Showing posts with label न्याय. Show all posts
Showing posts with label न्याय. Show all posts

Wednesday, 25 April 2018

कश्मीर का कठुआ कांड और वकील दीपिका सिंह राजावत

स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )  



कठुआ कांड की मासूम पीड़िता का केस हालांकि, मानवीय आधार पर एडवोकेट दीपिका थुस्सू ( दीपिका सिंह राजावत ) ने तमाम धमकियों के बाद भी अपने हाथ में लिया है किन्तु यह राष्ट्रीय एकता के मार्ग में भी मील का पत्थर सिद्ध होगा। एडवोकेट दीपिका का विरोध सिर्फ कट्टर सांप्रदायिक तत्वों का विरोध नहीं है बल्कि इसके पीछे वहाँ के आदिवासियों की खुशहाली छीनने वाली उस लाबी का हाथ है जो अपने नाजायज आर्थिक लाभ के लिए जम्मू वन क्षेत्र से बंजारा समुदाय को खदेड़ देना चाहता है और नन्ही मासूम के साथ जघन्य अपराध इसी उद्देश्य से किया गया है। जब दीपिका जी उस मासूम को न्याय दिलाने के लिए कोर्ट में केस लड़ेंगी तो स्व्भाविक रूप से समानता और सामाजिक न्याय की लड़ाई को भी बल मिलेगा। भारत की एकता व अखंडता में विश्वास रखने वाले प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि, वह एडवोकेट दीपिका के सद्प्रयासों का समर्थन करके अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्र को विफल करे। 



संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Sunday, 6 August 2017

मुगलों को छोड़िये, दीनदयाल की मौत/हत्या का राज़फाश करिये! ------ नवेंदु कुमार

जनसंघ के अध्यक्ष रहे बड़े नेता बलराज मधोक ने ये इशारा कर तब सनसनी फैला दी थी कि पंडित जी की हत्या के पीछे पार्टी के ही कुछ बड़े नेताओं के हाथ हो सकते हैं।..................उनकी मौत की गुत्थी उन्हीं की पार्टी की प्रचंड बहुमत वाली सरकार और उसके अपराजेय मुखिया क्यों नहीं सुलझा रहे। सारी फाइलें और समस्त जांच एजेंसियां उनके पास ही तो हैं। तो फिर ये कैसा खेल है कि जहां, जिस रेलवे स्टेशन मुगलसराय पर मरे उनके नेता, उसके नाम बदलने की तो बड़ी बेचैनी है, इस बात की बेचैनी क्यों नहीं कि पंडित दीनदयाल की हत्या/मौत का पर्दाफ़ाश किया जाय? ............ मुगलसराय का नाम बदलने की ही इतनी जल्दी क्यों है? जहां मरे/मारे गये पंडित दीनदयाल उसी जगह का नाम उनके नाम पर क्यों रहे? जिस मथुरा के पैतृक स्थान नंगला चंद्रभान के पंडित जी वाशिंदा थे, उस मथुरा का नाम क्यों नहीं बदला जाय, मुगलसराय का ही क्यों? जिस जयपुर के धनकिया रेलवे स्टेशन वाले ननिहाल में दीनदयाल उपाध्याय जन्मे, उस धनकिया स्टेशन का नाम बदलने से पंडित जी की आत्मा खुश नहीं होगी! 

Navendu Kumar

Friday, 23 November 2012

IAS को सजा एक मिसाल

स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )

हिंदुस्तान,लखनऊ,दिनांक -21-11-2012,प्रथम पृष्ठ---


कारपोरेट घरानों तथा IAS आफ़ीसर्स की पत्नियों द्वारा संचालित NGOs ने एक लंबे अरसे से राजनीति और राजनेताओं के विरुद्ध भ्रष्टाचार के नाम पर आंदोलन चला रखा है। जनता भी उनकी चालों को न समझते हुये राजनेताओं को ही दोषी मान लेती है। यू पी के स्वास्थ्य विभाग मे भी एक वरिष्ठ IAS जेल यात्रा भ्रष्टाचार के आरोपों मे कर आए हैं। लेकिन इस बार इस लाबी को कोर्ट से करारा झटका लगा है। वस्तुतः ब्रिटिश दासता के काल से ही पहले ICS जो अब IAS कहलाते हैं अपने अधीनसठों के माध्यम से भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते रहे हैं। आज़ादी के बाद इन लोगों ने कुछ भ्रष्ट नेताओं को भी अपने पाले मे शामिल करके सारे के सारे नेताओं को चोर और भ्रष्ट कहलाना शुरू कर दिया जिससे कि इन लोगों की कारगुजारियाँ छिपी रह सकें। आभार एवं धन्यवाद न्यायपालिका को जिसने दूध का दूध और पानी का पानी अलग-अलग कर दिया। यदि IAS तबके पर लगाम कसी जा सके तो कोई भी नेता भ्रष्ट कदम उठाने का दुसाहस कर ही न सकेगा।





 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर