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Friday, 3 February 2017

उपलब्धियां देश ने मोदी के प्रधानमंत्री बनने के पहले हासिल कर ली थी.......... Shesh Narain Singh


Shesh Narain Singh
03-02-2017 
मोदी जी
आप उस देश के *प्रधान मंत्री* हो जो देश *तीन सौ साल ग़ुलाम* रहा !
जिस देश को अंग्रेजो ने लूट खसोट कर ओर जातीवाद में बाट के बर्बाद कर इस देश की बाग़डोर कोंग्रेस को सोपी थी !
*194 7* में देश में *सुई*
नही बनती थी !
सारा देश *राजा रजवाड़ों* के झगड़ो में *बटा* हुआ था
देश के मात्र *पचास गाँवों में बिजली* थी !
पूरे *राजस्थान में मात्र बीस राजाओं के महल* में फ़ोन था !
किसी गाँव में नल नही थे।
पूरे देश में *मात्र दस बाँध* थे ! सीमाओं पे *मात्र कुछ सेनिक* थे ! *चार विमान थे बीस टेंक* थे !
देश की *सीमाएँ चारो तरफ़ से खुली थी !*
*खजाना ख़ाली था ऐसे बदहाल* में हमारा *हिंदुस्तान कोंग्रेस* को मिला था !
इन *साठ सालों में कोंग्रेस* ने हिंदुस्तान में *विश्व की सबसे बड़ी ताक़त वाली सेन्य शक्ति तैयार की*
*हज़ारों विमान -हज़ारो टेंक -लाखों फ़ैक्ट्रीया लाखों गाँवों में बिजली*
*हज़ारों बाँध लाखों किलोमीटर सड़कों का निर्माण परमाणु बम*
*हर हाथ में फ़ोन -हर घर में मोटर साई किल वाला मजबूत देश साठ में बना कर दिया हे कोंग्रेस ने !*
भारत ने पिछले ६० सालों में तरक्की भी बहुत की है और भूतपूर्व प्रधानमंत्रियों ने कई इतिहास रच दिए हैं जिसकी वजह से भारत आज एशिया की दूसरी सब से बड़ी ताकत है।
1-भारत दुनिया का सर्व *श्रेष्ठ संविधान* बना चुका था...
2-भारत *एशियाई खेलों की मेजबानी* कर चुका था...
3- *भारत में भाखड़ा और रिहंद जैसे बाँध बन* चुके थे...
4- *देश भामा न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर का उद्घाटन कर चुका था..*
5- *देश में तारापुर परमाणु बिज़ली घर शुरू हो चुका था...*
6- *देश में कई दर्जन AIIMS, IIT, IIMS और सैकड़ों विश्वविद्यालय खुल km चुके थे..*
7- *नेहरु ने नवरत्न कम्पनियाँ स्थापित कर दी थी...*
8- *कईसालों पहले भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों को लाहौर के अंदर तक घुसकर मारा था और लाहौर पर कब्जा कर लिया था।*
9- *पंडित नेहरु पुर्तगाल से जीत कर गोवा को भारत में मिला चुके थे...*
10- *नेहरु जी ने ISRO (Indian Space Research Organization) की शुरुआत कर दी थी...*
11- *भारत में श्वेत क्रांति की शुरुआत हो चुकी थी..*
12- *देश में उद्योगों का जाल बिछ चुका था..*
13- *इंदिरा जी पाकिस्तान के दो टुकड़े कर चुकी थी, पाकिस्तान १ लाख सैनिकों और कमांडरो के साथ भारत को सरेंडर कर चुका था।*
14- *तब भारत में बैंकों का राष्ट्रीयकरण हो चूका था..*
15- *इंदिरा जी ने सिक्किम को देश में जोड़ लिया था....*
16- *देश अनाज के बारे में आत्म निर्भर हो गया था.*
17- *भारत हवाई जहाज और हेलीकाप्टर बनाने लगा था...*
18- *राजीव गाँधी ने देश के घर घर में टीवी पहुंचा दिया था।*
19- *देश में सुपर कम्प्यूटर, टेलीविजन और सुचना क्रांति ( Information Technology) पूरे भारत में स्थापित हो चुका था..*
20- *जब मोदी प्रधान मंत्री पद की शपथ ले रहे थे तब तक भारत सर्वाधिक विदेशी मुद्रा के कोष वाले प्रथम १० राष्ट्रों में शामिल हो चुका था*
21- *इनके अलावा..चन्द्र यान,*
22- *मंगल मिशन ,*
23- *GSLV,*
24- *मेट्रो,*
25- *मोनो रेल,*
26- *अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे,*
27- *न्यूक्लियर पनडुब्बी,*
28- *ढ़ेरों मिसाइल,पृथ्वी, अग्नि, नाग*
29- *दर्जनों परमाणु सयंत्र,*
30- *चेतक हेलीकाप्टर, मिग*
31- *तेजस, ड्रोन, अर्जुन टैंक, धनुष तोप,*
32- *मिसाइल युक्त विमान,*
33- *आई एन एस विक्रांत*
*विमान वाहक पोत......*
ये सब उपलब्धियां देश ने मोदी के प्रधानमंत्री बनने के पहले हासिल कर ली थी.....

Monday, 12 October 2015

विभ्रम के दौर में विवेक वांछित है --- विजय राजबली माथुर

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'सूर्या' की पूर्व संपादक के पुत्र के नाम से छपा यह लेख RSS की किसी चाल का हिस्सा भी हो सकता है कि असंतुष्टों को वरुण के पक्ष मे लामबंद करके उनके प्रतिरोध की वास्तविक 'धार' को 'कुंद' कर दिया जाये। 
या यह भी हो सकता है कि वरुण और उनकी माता को अब भाजपा में वांछित लक्ष्य प्राप्त होने की संभावना न दीख रही हो और वे भविष्य के लिए उससे अलगाव की भूमिका बना रहे हों। यदि ये वास्तव में उनके विचार परिवर्तन का संकेत हो तो वे सोनिया कांग्रेस में प्रविष्ट होकर जनता को आकृष्ट करने में सफल भी हो सकते हैं। किन्तु यह नहीं भूलना चाहिए कि 'तुर्कमान गेट कांड' व 'आपात काल' वरुण के पिता की दिमागी उपज थे।



https://www.facebook.com/photo.php?fbid=954950374566939&set=a.154096721318979.33270.100001559562380&type=3




जिस समाचार-पत्र के संस्थापक संपादक महात्मा गांधी रहे हों जिनहोने ;सविनय अवज्ञा आंदोलन' का सूत्रपात किया था उसी पत्र का समपादकीय अब 'चारण विरुदावली' गा रहा है तो स्पष्ट है कि, 'विकास' का दावा करने वाले 'चारित्रिक पतन' को प्राप्त हो चुके हैं।
सत्ता पर फर्क पड़े न पड़े परंतु 'विरोध' तो दर्ज हो ही रहा है।


 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Monday, 14 September 2015

हिन्दी में पंडागिरी समाप्त करना चाहते हैं हिंदुस्तान के संपादक

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 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Monday, 25 May 2015

