पाया है जिससे किसानो में रोष व्याप्त है।
गन्ने का समर्थन मूल्य 450 रुपया कुंतल दिया जाए तथा गन्ने की बकाया राशि ब्याज के साथ दिया जाय। देवकली पम्प कैनाल व शारदा सहायक परियोजनाओं की अधिकांश नहरें पट गयी हैं,इनके टेल तक सफाई कराकर पानी पहुंचाया जाए। 
नन्दगंज ,रसड़ा ,छाता,देवरिया ,शाहगंज चीनी मिलों को चालू कराया जाय। स्वामीनाथ रिपोर्ट को लागू किया जाय। फसलों के लाभकारी मूल्य में 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर दिया जाय। फसल बर्बादी एवम फसल बीमा का पैसा किसानों को तत्काल दिया जाय।
रेल बजट की तरह किसान बजट भी संसद में प्रस्तुत किया जाय। जो किसान नहरी एरिया से बाहर हैं उनको 80 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर सबमर्सिबल बिजली पम्प अथवा डीजल इंजन दिये जायं। पदेश की छोटो नदियों में डैम बनाकर पानी का संचय किया जाय।

मांगो को लेकर आज किसान सभा ने कलेक्ट्रेट में सभा किया।
Rajendra Yadav Ex Mla

https://www.facebook.com/groups/794417660591110/permalink/1175955229104016/




मछली शहर - विश्व नाथ शास्त्री जी , पूर्व सांसद 




संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Friday, 22 April 2016

किसानों का उत्तर प्रदेश विधानसभा पर विशाल प्रदर्शन : कामरेड अतुल अंजान का आह्वान

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12 अप्रैल 2016 को सरजू पांडे पार्क,गाजीपुर में किसानसभा के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड अतुल अंजान का सम्बोधन 



तरवान बाज़ार में,22 अप्रैल को कामरेड विश्वनाथ शास्त्री,पूर्व सांसद का सम्बोधन 

किसानसभा के राष्ट्रीय महासचिव एवं भाकपा के राष्ट्रीय सचिव  कामरेड अतुल अंजान ने 10 अप्रैल 2016 से 'किसान जागरण यात्रा ' का प्रारम्भ किया है जो 20 मई को विधान सभा पर  लखनऊ में सम्पन्न होगी। 


 इस क्रम में 12 अप्रैल को गाजीपुर   जिला मुख्यालय स्थित सरजू पांडेय पार्क में  बड़ी संख्या में किसानों ने प्रदर्शन किया। धरने  को संबोधित करते हुये  कामरेड अंजान  ने  कहा कि यूपी का सरकारी अमला जूताखोर हो गया है। उन्हें महाराष्ट्र के जल संकट से सबक लेना चाहिए। अफसर सरकार की नीतियों को अमल में नहीं ला रहे हैं। सीएम को उन पर कार्रवाई करनी चाहिए।

उन्होंने कहाकि सरकारों की नजर में विजय माल्या देशभक्त हैं, जो जनता को शराब पिलाकर सरकारों को विदेशी मुद्रा देता है। शायद यही कारण है कि खेती के लिए सरकारी बैंक से मामूली कर्ज लेने वाले किसान की जमीन कर्ज चुकता न कर पाने पर कुर्क कर ली जाती है, जबकि वि‍जय माल्या देश का सात हजार करोड़ रुपए कर्ज के रुप में लेकर फरार हो जाता है। लेकिन सरकार उस पर कार्रवाई नहीं करती है।

कामरेड  अतुल अंजान ने कहाकि सरकार अपने - अपने बजट को किसानों का बजट बता रही है। लेकिन किसानों को लाभ पहुंचाने वाली योजनाएं और कार्यक्रम नजर नहीं आ रहे हैं।


उन्होने कहा कि केंद्र सरकार 1922 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने की बात कर रही है। लेकिन यह बता पाने में असमर्थ है कि यह होगा कैसे ? भारत के विकास का नारा चंद कारपोरेट घरानों के लिए है। देश की 65 से 70 प्रतिशत आबादी के लिए नहीं है। इन लोगों के विकास के बिना तरक्की का नारा पूर्ण रुप से बेइमानी है।  उन्होने  किसानों व आम जनता का आह्वान किया  कि, 20 मई को लखनऊ विधानसभा के सामने प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में एकत्र  हों  जिससे प्रदेश और देश की सरकारों  के कानों पर जूं रेंगे और हमारी मांगे पूरी हों।

15 अप्रैल 2016 को मधुबन में कामरेड अतुल अंजान 


रानीपुर में कामरेड अर्चना उपाध्याय 


 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश