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Monday, 14 September 2015
Friday, 23 May 2014
पद्म पुरस्कारों की ललक में ---
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उपरोक्त सभी चित्र अपनी कहानी स्पष्ट करने में सक्षम हैं। पहले व दूसरे चित्र 'हिंदुस्तान' अखबार के संपादकों से संबन्धित हैं। शेष के बारे में कुछ भी कहने की आवश्यकता नहीं है। साफ है कि योग्य संपादकों ने खुद ही माना है कि यह लोकतान्त्रिक निर्वाचन नहीं पहले से तय 'राजतिलक' है। राजतिलक कैसे संभव हुआ ब्लाग पोस्ट व EVM के चित्रों से स्पष्ट है। लेकिन 1857 ई की विफल क्रांति की स्मृति में अपना अनुमान मैंने 10 मई 2014 को ही प्रकट कर दिया था।
संकलन-विजय माथुर
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| अंकित गौरव श्रीवास्तव अपने पिता श्री ए के श्रीवास्तव के साथ जो सिचाई विभाग के मंडलीय अभियंता कार्यालय में ACCOUNTS OFFICER के नाते बनारस में सेक्टर मेजिस्ट्रेट की हैसियत से EVM हासिल कर सके |
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| इंजीनियर अंकित गौरव श्रीवास्तव BJP का चुनाव प्रचार करते हुये |
उपरोक्त सभी चित्र अपनी कहानी स्पष्ट करने में सक्षम हैं। पहले व दूसरे चित्र 'हिंदुस्तान' अखबार के संपादकों से संबन्धित हैं। शेष के बारे में कुछ भी कहने की आवश्यकता नहीं है। साफ है कि योग्य संपादकों ने खुद ही माना है कि यह लोकतान्त्रिक निर्वाचन नहीं पहले से तय 'राजतिलक' है। राजतिलक कैसे संभव हुआ ब्लाग पोस्ट व EVM के चित्रों से स्पष्ट है। लेकिन 1857 ई की विफल क्रांति की स्मृति में अपना अनुमान मैंने 10 मई 2014 को ही प्रकट कर दिया था।
संकलन-विजय माथुर
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