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Wednesday, 19 December 2018

यू पी में कांग्रेसविहीन गठबंधन की संभावना ------ नदीम

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नई दिल्ली: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा किए गए शानदार प्रदर्शन से हर तरफ यह कयास लगाए जा रहें थे कि उत्तर प्रदेश में बनने वाले महागठबंधन में उसकी दावेदारी मजबूत हो गई है. लेकिन ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है.


बता दें कि बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए बनने वाले गठबंधन से कांग्रेस को बाहर करने का विचार बना लिया है. ये ही नहीं दोनों ही पार्टी में सीटों के बंटवारे का फ़ॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि इसका औपचारिक ऐलान बसपा सुप्रीमो मायावती के बर्थडे यानी 15 जनवरी के दिन किया जा सकता है.

सीट बंटवारे के इस फ़ॉर्मूले पर दोनों ही पार्टियों के नेताओं में आपसी सहमती :
आपको बता दें कि सीटों के बंटवारे के जिस फ़ॉर्मूले पर हामी बन पाई है उसके अनुसार इस गठबंधन में अजीत सिंह की रालोद को भी शामिल किया जा सकता है. लोकसभा चुनाव में भाजपा सरकार को सत्ता से हटाने के लिए बसपा 38, सपा 37 और रालोद तीन सीटों से चुनावी रण में उतर सकती है. ये ही नहीं सपा अपने कोटे की कुछ सीटें भी अन्य छोटी पार्टी जैसे निषाद पार्टी और पीस पार्टी को दे सकती है. कहा जा रहा है कि सीट बंटवारे के इस फ़ॉर्मूले पर दोनों ही पार्टियों के नेताओं में आपसी सहमती बन गई है.

राहुल के उम्मीदावर पद को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश की न :

कहा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को गठबंधन का पीएम चेहरा मानने से अखिलेश यादव ने साफ इंकार कर दिया है. अखिलेश का कहना है कि महागठबंधन को लेकर सिर्फ बात चल रहीं है. शरद पवार, ममता बनर्जी और चंद्रबाबू नायडू जैसे अन्य लोग भी इसकी कोशिश कर चुके है. ये जरूरी नहीं की सभी दलों के लोग एक ही नाम पर सहमत हों. फिलाहल महागठबंधन ने अभी कोई मूर्त रूप नहीं लिया है तो राहुल को पीएम कैंडिडेट बताने का प्रस्ताव  नहीं है.

बसपा सुप्रीमो मायावती का जन्मदिवस होगा खास 
बता दें कि मायावती का जन्मदिन लोकसभा चुनाव के लिहाज से काफी मुख्य साबित हो सकता है. मायावती का जन्मदिन 15 जनवरी को उस दिन गठबंधन का ऐलान किया जा सकता है. बसपा मायावती के जन्मदिवस को कल्याणकारी दिवस के रूप में मना सकती है.



https://news4social.com/no-coalition-for-congress-in-sp-and-bsp-for-seat-sharing-formula/

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 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Tuesday, 15 May 2018

बिहार में भाजपा रुक जाएगी लेकिन उत्तर प्रदेश में ? ------ प्रशांत कनौजिया


 * बिहार में तेजस्वी बूथ और गांव लेवल पर  
* *   कांशीराम वाले बसपा की तरह काम नहीं  
* * *   अखिलेश सिर्फ फैंसी रैली करते हैं


Prashant Kanojiya
 बिहार में तेजस्वी बूथ और गांव लेवल पर : 
2019 में होने वाले चुनाव से पहले ही भाजपा 30 फीसदी काम पूरा कर चुकी है. उसने बूथ तक पहुँचने के लिए हर संभव प्रयास किया है. भाजपा जिस प्रकार चुनाव लड़ती है ये कबीले तारीफ है. नैतिकता की बात करने की जरूरत नहीं, क्योंकि राजनीति इसी का नाम है. 2019 लोकसभा चुनाव पर सबसे ज्यादा प्रभाव उत्तर प्रदेश और बिहार डालेंगे. बिहार में तेजस्वी जिस प्रकार गांव स्तर पर काम कर रहे हैं, यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है कि भाजपा के अलावा अगर कोई दल बूथ और गांव लेवल पर काम कर रहा है, तो वो राजद है.

 कांशीराम वाले बसपा की तरह काम नहीं : 
अब रही बात उत्तर प्रदेश की. मायावती का अपना काडर और वोटबैंक हैं, उसे मेहनत अपने वोटबैंक को बढ़ाने के लिए करना होगा. लेकिन बसपा अब कांशीराम वाले बसपा की तरह काम नहीं कर रही तो ज्यादा कोई फर्क नहीं आपयेगा.

अखिलेश सिर्फ फैंसी रैली करते हैं  : 
अब आते हैं अखिलेश यादव पर. युवा मुख्यमंत्री होने के नाते युवा वर्ग में लोकप्रियता है पर उसे वोट में तब्दील करवाने की क्षमता नहीं है. 2019 का चुनाव नज़दीक है, लकिन पार्टी का बूथ तो छोड़ो विधानसभा पर कोई ठोस काम नहीं हो रहा है. 90 फीसदी जिला अध्यक्ष (सभी इकाई) के लखनऊ में पड़े रहते हैं. उन्हें अभी तक पता नहीं है कि भाजपा की सरकार में वो ठेकेदारी दिलाने या लेने का काम नहीं कर पाएंगे. पार्टी के 90 फीसदी लोग न लोहिया को जानते हैं और न ही समाजवाद का स.


अखिलेश के पास ख़राब सलाहाकारों की फौज है, जिसने डूबने में कोई कसर नहीं छोड़ा. अखिलेश कान के कच्चे हैं और खुद से परखने से ज्यादा सलाहकार कान में बताते हैं उसपर विश्वास करते हैं. शिवपाल की नाराजगी के बाद बूथ लेवल ध्वस्त है. अखिलेश सिर्फ फैंसी रैली करते हैं, गांव स्तर पर नहीं जाते. बूथ से ज्यादा ट्विटर पर भरोसा करते हैं. अखिलेश से कार्यकर्ताओं को मिलने के लिए बड़ा फ़िल्टर पार करना होता है. सामाजिक न्याय पर कंफ्यूज हैं. खुद को कोर वोटर नहीं है, वही वोटर है जो भाजपा और कांग्रेस के पास है.

मुलायम ग्राउंड के आदमी का सुझाव नकार कर चुनाव लड़ कर न जीत पाने वाले रामगोपाल यादव पर ज्यादा भरोसा है, जो ग्राउंड का 1 फीसदी काम भी नहीं जानते. बिहार में भाजपा रुक जाएगी लेकिन उत्तर प्रदेश में अभी हालात के हिसाब से नामुमकिन है.

प्रशांत कनौजिया

साभार : 
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=2044759595553106&set=a.196023523760065.53567.100000572560879&type=3