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Friday, 1 March 2019
Wednesday, 27 June 2018
पैसा और पॉवर का मुक़ाबला सोशल मीडिया और सच की ताकत से ------ एकता जोशी
एकता जोशी
26-06-2018मीडिया की पोल खोल !!
आपके कई लोग पिछले कई दिनों से पूछ रहे है की- मीडिया हमारा आन्दोलन क्यों नहीं दिखा रहा? बात एकदम सही है। आईये जानते है हर एक मीडिया चैनल और उनके मालिको का सच।
Zee news:
यह चैनल का मालिक सुभाष चंद्रा है।सुभाष चंद्रा नरेन्द्र मोदी के काफी करीबी व्यक्ति है। 2014 चुनाव में इन्होने न सिर्फ बीजेपी को पैसे दिए थे बल्कि खुद मोदी की हरयाणा में हुई हर चुनावी रैली में उपस्थित रहे थे।
इस चैनल के दुसरे अहम् व्यक्ति है- सुधीर चौधरी। जो जी न्यूज़ का एंकर है। और आप भी इन्हें जानते होगे। यह व्यक्ति पत्रकार के नाम पर कलंक है। यह दलाल 2012 में उद्योगपति नवीन जिंदल से 100 करोड़ की रिश्वत मांगते कैमरे में कैद हुआ था। और फिर तिहाड़ जेल की हवा भी खा चूका है। JNU छात्र कन्हैया कुमार का फर्जी नारों वाला विडियो भी इसीने बनवाया था।
इनकी मोदी भक्ति से खुश मोदी सरकार ने इन्हें z श्रेणी की सुरक्षा मुहैया करवाई है।
IndiaTV :
यह चैनल का मालिक रजत शर्मा है। आप सभी इन्हें अच्छे से पहचानते होंगे। रजत शर्मा के पिता BJP के नेता थे। खुद रजत शर्मा ABVP के अध्यक्ष रह चुके है,और इनकी पत्नी आजभी बीजेपी की नेता है। इस चैनल की हर न्यूज़ मोदी को महान दिखाने के एंगल से बनायीं जाती है। हर न्यूज़ में मोदी-भक्ति दिखाई देती है। कहा जाता है इस चैनल का पूरा खर्च बीजेपी उठाती है। मोदी सरकार ने रजत शर्मा को Editor's Guild का अध्यक्ष बनाया है।
Aaj Tak:
यह चैनल India Today ग्रुप का एक हिस्सा है। जिनके मालिक अरुण पूरी है। इस ग्रुप द्वारा India Today नाम की मैगज़ीन प्रकाशित की जाती है। अगर आप एक बार भी इस मैगज़ीन को पढोगे या एक दिन के लिए आज तक/Headlines Today चैनल देखोगे तो आपको पता चल जायेगा की इस ग्रुप की वफ़ादारी किस तरफ है।
Times Now, IBN7, CNN-IBN-
यह तीनों चैनल TV18 ग्रुप का हिस्सा है। जिनके मालिक मुकेश अम्बानी है। मुकेश अम्बानी और नरेन्द्र मोदी के आपसी रिश्तो के बारे में जितना कहा जाये उतना कम होगा।
News24-
यह चैनल के मालिक कोंग्रेस नेता राजीव शुक्ला है। जो अरुण जेटली के काफी अच्छे दोस्त भी है।
उपर दिये गये चैनल्स के साथ-साथ देशके बाकि बचे हुये लगभग हर चैनल्स और आज देशमें मौजूद 95% से ज्यादा अखबारों (न्यूजपेपर) के मालिक मनुवादी ब्राह्मण और बनिया लोगही हैं।
क्या अब भी आपको लगता है की यह लोग कभी भी मोदी सरकार के खिलाफ कोई खबर पुरे जोर से दिखायेगे??! या मनुवादियो के खिलाफ कुछ दिखायेंगें? ब्राह्मणवादविरोधी आंदोलन, आंबेडकरवादी आंदोलन, फुले,शाहू,आंबेडकरवादी विचार कभी अपने चैनल्स पे दिखायेंगें? अपने न्यूजपेपर्स या मैगजिनमें छापेंगें? वो ऐसा कभी नहीं करेंगें।
यह घिनोना सच जानकर हमें निराश नहीं होना है। क्योंकि अगर इन लोगो के पास पैसा और पॉवर है तो हमारे पास भी सोशल मीडिया और सच की ताकत है।
आप सभी से निवेदन है की एक बने रहिये, बिखर मत जाना। मीडिया आपके इस विराट आन्दोलन को दिखाये या ना दिखाये, आपको कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए । आप और हम सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग करेंगे और सच की मशाल कायम करेंगे। याद रखे अगर हम मनुवादियो को सत्ता में ला सकते है तो उन्हें उखाड़ भी सकते है।
#आपकी एकता
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=210792949545734&set=a.108455693112794.1073741829.100018450913469&type=3
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एकता जोशी |
Saturday, 23 July 2016
मीडिया मायावती को मोदी समझ रही:/सवर्ण और दलितों का अलगाव ------ अकील अहमद / लालाजी निर्मल
स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )
****** जिसके एक आह्वान पर UP ही नहीं देश के दलित सड़क पर उतर आने को आतुर हो , उसी ताकतवर दलित महिला नेत्री के विरूद्ध आक्रमक तेवर में फरार दयाशंकर की पत्नी को उसके समकक्ष दिखाने का पर्यास जिसमे स्वाति सिंह कह रही है की भाजपा के सारे कार्यकर्ता मेरे साथ
.....क्या संदेश है ? ******
***उत्तर प्रदेश की राजनीती में सवर्ण और दलितों का अलगाव और अपने अपने खेमे में जुड़ाव साफ़ नजर आने लगा है | सोसल मिडिया में तो यह अलगाव शीशे की तरह साफ़ नजर आ रहा है | स्वाभाविक मित्रों को छोड़ कर वैचारिक विरोधियों के साथ दोस्ती और जातीय प्रबंधन निष्फल दिखने लगा है |***
*** दलितों - सवर्णों का यह अलगाव 'नास्तिकता'- एथीज़्म का दावा करने वाले साम्यवादी दल के भीतर भी उतना ही मजबूत है जितना सोशल मीडिया और समाज में क्योंकि ये दल भी ब्राह्मण वादियों के ही नियंत्रण में हैं। बस फर्क सिर्फ इतना है कि, इन दलों में दलितों का समर्थन करने वाले मुखर लोग खुद दलित नहीं हैं बल्कि गैर ब्राह्मण और गैर प्रभावशाली कामरेड्स हैं । ब्राह्मण वादी /कार्पोरेटी/मोदीईस्ट कामरेड्स प्रभावशाली और दलित विरोधी मानसिकता के हैं जिनके लिए मार्क्स वाद सिर्फ सत्ता नियंत्रण का मंत्र भर है और वे अपनी कारगुजारियों से मार्क्स वाद को जनता से दूर रखने में निरंतर सफल रहे हैं । ***
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जैसे ही हजरतगंज थाने से मायावती जी सहित बसपा के दो अन्य नेतावो सतिस्चन्द्र मिश्र और नसीमुद्दीन सिद्दीकी और कर्य्कर्तावो के खिलाफ FIR दर्ज करा बाहर निकलते ही मीडियाकर्मियों से घिरी स्वाति सिंह (पत्नी भाजपा से निष्कासित नेता दयाशंकरसिंह) ने सहयोग के लिए कैमरे पर ही media का धन्यवाद दिया ,..........मुझे आजतक का वो समाचार याद आ गया मायावती जी के संसद में दयाशंकर जी के विरूद्ध प्रतिरोधस्वरूप उठाईगयी थी जिसमे उन्होंने कहा था ..'' मै देश की बेटी हू ,दया शंकर जी ने मुझ पर नहीं अपनी बेटी , बहन को ये शब्द कहे हैं"......सबसे पहले लोगो का ध्यानाकर्षित करते हुए ''आजतक'' नेकहा था मायावती जी का भी जुबान फिसल रही है .......अब जा कर यह समझ में आया की अहं से भरी स्वर्ण प्रभुत्व और मानसिकता वाली मीडिया को यह हजम न हो पा रहा था की एक दलित भी अपने मान सम्मान के लिए इतने आक्रामकता के साथ प्रतिरोध दर्ज करा सकती है ?____निचे दिए गए देश के दो प्रमुख चैनलों के है, जरा गौर कीजिये ....1, ABP न्यूज़ ....देश के सबसे ताकतवर दलित महिला के विरूद्ध अपराधिक टिपन्नी करने वाले फरार दयाशंकर सिंह की पत्नी का मीडिया से घिर bite देते 2, 'आजतक' की heading " मायावती v/s स्वाति" ____बिना इस बात की परवाह किये की जिसके एक आह्वान पर UP ही नहीं देश के दलित सड़क पर उतर आने को आतुर हो , उसी ताकतवर दलित महिला नेत्री के विरूद्ध आक्रमक तेवर में फरार दयाशंकर की पत्नी को उसके समकक्ष दिखाने का पर्यास जिसमे स्वाति सिंह कह रही है की भाजपा के सारे कार्यकर्ता मेरे साथ
.....क्या संदेश है ?........ऐसे ऐसे मायावती के मुकाबले कोई गुमनाम स्वर्ण स्वाति भी भारी है?
https://www.facebook.com/aquil.ahmed.7927/posts/668679363286163
*** *** *** *** ***
देश की सबसे ताकतवर महिला दलित सुप्रीमो बहन जी पर आज बड़ा सामंती हमला हुआ |उनके विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 504 ,506 ,509 ,153ए और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है |नसीमुद्दीन सिद्दीकी,राम अचल राजभर और मेवालाल गौतम सहित अज्ञात लोगों को भी इसमें आरोपी बनाया गया है |इसी के साथ उत्तर प्रदेश की राजनीती में सवर्ण और दलितों का अलगाव और अपने अपने खेमे में जुड़ाव साफ़ नजर आने लगा है | सोसल मिडिया में तो यह अलगाव शीशे की तरह साफ़ नजर आ रहा है | स्वाभाविक मित्रों को छोड़ कर वैचारिक विरोधियों के साथ दोस्ती और जातीय प्रबंधन निष्फल दिखने लगा है |बड़ी मजबूती के साथ फिर कह रहा हूँ भारत के सामंती कोढ़ की शल्य चिकित्सा केवल और केवल बहुजन अवधारणा से ही संभव है |
https://www.facebook.com/lalajee.nirmal/posts/1122617821131866
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उपरोक्त टिप्पणियों से साफ नज़र आता है कि, दलितों - सवर्णों का यह अलगाव 'नास्तिकता'- एथीज़्म का दावा करने वाले साम्यवादी दल के भीतर भी उतना ही मजबूत है जितना सोशल मीडिया और समाज में क्योंकि ये दल भी ब्राह्मण वादियों के ही नियंत्रण में हैं। बस फर्क सिर्फ इतना है कि, इन दलों में दलितों का समर्थन करने वाले मुखर लोग खुद दलित नहीं हैं बल्कि गैर ब्राह्मण और गैर प्रभावशाली कामरेड्स हैं । ब्राह्मण वादी /कार्पोरेटी/मोदीईस्ट कामरेड्स प्रभावशाली और दलित विरोधी मानसिकता के हैं जिनके लिए मार्क्स वाद सिर्फ सत्ता नियंत्रण का मंत्र भर है और वे अपनी कारगुजारियों से मार्क्स वाद को जनता से दूर रखने में निरंतर सफल रहे हैं । इसी लिए 1964 में टूट कर CPM का गठन किया गया था। यू पी में पिछले बाईस वर्षों में दो बार पार्टी विभाजन भी ब्राह्मण वाद और ब्राह्मणों के वर्चस्व का ही परिणाम था। CPM से टूटे नकसल पंथी गुटों ने कार्पोरेटी शक्तियों को मजदूरों - किसानों का दमन करने का स्वर्णिम अवसर प्रदान कर दिया है। आज का जातीय विभाजन और टकराव और कुछ नहीं सिर्फ शोषणवादी शक्तियों को ही मजबूत करेगा जो कि, सत्तारूढ़ सरकारों की गहरी कूटनीतिक चाल है। इसकी पुष्टि BBC के इस वीडियो से भी होती है
( विजय राजबली माथुर )
****** जिसके एक आह्वान पर UP ही नहीं देश के दलित सड़क पर उतर आने को आतुर हो , उसी ताकतवर दलित महिला नेत्री के विरूद्ध आक्रमक तेवर में फरार दयाशंकर की पत्नी को उसके समकक्ष दिखाने का पर्यास जिसमे स्वाति सिंह कह रही है की भाजपा के सारे कार्यकर्ता मेरे साथ
.....क्या संदेश है ? ******
***उत्तर प्रदेश की राजनीती में सवर्ण और दलितों का अलगाव और अपने अपने खेमे में जुड़ाव साफ़ नजर आने लगा है | सोसल मिडिया में तो यह अलगाव शीशे की तरह साफ़ नजर आ रहा है | स्वाभाविक मित्रों को छोड़ कर वैचारिक विरोधियों के साथ दोस्ती और जातीय प्रबंधन निष्फल दिखने लगा है |***
*** दलितों - सवर्णों का यह अलगाव 'नास्तिकता'- एथीज़्म का दावा करने वाले साम्यवादी दल के भीतर भी उतना ही मजबूत है जितना सोशल मीडिया और समाज में क्योंकि ये दल भी ब्राह्मण वादियों के ही नियंत्रण में हैं। बस फर्क सिर्फ इतना है कि, इन दलों में दलितों का समर्थन करने वाले मुखर लोग खुद दलित नहीं हैं बल्कि गैर ब्राह्मण और गैर प्रभावशाली कामरेड्स हैं । ब्राह्मण वादी /कार्पोरेटी/मोदीईस्ट कामरेड्स प्रभावशाली और दलित विरोधी मानसिकता के हैं जिनके लिए मार्क्स वाद सिर्फ सत्ता नियंत्रण का मंत्र भर है और वे अपनी कारगुजारियों से मार्क्स वाद को जनता से दूर रखने में निरंतर सफल रहे हैं । ***
Aquil Ahmed
मायावती v/s स्वाति==============
जैसे ही हजरतगंज थाने से मायावती जी सहित बसपा के दो अन्य नेतावो सतिस्चन्द्र मिश्र और नसीमुद्दीन सिद्दीकी और कर्य्कर्तावो के खिलाफ FIR दर्ज करा बाहर निकलते ही मीडियाकर्मियों से घिरी स्वाति सिंह (पत्नी भाजपा से निष्कासित नेता दयाशंकरसिंह) ने सहयोग के लिए कैमरे पर ही media का धन्यवाद दिया ,..........मुझे आजतक का वो समाचार याद आ गया मायावती जी के संसद में दयाशंकर जी के विरूद्ध प्रतिरोधस्वरूप उठाईगयी थी जिसमे उन्होंने कहा था ..'' मै देश की बेटी हू ,दया शंकर जी ने मुझ पर नहीं अपनी बेटी , बहन को ये शब्द कहे हैं"......सबसे पहले लोगो का ध्यानाकर्षित करते हुए ''आजतक'' नेकहा था मायावती जी का भी जुबान फिसल रही है .......अब जा कर यह समझ में आया की अहं से भरी स्वर्ण प्रभुत्व और मानसिकता वाली मीडिया को यह हजम न हो पा रहा था की एक दलित भी अपने मान सम्मान के लिए इतने आक्रामकता के साथ प्रतिरोध दर्ज करा सकती है ?____निचे दिए गए देश के दो प्रमुख चैनलों के है, जरा गौर कीजिये ....1, ABP न्यूज़ ....देश के सबसे ताकतवर दलित महिला के विरूद्ध अपराधिक टिपन्नी करने वाले फरार दयाशंकर सिंह की पत्नी का मीडिया से घिर bite देते 2, 'आजतक' की heading " मायावती v/s स्वाति" ____बिना इस बात की परवाह किये की जिसके एक आह्वान पर UP ही नहीं देश के दलित सड़क पर उतर आने को आतुर हो , उसी ताकतवर दलित महिला नेत्री के विरूद्ध आक्रमक तेवर में फरार दयाशंकर की पत्नी को उसके समकक्ष दिखाने का पर्यास जिसमे स्वाति सिंह कह रही है की भाजपा के सारे कार्यकर्ता मेरे साथ
.....क्या संदेश है ?........ऐसे ऐसे मायावती के मुकाबले कोई गुमनाम स्वर्ण स्वाति भी भारी है?
https://www.facebook.com/aquil.ahmed.7927/posts/668679363286163
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Lalajee Nirmal
सवर्ण और दलितों का अलगाव :देश की सबसे ताकतवर महिला दलित सुप्रीमो बहन जी पर आज बड़ा सामंती हमला हुआ |उनके विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 504 ,506 ,509 ,153ए और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है |नसीमुद्दीन सिद्दीकी,राम अचल राजभर और मेवालाल गौतम सहित अज्ञात लोगों को भी इसमें आरोपी बनाया गया है |इसी के साथ उत्तर प्रदेश की राजनीती में सवर्ण और दलितों का अलगाव और अपने अपने खेमे में जुड़ाव साफ़ नजर आने लगा है | सोसल मिडिया में तो यह अलगाव शीशे की तरह साफ़ नजर आ रहा है | स्वाभाविक मित्रों को छोड़ कर वैचारिक विरोधियों के साथ दोस्ती और जातीय प्रबंधन निष्फल दिखने लगा है |बड़ी मजबूती के साथ फिर कह रहा हूँ भारत के सामंती कोढ़ की शल्य चिकित्सा केवल और केवल बहुजन अवधारणा से ही संभव है |
https://www.facebook.com/lalajee.nirmal/posts/1122617821131866
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उपरोक्त टिप्पणियों से साफ नज़र आता है कि, दलितों - सवर्णों का यह अलगाव 'नास्तिकता'- एथीज़्म का दावा करने वाले साम्यवादी दल के भीतर भी उतना ही मजबूत है जितना सोशल मीडिया और समाज में क्योंकि ये दल भी ब्राह्मण वादियों के ही नियंत्रण में हैं। बस फर्क सिर्फ इतना है कि, इन दलों में दलितों का समर्थन करने वाले मुखर लोग खुद दलित नहीं हैं बल्कि गैर ब्राह्मण और गैर प्रभावशाली कामरेड्स हैं । ब्राह्मण वादी /कार्पोरेटी/मोदीईस्ट कामरेड्स प्रभावशाली और दलित विरोधी मानसिकता के हैं जिनके लिए मार्क्स वाद सिर्फ सत्ता नियंत्रण का मंत्र भर है और वे अपनी कारगुजारियों से मार्क्स वाद को जनता से दूर रखने में निरंतर सफल रहे हैं । इसी लिए 1964 में टूट कर CPM का गठन किया गया था। यू पी में पिछले बाईस वर्षों में दो बार पार्टी विभाजन भी ब्राह्मण वाद और ब्राह्मणों के वर्चस्व का ही परिणाम था। CPM से टूटे नकसल पंथी गुटों ने कार्पोरेटी शक्तियों को मजदूरों - किसानों का दमन करने का स्वर्णिम अवसर प्रदान कर दिया है। आज का जातीय विभाजन और टकराव और कुछ नहीं सिर्फ शोषणवादी शक्तियों को ही मजबूत करेगा जो कि, सत्तारूढ़ सरकारों की गहरी कूटनीतिक चाल है। इसकी पुष्टि BBC के इस वीडियो से भी होती है
( विजय राजबली माथुर )
Thursday, 30 June 2016
ब्राहमणवाद है असली जातिवाद ------ महेश राठी
Mahesh Rathi
30 जून 2016 ·ब्राहमणवाद है असली जातिवाद
जातिवाद का लांछन यथास्थिति बनाये रखने की एक ब्राहमणवादी साजिश है। देश का बहुजन एकजुट होगा और अपने हक की बात करेगा तो ब्राहमणवादी बुद्धिजीवी उन पर जातिवादी होने का आरोप लगायेंगे और इस आरोप प्रत्यारोप का शोर मचाकर प्रचार भी करेंगे। और अपने शोर को इतना स्वाभाविक और मौलिक दिखाने की कोशिश करेंगे कि कई भ्रमित अथवा अपने हितों को साधने वाले बहुजन भी उनके इस जाति राग में शामिल हो जाते हैं। वास्तव में जातिवाद का यह शोर यथास्थिति को बनाये रखने की एक सोची समझी राजनीति है, साजिश है।
इस साजिश में सभी खुले और छुपे ब्राहमणवादी शामिल रहते हैं धुर दक्षिणपंथ से लेकर दिग्गज प्रगतिशील तक। यह क्रान्तिकारी कभी यह सवाल नही उठाते हैं कि वर्तमान मीड़िया पर 95 प्रतिशत के लगभग अगड़े ब्राहमणवादियों का कब्जा क्यों हैं और न्यायपालिका से लेकर नौकरशाही और रक्षा क्षेत्र में देश के शीर्ष पदों अर्थात नीति निर्माता पदों पर इन अगड़ी जातियों के ब्राहमणवादियों का कब्जा क्यों हैं। यदि वह योग्यता को पैमाना बताते हैं तो बताये कि शादी विवाह और तमाम तरह के धार्मिक कर्मकाण्ड़ करने वाले ब्राहमणों में 90 प्रतिशत का संस्कृत उच्चारण गलत होता है और 95 प्रतिशत बोले जाने वाले श्लोंकों का अर्थ भी नही जानते हैं। फिर भी धार्मिक कर्मकाण्ड़ों पर उन्ही का कब्जा क्यों हैं? क्या यह जातिवाद नही है?
इसके अलावा देश के किसी भी हिस्से में जहां ब्राहमणवाद दंगों के बीज बोता है। वहां दंगे का एक खास किस्म का डिजाइन काम करता है जिसमें मुस्लिम बस्तियों के पास दलित बस्तियों को बसाया जाता है और दंगा होने पर वही दोनों समुदाय हिंसा का शिकार होते हैं। ज्यादा दूर जाने की आवश्यकता नही है विगत वर्षों में दिल्ली के त्रिलोकपुरी में हुआ फसाद इसका उदाहरण है। जहां वाल्मिकी और मुसलमानों को आपस में लड़ाया गया और यह अधिकतर शहरों में पाया जाने वाला एकसमान डिजाइन है। यदि आप दंगों में दलितों आदिवासियों का इस्तेमाल कर सकते हैं और वो इतने बहादुर हैं (जोकि वो वास्तव में हैं) तो उन्हें सेना में आरक्षण क्यों नही? क्यों उन जातियों की देश की रक्षा का भार दिया जाता है अथवा उन्हें देश रक्षा की रणनीति बनाने का महत्ती कार्यभार दिया जाता है। क्या यह जातिवाद नही है और जो इस जातिवाद पर खामोश है और बहुजन की एकता से डरता है वो ही असली जातिवादी है। जो मीड़िया के जातिवाद पर उंगली उठाने से डरता है और बहुजन की एकता पर शोर मचाता है वही असली जातिवादी है। क्योंकि वह यथास्थिति बनाये रखकर अपने हितों को साधना चाहता