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एक अभद्र और अश्लील व्यवहार करना किसी भी पी एम की गरिमा के प्रतिकूल है लेकिन इससे उसकी आसन्न हार की हताशा के संकेत भी मिलते हैं ------
यह एक संविधान विरोधी कृत्य है कि सीधे प्रधानमंत्री चुनने के लिए वोट मांगे जा रहे हैं। संविधान ने संसदीय लोकतन्त्र को स्वीकृती दी है जिसमें निर्वाचित सांसद बहुमत से अपना नेता चुनते हैं जो प्रधानमंत्री बनता है। भाजपा और मोदी इस संवैधानिक व्यवस्था को ध्वस्त करके मोदी को पहले ही प्रधानमंत्री घोषित करके वोट मांग रहे हैं । लोकतन्त्र व संविधान की रक्षा के लिए मोदी और भाजपा की अवैधानिक मांग को जनता को ठुकरा देना चाहिए ।
बिहार की पटना साहिब सीट से कांग्रेस और महागठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार शत्रुघ्न सिन्हा ने पीएम मोदी पर निशाना साधा. एनडीटीवी से बातचीत में उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी की भाषा में इतनी गिरावट आ चुकी है कि आज तमाम लोगों के माता-पिता पर बयान देते हैं, किसी को डायन कह देते हैं, किसी स्वर्गवासी को गंदे तरीके से भ्रष्टाचारी कह देते हैं. यह उनकी हताशा का परिचायक है.'
मेरे प्यारे भटके हुए सम्मानित भाइयों ! अंधभक्ति में इतना भी न गिरो की इंसानियत भी शर्मसार हो जाये आप कितना जानते हो इस तेजबहादुर यादव के बारे में ??? मैं बताती हूँ आपको, वो मेरे गांव एवं वार्ड (जिला महेन्द्रगढ़, हरियाणा) से ही है तेजबहादुर, पहले वो भी आपकी तरहं मोदी की अंधभक्ति में आकंठ डूबा हुआ था, इसने पूर्व चुनावों में अपने परिवार के वोट तो मोदी को दिलाये ही और लोगों को भी मोदी को जिताने के लिए प्रेरित किया, इसे सनक थी कि मोदी ईमानदार है, वह आ गया तो भ्र्ष्टाचार खत्म कर देगा, और जब मोदी जीता तो इस ने सोचा कि अब मैं सेना में जो भी गलत हो रहा है उससे मोदी को अवगत कराऊंगा ताकि सैनिकों की सुध ली जा सके, सेना में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोका जा सके। बस ! इसकी यही मूर्खता इसे ले डूबी, इसने सेना में खराब खाने की वीडियो जारी करने से पहले कई पत्र भी पीएमओ को लिखे लेकिन जब कोई उनका सकारात्मक जवाब नही आया तब उसने ये वीडियो बनाया ताकि ईमानदारी का ढोल पीटने वाला मोदी इस पर संज्ञान ले सके,...उसके बाद क्या हुआ पूरा देश जानता है, इसे बर्खास्त कर दिया गया,,,अब इसके सिर से मोदी भक्ति का भी भूत उतर चुका था,,,एक सैनिक होने के नाते इसने अन्याय के खिलाफ लड़ने की सोची,,इसी दौरान इसका इकलौता पुत्र भी हादसे का शिकार हो गया,,,इस दुख की घड़ी का भी बीजेपी आईटी सैल वालो ने नफरत के रूप में भुनाना शुरू कर दिया, एक साजिश के तहत बीजेपी ने अपनी पारम्परिक गन्दी राजनीति का धर्म निभाते हुए इस बारे झूठ प्रचारित करना शुरू कर दिया कि बेटे ने अपने बाप से दुखी होकर आत्महत्या कर ली, और सुसाइड नोट में ये बात लिख कर मरा...जबकि ये दोनों ही बातें झूठ के रूप में साजिशन फैलाई जा रही थी, इसे मानसिक रूप से परेशान करने के लिए इसे ट्रोल करने के लिए इसे जनता में पागल साबित करने के लिए। सच ही कहा है मूर्ख और असामाजिक तत्वों के सिर पर सिंग नही होते वो अपनी संकीर्ण व औछी बातों से ही अपने नकली मिलावटी खून की पहचान करा देते है...