Showing posts with label आरएसएस. Show all posts
Showing posts with label आरएसएस. Show all posts

Thursday, 13 August 2020

कांग्रेस की दीवारों की ईंटों से बीजेपी का महल ------ शकीब रहमान

कांगेसी संघियों ने कांग्रेस की दीवारों की ईंटों से बीजेपी का महल बना दिया......
इस पर बात करने के लिए थोड़ा इतिहास में जाना होगा.....
1925 में ब्राह्मणवादी विचारधारा के पुरोधा केशव राव बलीराम हेडगेवार ने आरएसएस की स्थापना की ......कांग्रेस तब तक इतने बड़े किले में परिवर्तित हो चुकी थी कि हेडगेवार उसको हिला भी नहीं सकते थे....
एक बात गौरतलब है कि कांग्रेस भले एक पार्टी है लेकिन शुरू से ही वो कई विचारधाराओं का संगम रहा है...इसलिए कांग्रेस में  इनकी दाल उस तरह से गल नहीँ रही थीं जैसा कि वे चाहते थें.....
वैसे इसी समय ब्राह्मणवादी विचारों को पोषित करने वाली हिन्दू महासभा भी थी ....लेकिन अन्य लोगों को वो जोड़ नहीं पा रही थीं....
तब आरएसएस राजनीति के शतरंज के बिसात पर एक नई चाल चलती है कि जनसंघ नामक अपना एक स्थायी आवास बनाओ ( जो कि बाद में बीजेपी नामक्रम में  परिवर्तित हो गई ) और जब तक ये घर बन नही जाता है...तब तक कांग्रेस में रह कर उसकी जड़े खोदो...
हुआ भी यही.... संघी कांग्रेस में शामिल होकर कांग्रेस के किले की ईंटें ले जाकर आरएसएस (जनसंघ ) को मज़बूत करते रहें यही कारण है कि कुछ लोग कांग्रेस को आरएसएस की जननी तक कह देते हैं....
ये कांग्रेस से जोंक की तरह चिपककर उसका खून पीकर आरएसएस को रक्तदान करते रहें...
1980 में मण्डल कमिशन की शिफारिशों को कुँए में डलवाने वाला कांग्रेस का यही धड़ा था....क्योंकि इसमे भूखे पिछडो के लिए कुछ निवाला था जो कि ब्राह्मणवादियों की थाली से जाने वाला था....
सोंचिए 1980 में इसे लागू न करने देने से पिछडो का कितना नुकसान हुआ...
1984 में दिल्ली में सिखों के ख़िलाफ़ तांडव भी इन्ही संघियों ने किया था...
इन पर नेहरू जी का नियंत्रण 
इंद्रा पर आकर कमज़ोर हुआ .....और...राजीव तक आते - आते खत्म हो गया.... इसलिए 1987 का हाशिमपुरा नरंसहार और 1989 का भागलपुर दंगा प्रायोजित किया जाता है.....कुछ लोग कहते हैं कि कांग्रेस को मुसलमानों के ख़िलाफ़ दंगा करवाने से उसका खुद का ही नुकसान होगा फिर वो ऐसा क्यों करेगी......क्योंकि ऐसा करवाने वाले समाजवादी कांग्रेसी नहीं बल्कि संघी कांग्रेसी होते थें.....जिनको कांग्रेस को खोखला कर बीजेपी की रीढ़ मज़बूत करना था....यही संघी धड़ा राजीव गांधी से मस्ज़िद का ताला खुलवाता है....
1998 में संघी आवास की इमारत का ढाँचा तो बन गया लेकिन मुकम्मल घर 2014 मे जाकर तैयार हुआ...
अब आप कहेंगे....जब संघियों का स्थायी आवास बीजेपी ( आरएसएस ) बन गया है तो सारे संघी कांग्रेस को छोड़कर वहाँ चले क्यों नही जाते हैं...??
पहली बात ...एक घर मे शामिल होने की एक सीमा भी तो होती है....
दूसरी बात ....ये गोलवलकर की संतानें बहुत चालाक होते है...हमेशा अपने लिए एक विकल्प बनाए रखते हैं...
तीसरी बात ...अगर सारे वहाँ चले जाएँगे तो मोदी विरोध के प्लेटफार्म पर बहुजनों का कब्ज़ा हो जाएगा....फिर ये बहुजन एससी , एसटी ,ओबीसी और अल्पसख्यकों के हक़ की बात उठाने लगेंगे....तो इससे ब्राह्मणवाद का नुकसान होगा न....और बीजेपी भी यही चाहती है कि उसके विरोध के प्लेटफार्म पर भी कांग्रेसी संघी ही काबिज रहें....
इसलिए ये मोदी को गरियाते हुए आपको उन्ही मुद्दों में उलझाए रखते हैं जिससे ब्राह्मणवादी हितों का नुकसान न हो तभी तो कोरोना पर ये भले 100 बातें कर देंगे लेकिन न्यायपालिका में आरक्षण ,  मण्डल कमीशन , एससी- एसटी एक्ट 1989 , सच्चर कमेटी, रंगनाथ मिश्रा आयोग, कुंडू कमेटी.......अनुच्छेद 341 जैसे विषयों पर दो शब्द भी खर्च करना ज़रूरी नहीं समझेंगे....क्योंकि ये सारे विषय इनके ब्राह्मणवादी शहद में कड़वाहट डाल देते हैं....
साभार :

https://www.facebook.com/shakeeb.rahman.786/posts/345550383279126?__cft__[0]=AZW5axvrRl0j5oZ07kzz9Hby979zAXQ3b6gA2iwxm4-JjMqgWw5JUWxQAzgT1X2tLPZn1inc6p7EIIW5oMTYZvTh8FC20pzAzj9zpBL2oNEov2Jh1qqDA_fvr_F-fO9Wk560l3O_oMFJg6pP2l0Rhfzj&__tn__=%2CO%2CP-R

Saturday, 9 July 2016

नामवरजी मोदी के खेमे में चले गए ॽ जगदीश्वर चतुर्वेदी

Jagadishwar Chaturvedi
नामवर सिंह के भावी जन्मदिन पर उठे सवाल :
नामवर सिंह आज जिस जगह हैं उसमें आरएसएस-भाजपा और मोदी सरकार की कोई भूमिका नहीं है।वे अच्ची तरह जानते हैं उनके व्यक्तित्व और ऊँचे कद के निर्माण में मजदूरों-किसानों की विचारधारा, मार्क्सवाद,प्रगतिशील आंदोलन और देश की उदारतावादी परंपराओं की निर्णायक भूमिका रही है।जैसा कि मीडिया में खबर है कि 28जुलाई2016को नामवरजी के लिए एक कार्यक्रम इन्दिरा गांधी कला संग्रहालय करने जा रहा है।सवाल यह है इस समय केन्द्र सरकार के नियंत्रण वाले सभी संस्थानों में आरएसएस के लोग खुलकर हमले कर रहे हैं,जेएनयू भी उनमें शामिल है।लेकिन आश्चर्य की बात है नामवरजी जैसा प्रखर आलोचक चुप है और उलटे आरएसएस की मुहिम का हिस्सा बन रहा है।हम जानना चाहते हैं प्रगतिशील आंदोलन और देश की उदारतावादी बुर्जुआ राजनीति ने नामवरजी को क्या नहीं दिया,किस चीज का अभाव उनको दिखा जिसके कारण वे मोदी के खेमे में चले गए ॽ नामवरजी को कम से कम यह तो बताना ही होगा कि उनको सी कौन सी चीज पीएम मोदी और आरएसएस में नजर आई जिसके कारण वे उनके खेमे में चले गए ॽ
नामवरजी अच्छी तरह जानते हैं कि उनकी साम्प्रदायिकता और आरएसएस के खिलाफ घोषित नीतिगत समझ रही है,क्या वे अपनी पुरानी समझ को अस्वीकार कर रहे हैं ॽ यदि हां तो उनको खुलकर कहना चाहिए,लिखकर कहना चाहिए कि वे अंततःआरएसएस की शरण में क्यों जा रहे हैं ॽ यदि सत्ता संरक्षण का ही मोह है,तिरंगे झेंडे में लिपटकर मरने का ही मोह है तो वही कहें और बताएं कि उनके जैसे नास्तिक व्यक्ति को यह मोह क्यों है ॽ हम नामवरजी के 90वें जन्मदिन पर कुछ सवालों पर उनकी राय जानना चाहते हैं।सवाल इस प्रकार हैं-
1. मोदी सरकार की किस नीति को वे जनहित में सही मानते हैं ॽ 
2. मोदी सरकार ने जेएनयू पर नियोजित ढ़ंग से हमला किया है,सभी अकादमिक नियमों और जेएनय़ू की परंपराओं को तिलांजलि देते हुए जिस तरह छात्रसंघ पर हमला किया,जेएनयूछात्रसंघ के नेताओं पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाया,क्या उन सब पर क्या राय है।
3. विगत दो सालों में आरएसएस और उसके सहयोगी संगठनों ने केन्द्र सरकार की मदद से देश के विभिन्न इलाकों में मुसलमान विरोधी मुहिम चलायी हुई है उस पर क्या कहना है ॽ 
4. यूजीसी के बजट में बड़ी मात्रा में कटौती की गयी है ,क्या उसे सही मानते हैंॽ 
5. मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति का मसौदा जारी किया है उससे कहां तक सहमत हैं ॽ 
6. यदि इस समय कांग्रेस की सरकार होती तो क्या वैसी अवस्था में आप आरएसएस की गोदी में बैठना पसंद करते ॽआरएसएस का संरक्षण लेना पसंद करते ॽ
https://www.facebook.com/jagadishwar9/posts/1319135871448450
***********************
facebook Comments : 
Janhit Group 09-07-16