खबरों पर दबाव : पुरानी खबर

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·(02-06-2014)
आज जब हत्या और बलात्कार को लेकर मीडिया और राजनेताओं ने 'पीपली लाईव' का दृश्य  पुनर्प्रस्तुत कर दिया है  तब  बीते दिनों की एक घटना याद आ गयी.बात अगस्त 2007  के शुरुवाती दिनों की है .कथाकार मित्र शिवमूर्ति का फोन आया कि उनके एक सहकर्मी अधिकारी मित्र के प्रतापगढ़ (उ.प्र) जिले के गाँव के नज़दीक एक होनहार  दलित युवक, जिसका इलाहाबाद में बी टेक की पढ़ाई के लिए चयन हो गया था,  की गाँव के ही  दो ब्राह्मण युवकों द्वारा जघन्य ढंग से हत्या कर दी गयी है . और बसपा के ब्राह्मण एम् एल ए एवं अन्य प्रभावशाली लोगों की मदद से मामले को दबाया जा रहा है .संभव  हो तो इसे मीडिया में लाने की कोशिश की जानी चाहिए.  उन दिनों प्रदेश में  मायावती की सरकार थी और 'ब्राह्मण शंख बजायेगा ...' का नारा तेजी से चल रहा था .मैंने एनडीटीवी के अपने रिपोर्टर मित्र कमाल खान को इस बाबत बताया और आग्रह किया कि संभव हो तो इसे कवर करें .उन्होंने अपने स्रोतों द्वारा  इस सम्बन्ध में  पूछताछ की और  तीन चार दिन बाद मुझे बताया कि उन्हें जो सूचना प्रतापगढ़ के स्रोतों द्वारा मिली उसके अनुसार वह दलित युवक चोर था और कुछ प्रेमप्रसंग भी था . मैंने कमाल खान को दो टूक लहजे में बताया कि भले ही आप स्टोरी न कवर करें लेकिन अपने उन स्रोतों पर कतई विश्वास न करें जो इस बेगुनाह युवक को चोर बता रहे हैं .  खैर कमाल खान ने तुरंत प्रतापगढ़ जाने का निर्णय लिया और अगले दिन इसकी अच्छी कवरेज अखिल भारतीय स्तर पर की . फिर स्टार टीवी के उन दिनों के रिपोर्टर पंकज श्रीवास्तव ने भी इसे विस्तृत रूप से कवर किया . लेकिन यह सब महज एक दो दिन का किस्सा होकर रह गया . अंत में हुआ यह कि असली अपराधी जमानत करा कर बाहर हो गए  औरगाँव  के ही कुछ  दलित इस अपराध के मुलजिम के रूप में जेल की चहारदीवारी के पीछे आज भी कैद हैं . उनका 'पीपली  लाईव' होने से रह गया . Tehelka ने 22  अगस्त 2007  के अंक में इस बाबत शिवम् बिज ने  जो विस्तृत खबर लिखी वह यहाँ संग्लन है .


  • Sujit Ghosh घटना अगस्त के शुरु की है । हत्या पासिओं के वस्ति मे हुआ था । पाँच पासिओ के नाम FIR दर्ज हुआ था दो ब्रह्मण छूट्टा घुम रहा था । स्थानिय संगठन और लोग भागा दौड़ी करते रहे पर उन्हे गिरफ्तार नही किया गया । स्थानीय विघायक ब्रह्मण था,बासापा का था । फिर प्लान बना १४ अगस्त को गाँव मे काला झंडा फहराया गया । तबस्सुम इंडियन एक्सप्रेस से गई थी । १५ के सुबह एक्सप्रेस के मुख्य पेज पर खबर छपी । तहलका मच गया शाम को दोनो गिरफ्तार किया गया । दो साल जेल मे रहा फिर जमानत हुई । पिछले साल अदालत की राय मे पाँचो पासिओं को सजा हो गई, दोनो ब्रह्मण सुबुत के अभाव मे छुट गया । अभी फिर अपिल हुआ है । इस प्रकरण में परिवार ने जिस हिम्मत के साथ लड़ा और अन्ततः ब्रह्मणो को नैतिक रुप से हराया और डराया प्रंशसनीय और हिम्मत देने वाली है

  • Virendra Yadav Sujit Ghosh शुक्रिया सुजीत जी , इस अपडेट के लिए .

 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Thursday, 31 October 2013

राजेन्द्र यादव जी की स्मरण गोष्ठी

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समाचार फोटो वीरेंद्र यादव जी की वाल से साभार
कल शाम लखनऊ में आयोजित आदरणीय  राजेंद्र यादव जी की स्मृति में सम्पन्न गोष्ठी में व्यक्त विचार इस समाचार कटिंग के माध्यम से वीरेंद्र यादव जी ने अपनी वाल पर शेयर किए थे। इसके अतिरिक्त 'हिंदुस्तान',लखनऊ के लाईव अंक में एक समाचार और जुड़ा हुआ है कि वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि अब 'हंस' का उत्तराधिकारी कौन?
हिंदुस्तान लाईव,लखनऊ,पृष्ठ-26,दिनांक 31-10-2013