और ऐसा ही तेजबहादुर को ट्रोल करने वालो ने भी किया... बीजेपी आईटी सैल ने तेजबहादुर यादव के नाम से एक फेसबुक आईडी बनाई जिसमे ज्यादा से ज्यादा पाकिस्तानी फॉलोवर्स जोड़े गए, वजह आप समझ सकते हैं ??? इस फेसबुक से तेजबहादुर को बदनाम करने के लिए मुस्लिम भाइयों को गालियां दी गई ताकि मुस्लिमों की नजर में इसे खराब किया जा सके।।।।। वो मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने और जितने के लिए नही गया था बल्कि अपना विरोध दर्ज कराने और अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ने के एक सैनिक का धर्म निभाने गया था। मगर देश के तथाकथित फर्जी राष्ट्रभक्तों ने उस पर सुनियोजित तरीके से तरह - तरह के आरोप लगाने शुरू कर दिए, ये सब बीजेपी, संघ और उसकी आईटी सैल का पूर्व प्रायोजित काम था,... उसे कहा जाने लगा कि सेना में और भी तो सैनिक हैं सिर्फ उसे ही खाने की क्यो दिक्कत हुई, तो उन मंधबुद्धि लोगों से मैं बताना चाहूंगी कि और सैनिकों ने भी इस बारे आवाज उठाई थी और इस बारे कुल 16 सैनिक बर्खास्त किये गए थे, वैसे भी इस बात को यों भी समझा जा सकता है कि गुलाम देश भारत मे सिर्फ भगत सिंह को ही क्या जरूरत थी आजादी का बिगुल बजाने की गुलाम तो और भी लोग थे? भगत सिंह ने भी जेल में खराब खाने को लेकर भूख हड़ताल की थी क्या वो भी 'पेटू और गद्दार' था..??? तेजबहादुर का परिवार ही सैनिक परिवार है इसके दादा भी आजाद हिंद फौज का सिपाही रहा है, तेजबहादुर ने भी अपने परिवार के देशभक्ति संस्कारों का लोहा सेना में मनवाया थे इन्हें कुल 16 अवार्ड सेना की तरफ से मिले थे। और इसमे कोई दो राय नही की इसका नामांकन साजिशन रद्द कराया गया, क्योंकि मोदी डर गया था अप्रत्याशित चुनावी परिणाम से.. अन्यथा NOC लाने के लिए इतना थोड़ा समय नही दिया जाता, और इसके अलावा भी जानबूझ कर NOC देने वाले अधिकारी को उसकी कुर्सी से गायब रखा गया,,,। बैगर किसी की पूरी प्रोफाइल जाने नकारात्मक टिप्पणी देना ना सिर्फ अपनी मूर्खता और नासमझी का परिचय देता है अपितु ऐसा करके हम अपने अधकचरे ज्ञान को ही प्रदर्शित करते हैं। *"तेजबहादुर बिना लड़े ही जीत गया,* *और कोई लाखों के फूल बरसा कर भी जनता की नजरों में गिर गया*
और हां ! इस घटनाक्रम से चौकीदार ने साबित कर दिया कि वो डरपोक भी है और 'चौकीदार ही ..... है।' वैसे डरना भी सच्चा था, एक तो 'तेज' ऊपर से 'बहादुर' धन्यवाद
शुभेच्छुक : आलेख : सुनीता वर्मा जिला पार्षद महेन्द्रगढ़ (हरियाणा) एवं पूर्व उपजिला प्रमुख व पूर्व बसपा जिला अध्यक्षा महेन्द्रगढ़ एवं बसपा पूर्व प्रत्याशी अटेली विधानसभा
*अजय सिंह 2004 में तब सुर्खियों में आए जब एनडीए सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री रहे प्रमोद महाजन ने उन्हें OSD यानी ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी बनाया , अजय सिंह ने बड़ी चालाकी से चाल चलते हुए डूबती हुई एयरलाइंस मोदीलुफ्थ की 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी, मोदिलुफ्त कंपनी का नाम बदलकर ही स्पाइसजेट किया गया अजय सिंह धीरे धीरे उसके सर्वेसर्वा बन बैठे ......UPA सरकार के समय अजय सिंह ने अपनी सारी हिस्सेदारी कलानिधि मारन को बेच दी जो यह कम्पनी घाटा खाते हुए 2015 तक चलाते रहे **2015 में स्पाइस जेट में ऐसा ही खेल खेला गया जो आज जेट के साथ खेला जा रहा है, स्पाइस जेट भी 2015 में आज की जेट एयरलाइंस की तरह तेल कंपनियों, एयरपोर्ट अथॉरिटी और विमान पट्टे पर देने वाली कंपनियों के भुगतान का लगातार डिफॉल्ट कर रही थी उस वक़्त भी स्टेट बैंक की अरुंधति भट्टाचार्य ने भी रजनीश कुमार ने भी उसे ओर लोन देने से इनकार कर दिया था...... *** प्रधानमंत्री मोदी भी जैसे आज जेट की चिंता कर रहे हैं वैसे ही 2015 में स्पाइसजेट के भविष्य को लेकर चिंतित बताये जा रहे थे......... ****यहाँ नरेश गोयल थे वहां कलानिधि मारन थे ( सन टीवी वाले ) देश के 38वें सबसे अधिक अमीर कलानिधि मारन ने स्पाइसजेट में अपने स्वामित्व अधिकार 1,500 करोड़ रुपये में अजय सिंह को बेचने का समझौता किया था लेकिन बाद में दिल्ली हाई कोर्ट में खुलासा किया गया कि अजय सिंह ने सिर्फ दो रूपए में स्पाइसजेट के मारन से 53% शेयर खरीद लिए ओर बाकी शेयर विदेशी कम्पनी को बिकवा दिए **************************************************
जेट एयरलाइंस की बर्बादी के पीछे का असली खेल.......... जब सारा मीडिया मोदी मोदी उदघोष में डूबा हुआ था तब इस बीच सुब्रमण्यम स्वामी का एक ट्वीट फ्लैश हुआ और बात आयी गयी हो गई ..........ट्वीट यह था “मैं नमो से अपील करता हूं कि वे जेटली और जयंत सिन्हा को जेट एयरवेज को स्पाइसजेट के हाथों बेचने के प्रयासों से बाज आने की हिदायत दें। इस मामले में पक्षपात और सरकारी पद के दुरुपयोग की बू आ रही है जिससे भाजपा की प्रतिष्ठा को नुकसान होगा।” आखिरकार यह मामला क्या है जिस पर स्वामी अपनी ही सरकार के मंत्रियों पर निशाना साध कर बैठ गए हैं?......... कल क्विंट ने इस घोटाले (जी हां यह घोटाला ही है) की परतों को खोलने का प्रयास किया है.............. क्विंट ने बताया है कि यदि कोई एयरलाइंस बन्द होती है तो उसके विमानों द्वारा जिन रुट पर सर्विस दी जा रही होती हैं उसे दूसरी विमानन कंपनी को किस तरह से अलॉट किया जाए इस संबंध में कुछ नियम ओर गाइडलाइंस बनाए गए हैं जो 2003 में बनाए गए थे यह नियम कहते है कि पहले पुरानी एयरलाइंस को स्लॉट देंगे. फिर नई एयरलाइंस को देंगे. जब से जेट एयरवेज बन्द हुई है इस नियमों की जमकर धज्जियाँ उड़ाई जा रही है और विस्तारा ओर एयरइंडिया की जगह नयी कम्पनी स्पाइस जेट को मनचाहा फायदा पुहचाया जा रहा है .... सारे महत्वपूर्ण रुट स्पाइस जेट को दिए जा रहे है,........विमानन उद्योग से जुड़े लोग जानते है कि एक बार स्लॉट पर कब्जा हो जाने पर आप एयरलाइंस को अचानक इससे हटा नहीं सकते हैं............ स्पाइसजेट के पास अब जेट के बंद हुए स्लॉट का बड़ा हिस्सा और कारोबार जा रहा है. इस पर इंडिगो और विस्तारा ने कड़ी आपत्ति जताई है.......... जेट बन्द होने पर जेट कर्मियों ने स्टेट बैंक प्रमुख रजनीश कुमार पर भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी जंतर मंतर पर भी जेटकर्मी रजनीश कुमार से नाराज थे................ बहुत से लोग यह समझ नही पा रहे थे कि इसमे रजनीश कुमार की क्या भूमिका है?..... कल उसे भी स्पष्ट करते हुए क्विंट ने लिखा है कि जेट में पचास फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी एसबीआई और एक सरकारी संस्था एनआईआईएफ के पास हैं एसबीआई को पता था कि एयरलाइन डूब रही है.लेकिन तब भी एसबीआई ने वक्त पर एक्शन नहीं लिया. 'जब संकट बढ़ गया, तो एसबीआई ने कहा, हम नए बिडर लाएंगे. इनवेस्टर लाएंगे और जरूरत पड़ी तो 1000-1500 करोड़ डाल भी देंगे, लेकिन एयरलाइंस सिक्योरिटी देगी तब, लेकिन डूबती हुई एयरलाइंस सिक्योरिटी कहां से लाती एसबीआई ने सोचा पैसा दे देंगे, तो हमारे ऊपर सीबीआई जांच बैठ जायेगी लेकिन एसबीआई को ये समझ में नहीं आया कि उसके कारण ही एयरलाइन डूबी. डूबी तो उसका भी पैसा भी डूबा पर SBI ने नया इमरजेंसी फंड नहीं डाला' SBIने कुछ नहीं किया. उसने अपनी भूमिका सही ढंग से नहीं निभाई. जेट एयरवेज दर्दनाक तरीके से बंद हुई. अब जिस तरह का घटनाक्रम सामने आ रहा है उससे यह समझ मे आ रहा है कि यह व्यक्ति विशेष को फायदा पुहचाने के लिए किया गया जो स्पाइसजेट का मालिक है और जिसका नाम अजय सिंह है अजय सिंह भाजपा से प्रमोद महाजन के जमाने से जुड़े हुए हैं 2014 में 'अबकी बार मोदी सरकार' का नारा भी अजय सिंह का ही गढ़ा हुआ था. वो लगातार बीजेपी के साथ काम करते रहे है, क्विंट अजय सिंह की इतनी ही कहानी बताता हैं लेकिन यह नही बताता कि अजय सिंह और भाजपा की सफलता की कहानी एक साथ चलती है, आज वे देश के उन सर्वोच्च तीन उद्योगपतियों में एक हैं, जिन्होंने मोदी सरकार के पिछले तीन साल में अपने कारोबार में 600 फीसदी से ज्यादा रिकॉर्ड मुनाफा कमाया है........ 2017 में जब मोदी सरकार ने NDTV के मालिक प्रणव राय के ठिकानो पर छापा मारा था और NDTV मुश्किल में था तब भी यह खबर आई थी कि अजय सिंह ने NDTV के बहुत सारे शेयर खरीदे है.......….. बहरहाल अजय सिंह ने जैसे ही 2015 में मारन परिवार से स्पाइस जेट को खरीदा..... उसके बाद से ही स्पाइस जेट का शेयर बाजार में कुलांचे मारने लगा,इन तीन वर्षों में स्पाइस जेट का शेयर महज 14 रुपये से 118 रूपए तक पहुंच गया है. एयरलाइन के धंधे में ऐसा लाभ अब तक किसी कम्पनी को नही हुआ है जिस वक्त 2015 में स्पाइसजेट बिका था उस वक्त बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इस सौदे पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने अजय सिंह द्वारा स्पाइसजेट को खरीदने को एक घोटाला बताया था अब 2019 में स्वामी वही बात फिर दोहरा रहे हैं अजय सिंह 2004 में तब सुर्खियों में आए जब एनडीए सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री रहे प्रमोद महाजन ने उन्हें OSD यानी ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी बनाया , अजय सिंह ने बड़ी चालाकी से चाल चलते हुए डूबती हुई एयरलाइंस मोदीलुफ्थ की 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी, मोदिलुफ्त कंपनी का नाम बदलकर ही स्पाइसजेट किया गया अजय सिंह धीरे धीरे उसके सर्वेसर्वा बन बैठे ......UPA सरकार के समय अजय सिंह ने अपनी सारी हिस्सेदारी कलानिधि मारन को बेच दी जो यह कम्पनी घाटा खाते हुए 2015 तक चलाते रहे 2015 में स्पाइस जेट में ऐसा ही खेल खेला गया जो आज जेट के साथ खेला जा रहा है, स्पाइस जेट भी 2015 में आज की जेट एयरलाइंस की तरह तेल कंपनियों, एयरपोर्ट अथॉरिटी और विमान पट्टे पर देने वाली कंपनियों के भुगतान का लगातार डिफॉल्ट कर रही थी उस वक़्त भी स्टेट बैंक की अरुंधति भट्टाचार्य ने भी रजनीश कुमार ने भी उसे ओर लोन देने से इनकार कर दिया था...... प्रधानमंत्री मोदी भी जैसे आज जेट की चिंता कर रहे हैं वैसे ही 2015 में स्पाइसजेट के भविष्य को लेकर चिंतित बताये जा रहे थे......... यहाँ नरेश गोयल थे वहां कलानिधि मारन थे ( सन टीवी वाले ) देश के 38वें सबसे अधिक अमीर कलानिधि मारन ने स्पाइसजेट में अपने स्वामित्व अधिकार 1,500 करोड़ रुपये में अजय सिंह को बेचने का समझौता किया था लेकिन बाद में दिल्ली हाई कोर्ट में खुलासा किया गया कि अजय सिंह ने सिर्फ दो रूपए में स्पाइसजेट के मारन से 53% शेयर खरीद लिए ओर बाकी शेयर विदेशी कम्पनी को बिकवा दिए यह बहुत बड़ा घोटाला था जिस तरह से मोदी सरकार ने स्पाइसजेट को बिकवाने के लिये अजय सिंह के पक्ष में बैटिंग की थी तब भी सुब्रमण्यम स्वामी ने इसे घोटाला बताया था......लेकिन तब भी बात दबा दी गई आज ठीक उसी तरह से घटनाएं घट रही है जैसे 2015 में स्पाइसजेट के बिकने के समय घटी थी तब भी अजय सिंह को ही फायदा पुहचाया गया आज भी वहीं हो रहा है अजय सिंह को अपने संपर्कों के जरिए ऊंट किस करवट बैठेगा इसका अंदाजा बहुत अच्छी तरह से था उसने जेट एयरलाइंस के ही 22 विमानों को सबलीज पर लिया और 200 जेट कर्मियों ओर 100 के लगभग जेट के पायलटों को आधी तनख्वाह देकर अपने यहाँ काम दिया और कुछ बोइंग ओर अलग से खरीदे ओर अपना बिजनेस चमका लिया अब एक बार फिर स्पाइसजेट का शेयर बाजार में नई ऊंचाइयों को छुएगा ओर अजय सिंह फिर किसी बड़े कारपोरेट समूह को अपना माल महंगी कीमत में बेचेंगे ओर एक बार फिर सारा माल समेट कर निकल लेंगे ............कालांतर में वह विमानन कम्पनी फिर डूबेगी फिर से 2 रुपये में उसे अजय सिंह जैसे लोग खरीदेंगे..... ओर फिर से मोटा माल कमाएंगे............ ऐसा ही बार बार होगा क्योंकि आप जैसे लोग समझते हैं कि मोदी सरकार में कोई भ्रष्टाचार का मामला तो सामने आया ही नही?........ यह कहलाता है क्रोनी कैपटलिज्म जिसमें, मोदी जी ने पीएचडी की डिग्री हासिल की है............ https://www.facebook.com/girish.malviya.16/posts/2410194452345522
