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Sunday, 25 November 2018
Monday, 8 June 2015
जीवन क्या है ? समझा रहे हैं डॉ. मनीष कुमार दीवान --- डॉ. मनजीत सिंह
स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )
संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
जीवन क्या है ? .......
विलियम शेक्सपियर (William Shakespeare) ने था कि जिंदगी एक रंगमंच है और हम लोग इस रंगमंच के कलाकार | सभी लोग जीवन (Life) को अपने- अपने नजरिये से देखते है| कोई कहता है जीवन एक खेल है (Life is a game), कोई कहता है जीवन ईश्वर का दिया हुआ उपहार है (Life is a gift), कोई कहता है जीवन एक यात्रा है (Life is a journey), कोई कहता है जीवन एक दौड़ है (Life is a race) और बहुत कुछ|
मैं आज यहाँ पर “जीवन” के बारें में अपने विचार share कर रहा हूँ और बताने की कोशिश करूंगा की जीवन क्या है? (What is Life)|
What is Life – जीवन क्या है? – Life is a Game
मनुष्य का जीवन एक प्रकार का खेल है| Life is a Game
और मनुष्य इस खेल का मुख्य खिलाडी|
यह खेल मनुष्य को हर पल खेलना पड़ता है|
इस खेल का नाम है “Game of Thoughts (विचारों का खेल)”|
इस खेल में मनुष्य को दुश्मनों से बचकर रहना पड़ता है|
मनुष्य अपने दुश्मनों से तब तक नहीं बच सकता जब तक मनुष्य के मित्र उसके साथ नहीं है|
मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र “विचार (thoughts)” है, और उसका सबसे बड़ा दुश्मन भी विचार (Thoughts) ही है|
मनुष्य के मित्रों को सकारात्मक विचार (Positive Thoughts) कहते है और मनुष्य के दुश्मनों को नकारात्मक विचार (Negative Thoughts) कहा जाता है|
मनुष्य दिन में 60, 000 से 90, 000 विचारों(Thoughts) के साथ रहता है|
यानि हर पल मनुष्य एक नए दोस्त (Positive Thought) या दुश्मन (Negative Thought) का सामना करता है|
मनुष्य का जीवन विचारों के चयन (Selection ofThoughts) का एक खेल है|
इस खेल में मनुष्य को यह पहचानना होता है कि कौनसा विचार उसका दुश्मन है और कौनसा उसका दोस्त, और फिर मनुष्य को अपने दोस्त को चुनना होता है|
हर एक दोस्त (One Positive Thought) अपने साथ कई अन्य दोस्तों (Positive Thoughts) को लाता है और हर एक दुश्मन (One Negative Thought) अपने साथ अनेक दुश्मनों (Negative Thoughts) को लाता है|
इस खेल का मूल मंत्र यही है कि मनुष्य जब निरंतर दुश्मनों (Negative Thoughts) को चुनता है तो उसे इसकी आदत पड़ जाती है और अगर वह निरंतर दोस्तों (Positive Thoughts) को चुनता है, तो उसे इसकी आदत पड़ जाती है|
जब भी मनुष्य कोई गलती करता है और कुछ दुश्मनों को चुन लेता है तो वह दुश्मन, मनुष्य को भ्रमित कर देते है और फिर मनुष्य का स्वंय पर काबू नहीं रहता और फिर मनुष्य निरंतर अपने दुश्मनों को चुनता रहता है|
मनुष्य के पास जब ज्यादा मित्र रहते है और उसके दुश्मनों की संख्या कम रहती है तो मनुष्य निरंतर, इस खेल को जीतता जाता है| मनुष्य जब जीतता है तो वह अच्छे कार्य करने लगता है और सफलता उसके कदम चूमती है, सभी उसकी तारीफ करते है और वह खुश रहता है|
लेकिन जब मनुष्य के दुश्मन, मनुष्य के मित्रो से मजबूत हो जाते है, तो मनुष्य हर पल इस खेल को हारता जाता है और निराश एंव क्रोधित रहने लगता है|
मनुष्य को विचारों के चयन में बड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि मनुष्य के दुश्मन, मनुष्य को ललचाते है और मनुष्य को लगता है कि वही उसके दोस्त है|
जो लोग इस खेल को खेलना सीख जाते है वे सफल हो जाते है और जो लोग इस खेल को समझ नहीं पाते वे बर्बाद हो जाते है|
इस खेल में ज्यादातर लोगों कि समस्या यह नहीं है कि वे अपने दोंस्तों और दुश्मनों को पहचानते नहीं बल्कि समस्या यह है कि वे दुश्मनों को पहचानते हुए भी उन्हें चुन लेते है|
ईश्वर (या सकारात्मक शक्तियाँ), मनुष्य को समय-समय पर कई तरीकों से यह समझाते रहते है कि इस खेल को कैसे खेलना है लेकिन यह खेल मनुष्य को ही खेलना पड़ता है| जब मनुष्य इसमें हारता रहता है और यह भूल जाता है कि इस खेल को कैसे खेलना है तो ईश्वर फिर उसे बताते है कि इस खेल को कैसे खेलना है|
(साभार डॉ. मनीष कुमार दीवान सर)
https://www.facebook.com/drmanjit.singh1/posts/884106394961595
विलियम शेक्सपियर (William Shakespeare) ने था कि जिंदगी एक रंगमंच है और हम लोग इस रंगमंच के कलाकार | सभी लोग जीवन (Life) को अपने- अपने नजरिये से देखते है| कोई कहता है जीवन एक खेल है (Life is a game), कोई कहता है जीवन ईश्वर का दिया हुआ उपहार है (Life is a gift), कोई कहता है जीवन एक यात्रा है (Life is a journey), कोई कहता है जीवन एक दौड़ है (Life is a race) और बहुत कुछ|
मैं आज यहाँ पर “जीवन” के बारें में अपने विचार share कर रहा हूँ और बताने की कोशिश करूंगा की जीवन क्या है? (What is Life)|
What is Life – जीवन क्या है? – Life is a Game
मनुष्य का जीवन एक प्रकार का खेल है| Life is a Game
और मनुष्य इस खेल का मुख्य खिलाडी|
यह खेल मनुष्य को हर पल खेलना पड़ता है|
इस खेल का नाम है “Game of Thoughts (विचारों का खेल)”|
इस खेल में मनुष्य को दुश्मनों से बचकर रहना पड़ता है|
मनुष्य अपने दुश्मनों से तब तक नहीं बच सकता जब तक मनुष्य के मित्र उसके साथ नहीं है|
मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र “विचार (thoughts)” है, और उसका सबसे बड़ा दुश्मन भी विचार (Thoughts) ही है|
मनुष्य के मित्रों को सकारात्मक विचार (Positive Thoughts) कहते है और मनुष्य के दुश्मनों को नकारात्मक विचार (Negative Thoughts) कहा जाता है|
मनुष्य दिन में 60, 000 से 90, 000 विचारों(Thoughts) के साथ रहता है|
यानि हर पल मनुष्य एक नए दोस्त (Positive Thought) या दुश्मन (Negative Thought) का सामना करता है|
मनुष्य का जीवन विचारों के चयन (Selection ofThoughts) का एक खेल है|
इस खेल में मनुष्य को यह पहचानना होता है कि कौनसा विचार उसका दुश्मन है और कौनसा उसका दोस्त, और फिर मनुष्य को अपने दोस्त को चुनना होता है|
हर एक दोस्त (One Positive Thought) अपने साथ कई अन्य दोस्तों (Positive Thoughts) को लाता है और हर एक दुश्मन (One Negative Thought) अपने साथ अनेक दुश्मनों (Negative Thoughts) को लाता है|
इस खेल का मूल मंत्र यही है कि मनुष्य जब निरंतर दुश्मनों (Negative Thoughts) को चुनता है तो उसे इसकी आदत पड़ जाती है और अगर वह निरंतर दोस्तों (Positive Thoughts) को चुनता है, तो उसे इसकी आदत पड़ जाती है|
जब भी मनुष्य कोई गलती करता है और कुछ दुश्मनों को चुन लेता है तो वह दुश्मन, मनुष्य को भ्रमित कर देते है और फिर मनुष्य का स्वंय पर काबू नहीं रहता और फिर मनुष्य निरंतर अपने दुश्मनों को चुनता रहता है|
मनुष्य के पास जब ज्यादा मित्र रहते है और उसके दुश्मनों की संख्या कम रहती है तो मनुष्य निरंतर, इस खेल को जीतता जाता है| मनुष्य जब जीतता है तो वह अच्छे कार्य करने लगता है और सफलता उसके कदम चूमती है, सभी उसकी तारीफ करते है और वह खुश रहता है|
लेकिन जब मनुष्य के दुश्मन, मनुष्य के मित्रो से मजबूत हो जाते है, तो मनुष्य हर पल इस खेल को हारता जाता है और निराश एंव क्रोधित रहने लगता है|
मनुष्य को विचारों के चयन में बड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि मनुष्य के दुश्मन, मनुष्य को ललचाते है और मनुष्य को लगता है कि वही उसके दोस्त है|
जो लोग इस खेल को खेलना सीख जाते है वे सफल हो जाते है और जो लोग इस खेल को समझ नहीं पाते वे बर्बाद हो जाते है|
इस खेल में ज्यादातर लोगों कि समस्या यह नहीं है कि वे अपने दोंस्तों और दुश्मनों को पहचानते नहीं बल्कि समस्या यह है कि वे दुश्मनों को पहचानते हुए भी उन्हें चुन लेते है|
ईश्वर (या सकारात्मक शक्तियाँ), मनुष्य को समय-समय पर कई तरीकों से यह समझाते रहते है कि इस खेल को कैसे खेलना है लेकिन यह खेल मनुष्य को ही खेलना पड़ता है| जब मनुष्य इसमें हारता रहता है और यह भूल जाता है कि इस खेल को कैसे खेलना है तो ईश्वर फिर उसे बताते है कि इस खेल को कैसे खेलना है|
(साभार डॉ. मनीष कुमार दीवान सर)
https://www.facebook.com/drmanjit.singh1/posts/884106394961595
संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
Monday, 8 October 2012
यात्रा मे सुरक्षा
स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )
lhttp://krantiswar.blogspot.in/2011/09/blog-post_09.html
09-09-2011 को मैंने -'युवाओं जीवन अनमोल है इसकी रक्षा करो' शीर्षक के अंतर्गत यात्रा की सावधानियों और सुरक्षा के उपाय बताए थे और इसी उद्देश्य से 'जनहित मे' ब्लाग के अंतर्गत स्तुतिए देना प्रारम्भ किया था । किन्तु पूना प्रवासी और उसके पटना प्रवासी जासूस ब्लागर्स द्वारा मुझसे निशुल्क ज्योतिषीय लाभ उठाने के बाद मेरे विरुद्ध घृणित अभियान चलाये जाने के बाद (जिसे IBN7 के एक ब्लागर द्वारा काफी हवा दी गई )वह ब्लग सार्वजनिक रूप से हटा लिया। हिंदुस्तान,लखनऊ दिनांक 07-10-2012 मे प्रकाशित इस हादसे जिसमे चालक ने अपनी पत्नी और बेटी को गंवा दिया तथा 08 अक्तूबर के अंक मे भी एक युवक के सड़क हादसे मे जान गंवा देने का समाचार देख कर यह लिंक दे रहा हूँ कि यदि कोई दी गई स्तुति का लाभ उठा कर अपने जीवन की रक्षा करना चाहे तो कर सके।
संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर
lhttp://krantiswar.blogspot.in/2011/09/blog-post_09.html
09-09-2011 को मैंने -'युवाओं जीवन अनमोल है इसकी रक्षा करो' शीर्षक के अंतर्गत यात्रा की सावधानियों और सुरक्षा के उपाय बताए थे और इसी उद्देश्य से 'जनहित मे' ब्लाग के अंतर्गत स्तुतिए देना प्रारम्भ किया था । किन्तु पूना प्रवासी और उसके पटना प्रवासी जासूस ब्लागर्स द्वारा मुझसे निशुल्क ज्योतिषीय लाभ उठाने के बाद मेरे विरुद्ध घृणित अभियान चलाये जाने के बाद (जिसे IBN7 के एक ब्लागर द्वारा काफी हवा दी गई )वह ब्लग सार्वजनिक रूप से हटा लिया। हिंदुस्तान,लखनऊ दिनांक 07-10-2012 मे प्रकाशित इस हादसे जिसमे चालक ने अपनी पत्नी और बेटी को गंवा दिया तथा 08 अक्तूबर के अंक मे भी एक युवक के सड़क हादसे मे जान गंवा देने का समाचार देख कर यह लिंक दे रहा हूँ कि यदि कोई दी गई स्तुति का लाभ उठा कर अपने जीवन की रक्षा करना चाहे तो कर सके।
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| हिंदुस्तान,लखनऊ,दिनांक-07-10-2012 |
संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर
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