है। वह विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में ब्राहमणवादी पक्षपात पर खामोश है विश्वविद्यालयों में छात्रों और शिक्षकों की भर्ती के अवसरों को रोकने की ब्राहमणवादी साजिश पर आंखें मूंद लेता है और अगड़े वर्चस्व को बनाये रखने के लिए काम करता है। वह सरवाइवल आॅफ फिटेस्ट वाले निजीकरण के इस दौर में कमजोर बहुजनों के रेस से बाहर जाने पर गंूगा है परंतु अपने हक के लिए बहुजन एकता पर जातिवाद जातिवाद कहकर चिल्लाता है वही असली जातिवादी अथवा जातिवादियों का दलाल है।
https://www.facebook.com/mahesh.rathi.33/posts/10204833061144688
Sunday, 6 July 2014
मीडिया की चमक दमक के पीछे छिपी गंदगी---तनु शर्मा
मुझे कॉरपोरेट्स और पॉलिटीशियन्स के पास जाने के लिए कहा जाता थाः तनु शर्मा
http://bhadas4media.com/tv/301-tanu-police-statement.html
तनु शर्मा ने पुलिस को पुलिस को दिए अपने बयान में जो कुछ कहा है वो मीडिया की चमक दमक के पीछे छिपी गंदगी को उजागर करता है। तनु पिछले बारह सालों से मीडिया में काम कर रही हैं। बकौल उनके जिस दिन से उन्होने इंडिया टीवी ज्वाइन किया उनके बुरे दिन शुरू हो गए। वे सीधे-सीधे इंडिया टीवी की एमडी और रजत शर्मा की पत्नी रितु धवन पर आरोप लगाते हुए कहती हैं कि अनीता शर्मा बिष्ट और एमएन प्रसाद ने जो कुछ भी किया उनके इशारों पर ही किया। अनीता और प्रसाद रितु के इशारों पर तनु से बार बार ग़लत काम करने के लिए कहते थे जिसके लिए वो मनाकर देती थी।
तनु के इंडिया टीवी ज्वाइन करने के साथ ही अनीता ने उसे अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया था। अनीता उसके चेहरे और शरीर की तारीफ करते हुए कहती थी 'you have got good assets, they are meant not to hide but to flaunt'। अनीता तनु से हमेशा लोगों से मिलने-जुलने का दवाब डालती रहती थी और कहती 'start socializing, there is no harm in meeting big people, I have to send you somewhere'। तनु के इंकार करने पर अनीता का व्यवहार उत्पीड़न और मानसिक यंत्रणा में बदल गया।
अनीता की इन बातों की जानकारी जब तनु ने प्रसाद को दी तो उसने कहा कि अनीता जो कह रही है उसमें कुछ भी ग़लत नहीं है, क्या बुराई है कॉरपोरेट्स और पॉलिटीशियन्स के पास जाने में। इतना ही नहीं प्रसाद ने एक बार बहुत ही अश्लील तरीके से तनु की जांघों की तरफ देखते हुए कहा कि इन दोने के बीच बहुत गैप है, स्क्रीन पर जांघें भरी हुई दिखनी चाहिए। तनु के लिए प्रसाद का ऐसा व्यवहार बहुत ही दुखद और अंदर तक तोड़ देने वाला था।
ऐसी ज़लालत और ज़िल्लत झेलेते-झेलते एक दिन वो भी आया जब इस्तीफे के मुद्दे पर तनु का सब्र जवाब दे गया और उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। पढ़िए पुलिस को दिया तनु का पूरा बयानः
साभार :
https://www.facebook.com/sudha.singh.56884/posts/773397412681301
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