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सीजेआई रंजन गोगोई ने अपने उपर लगे यौन शोषण के आरोपों को नकार दिया. सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि न्यायपालिका खतरे में है. अगले हफ्ते कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई होनी है, इसीलिये जानबूझकर ऐसे आरोप लगाए गए. दरअसल, एक महिला द्वारा सीजेआई पर यौन शोषण का आरोप लगाने के बाद सुप्रीम कोर्ट की एक स्पेशल बेंच ने मामले की सुनवाई की.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की चेतावनी को हल्के में न लें। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में है. इस आरोप से मैं बेहद आहत हुआ हूं. इस पूरे मामले पर मीडिया को संयम बरतने की सलाह दी गई है. विदित हो जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ एक महिला द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में विशेष बेंच में सुनवाई हुई. इस दौरान चीफ जस्टिस गोगोई ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि इसके पीछे कोई बड़ी ताकत होगी, वे सीजेआई के कार्यालय को निष्क्रिय करना चाहते हैं. जस्टिस गोगोई ने सुनवाई के दौरान कहा, 'मैंने आज अदालत में बैठने का असामान्य और असाधारण कदम उठाया है क्योंकि चीजें बहुत आगे बढ़ चुकी हैं. मैं इस कुर्सी पर बैठूंगा और बिना किसी भय के न्यायपालिका से जुड़े अपने कर्तव्य पूरे करता रहूंगा. 20 साल की सेवा के बाद यह सीजेआई को मिला इनाम है'. चीफ जस्टिस ने कहा कि इसके पीछे कोई बड़ी ताकत होगी, वे सीजेआई के कार्यालय को निष्क्रिय करना चाहते हैं. लेकिन न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता.रंजन गोगोई ने कहा, 'यह अविश्वसनीय है. मुझे नहीं लगता कि इन आरोपों का खंडन करने के लिए मुझे इतना नीचे उतरना चाहिए. कोई मुझे धन के मामले में नहीं पकड़ सकता है, लोग कुछ ढूंढना चाहते हैं और उन्हें यह मिला. न्यायाधीश के तौर पर 20 साल की निस्वार्थ सेवा के बाद मेरा बैंक बैलेंस 6.80 लाख रुपये है'. जस्टिस गोगोई ने स्पष्ट कहा कि मैं इस कुर्सी पर बैठूंगा और बिना किसी भय के न्यायपालिका से जुड़े अपने कर्तव्य पूरे करता रहूंगा. वहीं, जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि इस तरह के अनैतिक आरोपों से न्यायपालिका पर से लोगों का विश्वास डगमगाएगा. इस दौरान कोर्ट के अंदर जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि इसकी भी जांच होनी चाहिए कि इस महिला को यहां (सुप्रीम कोर्ट) में नौकरी कैसे मिल गई जबकि उसके खिलाफ आपराधिक केस है. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पुलिस द्वारा कैसे इस महिला को क्लीन चिट दी गई. अब उस दृश्य को याद करें जब सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर देश की न्यायपालिका पर खतरा बताया था। क्या यह रफॉल मामले में न्यायिक सक्रियता ओर एक तरह की " जज लोया " प्रतिक्रिया है? यदि यह हकीकत है तो ये मतदान बेमानी है। लोकतंत्र पर बड़ा खतरा है।सारी प्रक्रिया सत्ता हथियाने की औपचारिकता मात्र है। केंचुआ का व्यवहार जाहिर है, ईवीएम के खेल सामने आ ही रहे है एयर अब सुप्रीम कोर्ट की रिगिंग हो रही है। देश पर इतना बड़ा संवैधानिक संकट और ख़ुद को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहने वाला मीडिया बिहार से लाइव चुनाव रैली दिखा कर विज्ञापन के दाम चुका रहा है। नागरिक समाज को आगे आना होगा।