इस प्रश्न की आवश्यकता क्या थी ?जबकि राजेन्द्र यादव जी की फेसबुक वाल पर उनकी सुपुत्री सुश्री रचना यादव जी ने यह स्टेटस दे दिया था। :


मेरे पिता श्री राजेंद्र यादव के अचानक हम सब को छोड़ कर चले जाने पर आप सभी दोस्तों ने जितने शोक संदेश, संवेदना और श्रद्धांजलि अर्पित की है, मैं एवं हंस परिवार के सभी कार्यकर्ता आप सभी के आभारी हैं. इस समय हम सब को आप सभी के स्नेह, शुभकामनाओ और साथ की बहुत आवश्यकता है. पापा के हम सब में विश्वास और आपके इसी प्यार के भरोसे हम हंस की गरिमा को बनाये रखने कि कोशिश करेंगे और आप तक पहुँचाते रहेंगे.
परम् धन्यवाद सहित
रचना यादव एवं हंस परिवार


6 · ·
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पहले मेरा विचार इस गोष्ठी में उपस्थित होकर वक्ताओं को सुनने का था।  मुझे फेसबुक पर फ्रेंड स्वीकार करने में राजेन्द्र यादव जी ने बिलकुल भी संकोच नहीं किया था;  मैं तो उनको एक महान साहित्यकार के रूप में जानता था  जबकि मैं  खुद उनके लिए अनजान व्यक्ति था।परंतु फिर यह सोच कर जाना स्थगित कर दिया कि वहाँ तो बड़े- बड़े लोग होंगे और थे भी जिनमें सिर्फ  इप्टा के राकेश जी ही अभिवादन का ठीक से जवाब देते हैं बाकी लोग तो आश्चर्य से देखते हैं कि यह मामूली आदमी यहा कैसे?जब हिंदुस्तान में 'हंस' के उत्तराधिकारी के बारे में जिज्ञासा का समाचार पढ़ा तो लगा कि मैंने वहाँ उपस्थित न होकर अच्छा ही किया।
 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर

Sunday, 18 December 2011

सेना का विजय दिवस और अन्ना

'हिंदुस्तान'के प्रधान संपादक श्री शशि शेखर ने अपने 18 दिसंबर के संपादकीय लेख मे 16 दिसंबर की भारतीय सेना की 40 वर्ष  पूर्व प्राप्त अद्भुत विजय के संबंध मे लिखा है-
"अन्ना हज़ारे के इर्द-गिर्द घूम रहे राजनीतिज्ञों को क्या दोष दें?खुद अन्ना भी इस मुद्दे पर मौनी बाबा बने रहे। वह खुद भारतीय सेना मे रहे हैं और पाकिस्तान के खिलाफ एक जंग मे भी शरीक हुये थे। और कुछ नहीं,तो सार्वजनिक तौर पर वह फौज के अपने उन साथियों को श्रद्धांजली ही दे देते,जो देश की रक्षा करतेहुए इस युद्ध मे शहीद हुये थे। "

अब शशि शेखर जी को कौन समझाये कि अन्ना को भारत या भारतीय फौज से क्या ताल्लुक ?वह तो अमेरिकी और भारतीय कारपोरेट घरानों के हित मे भारत के राष्ट्रीय ध्वज का लगातार अपमान करते आ रहे हैं। अमेरिका को स्वतन्त्रता दिलाने वाले जार्ज वाशिंगटोन ने अमेरिकी ध्वज का अपमान करने वाले को जहां का तहां मार डालने को कहा था और भारत के राष्ट्रीय ध्वज जिसे 15 अगस्त,02 अक्तूबर और 26 जनवरी को छोड़ कर सरकारी भवनों के अतिरिक्त सार्वजनिक रूप से नहीं फहराया जा सकता किस प्रकार खुले आम पाखंडी जुलूसों मे इस्तेमाल किया जा रहा है नीचे के चित्रों मे द्खे-






उपरोक्त वीडियो मे सच्चाई जानने -समझने के बाद भी क्या आप अन्ना के कारपोरेट आंदोलन का ही समर्थन करते रहेंगे?

स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर