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Sunday, 16 September 2012

ग्रहों की चाल मध्यावधि चुनावों की ओर


तीसरा मोर्चा का शिगूफ़ा,ग्रहों की चाल और समय पूर्व चुनावों की दस्तक



लोकसंघर्ष मे 13-09-2012 को ऐसा कहा गया था---

(मुलायम सिंह के तीसरा मोर्चा कीचुनाव बाद घोषणा पर )

चुनाव लड़ने में समझौता नहीं करेंगे क्यूंकि उसमें अन्य दलों को भी सीटें देनी पड़ेंगी और चुनाव बाद उन्ही दलों की मदद से तीसरा मोर्चा बना कर प्रधानमंत्री बनने  की उनकी ख्वाहिश भी पूरी नहीं होगी।
http://loksangharsha.blogspot.com/2012/09/blog-post_13.html

उस लेख पर मैंने यह टिप्पणी दी थी-

ब्लॉगर विजय राज बली माथुर ने कहा…
मनमोहन सिंह जी नरसिंघा राव जी के परम प्रिय शिष्य हैं। राव साहब ने अपने हटने से पहले कांग्रेस को सत्ताच्युत करने का बंदोबस्त कर दिया था और दो वर्षों के अंतराल मे भाजपा को सत्तासीन होने का अवसर प्रदान कर दिया था। मनमोहन जी उसी नीति का अनुसरण कर रहे हैं। एक के बाद एक ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं जिंनका खामियाजा कांग्रेस चुनावों मे भुगतेगी। गत वर्ष अपनी पार्टी अध्यक्ष की गैर हाजिरी मे उनके द्वारा RSS/देशी-विदेशी कारपोरेट घरानों की मदद से अन्ना आंदोलन खड़ा करा कर पार्टी महासचिव राहुल को अन्ना से भिड़ाने का उपक्रम किया था। राहुल ने चुप्पी साध कर उनकी योजना पर पानी फेर दिया था। इस बार जन-विरोधी निर्णयों को लागू करके अपनी पूरी पार्टी की कब्र उन्होने खोद दी है। इतिहास मे वह आत्मभंजक के रूप मे ही जाने जाएँगे।
लेकिन इस बार एल के आडवाणी साहब ने भी ठान लिया है कि वह अपनी पार्टी और उसके नेता को पी एम नहीं बनने देंगे। ऐसी सूरत मे यदि बामपंथ ने साथ न दिया तो मुलायम वाया आडवाणी भाजपा के समर्थन से भी पी एम बन सकते हैं भले ही छह माह के लिए ही सही।

यदि बामपंथ मे कुछ नेता केंद्र सरकार मे मंत्री बनने के इच्छुक होंगे तो निश्चित रूप से बामपंथ भाजपा को रोकने के नाम पर मुलायम के तीसरे मोर्चे को ही समर्थन दे देगा बनिस्बत कांग्रेस
के।
15 सितम्बर 2012 9:07 am

हिंदुस्तान,लखनऊ दिनांक -16 सितंबर,2012 ,पृष्ठ 17 पर '20 सितंबर को भारत बंद का ऐलान' शीर्षक के अंतर्गत एजेंसी के हवाले से खबर छ्पी है कि,"भाकपा के वरिष्ठ नेता ए बी वर्धन ने बताया कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने 20 तारीख को हड़ताल का सुझाव दिया था जिसे स्वीकार कर लिया गया है। "

साम्यवादियों समेत सम्पूर्ण बामपंथ ने जिस प्रकार खुद को 'धर्म विरोधी' छवी प्रदान करके जनता से काट रखा है और जनता को RSSआदि से  गुमराह होने देने की छूट प्रदान कर रखी है क्योंकि वे ढ़ोंगी-ढकोसले बाज़ आडंबर को धर्म बता कर जनता को छलते रहते हैं।  यदि बामपंथी साम्यवादियों ने 'धर्म' की वास्तविक व्याख्या बता कर जनता को समझाया होता तो जनता उनके अलावा किसी फरेबी  पर विश्वास कर उसके चक्कर मे फँसती ही नही।

मैंने इसी ब्लाग मे 14-08-2012 को अपने 04 अगस्त के फेसबुक नोट के हवाले से  यह लिखा था-

·



'बकवास' कहना और लिखना कितना आसान है लेकिन क्या ग्रहों की चाल को रोका या टाला जा सकता है?यदि हाँ तो वित्त मंत्रालय,महाराष्ट्र के सी एम आफिस,नेल्लोर मे तामिल नाडू एक्स्प्रेस मे अग्निकांड क्यों नहीं रोके जा सके। ईरान की भूकंप त्रासदी को क्यों नहीं रोका जा सका। ईरान का घोर शत्रु भी आज ईरान को मानवीय मदद का प्रस्ताव दे रहा है पहले उसके वैज्ञानिकों ने चेतावनी देकर आबादी को क्यों नहीं हटवाया या भूकंप को रोक लिया।लेकिन विरोध के लिए विरोध करना फैशन है तो करते हैं जन-कल्याण बाधित करने के लिए।


राजनेताओं मे कैप्टन डॉ  लक्ष्मी सहगल,के बाद केंद्रीय मंत्री विलास राव देशमुख को भी क्यों नहीं बचाया जा सका?
यू पी सरकार के नेताओं मे मतभेदों के बारे मे भी आंकलन पहले ही दिया जा चुका है। 

http://krantiswar.blogspot.in/2012/03/blog-post_16.html?


14 सितंबर को केंद्र सरकार ने गैस के दाम अनाप शनाप बढ़ाते हुये 'खुदरा व्यापार' के लिए वाल मार्ट आदि विदेशी कंपनियों के लिए दरवाजे खोल दिये और सहयोगी दलों के विरोध पर सदा  चुप रहने वाले पी एम मनमोहन सिंह जी ने कहा कि सरकार जानी है तो दम-खम के साथ जाये। तमाम लोग इस पर भी सरकार की स्थिरता के प्रति आश्वस्त हैं। लेकिन ग्रह क्या कहते हैं जान लीजिये-

 अमा.पूर्णिमा वार रवि,नहीं सुखद परिवेश। निर्धन लेवे आपदा ,पशुजन पीड़ित देश । । 
रोग शोक व्याधि गति,संक्रामक अतिचार। सुख सुविधा मे न्यूनता,पाँच रूप रविवार । । 

गति चाल मार्गी गति ,गणना  शनि प्रधान । मौलिक राशि तुला बने,गोचर पंथ विधान । । 
राज काज व्यापार मे,चिंतन विविध प्रकार । नायक नेता आपदा ,जन विग्रह संचार । । 

कृषि खेत खलिहान मे,चिंतन कृषक निहार। उत्पादन उद्योग मे,सांसारिक अधिभार । । 
वित्त व्यवस्था विश्व की,असंतुलित परिवेश। मुद्राकोश आर्थिक विषय,चिंतन देश विदेश । । 

चलन कलाँ गुरु भौम का,षडाश्टकी शनि पक्ष। राजतंत्र नव चेतना,गठबंधन गति दक्ष । । 
दल विरोध की जगराती,नायक सत्ता मंद। राजकाज विपदा गति,निर्णय कथन दु: द्वंद । । 

युति योग शनि भौम का,राशि तुला निहार। अग्नि -वात से आपदा ,अस्त्र शस्त्र भंडार । । 
विस्फोटक रचना गति,हिंसा द्वंद प्रसार। राहत सेहत पक्ष मे,व्यय विशेष अधिभार । । 

मंगल राहू साथ मे,सम सप्तक गुरु भौम। यान खान घटना विविध,भू क्रंदन गति व्योम ।  । 
व्यय विशेष संसार मे,राज काज पाठ भार । त्रोटक संधि वार्ता,सीमा क्षेत्र विचार । ।
(पृष्ठ-41,निर्णय सागर-'चंड मार्तंड पंचांग ) इसी पृष्ठ पर 02 सितंबर से 05 सितंबर तथा 12 सितंबर से 16 सितंबर एवं 19 सितंबर से 23 तथा 27 सितंबर से 30 सितंबर तक न्यूनाधिक मानसून रचना का अंदेशा व्यक्त किया गया है। )

हिंदुस्तान,लखनऊ,16-09-2012 के पृष्ठ 02 पर मौसम निदेशक जे पी गुप्त की रिपोर्ट मे छ्पा है-"मध्य उत्तर प्रदेश के ऊपर कम हवा का दबाव क्षेत्र बना हुआ है और मानसून की ट्रफ   लाईन फिरोजपुर,करनाल,बरेली,बलिया,धनबाद,कोलकाता से होकर गुजर रही है। "मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार बीते 24 घंटों मे पूर्वी उत्तर प्रदेश मे मानसून सक्रिय रहा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश मे भी कहीं -कहीं बारिश हुई।

मौसम विभाग तो वैज्ञानिक उपकरणों के सहारे निकट भविष्य की बात करता है जबकि पंचांग मे गणना ग्रहों की चाल के आधार पर बहुत पहले प्रकाशित हो चुकी है। केवल किसी के न  मानने या बकवास घोषित कर देने से ग्रहों के असर को टाला नहीं जा सकता है और इसी लिए सम्पूर्ण विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि पी एम साहब ने मध्यावधि चुनावों का बिगुल फूँक दिया है अपनी  ही पार्टी को सत्ताच्युत करने हेतु।  राष्ट्रपति महोदय भी तीसरा मोर्चा को ही वरीयता देंगे ,यह बात उनकी शपथ कुंडली वाली पोस्ट मे दी जा चुकी है-

 http://krantiswar.blogspot.in/2012/07/blog-post_28.html

वर्तमान हालात 

इस समय देश मे कन्या के शनि-मंगल विग्रह,अग्निकांड,उपद्रव, हिंसा,तोड़-फोड़,जन-संहार की स्थिति उत्पन्न किए हुये हैं। केंद्र सरकार 'जनाक्रोश' के भी केंद्र मे है।
राष्ट्रपति पद के चुनाव मे अपने-अपने हितों के संरक्षण हेतु यू पी ए के प्रत्याशी को समर्थन देने वाले दल अब चुनाव के बाद यू पी ए को आँखें दिखा रहे हैं और 'मध्यावधि चुनावों' की संभावनाएं व्यक्त कर रहे हैं। ग्रह भी अराजकता की स्थिति बनाए हुये हैं। चुनावों की स्थिति मे एन डी ए और यू पी ए से कुछ दल टूट कर तीसरे गैर कांग्रेसी/गैर भाजपाई  गुट के साथ आ जाएँगे। इस तीसरे गुट को बहुमत न भी मिले तो भी कांग्रेस को मजबूरन इसे ही समर्थन देना होगा और राष्ट्रपति महोदय भी चुनाव अभियान के दौरान इस गुट के नेताओं को दिये गए अपने आश्वासन को पूर्ण करेंगे। अतः नए महामहिम के आगमन को केंद्र मे गैर कांग्रेस/भाजपा सरकार के गठन की मुहिम के रूप मे भी देखा जा सकता है।   
   



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Wednesday, 20 June 2012

देखिये 'लोकतन्त्र का भ्रमजाल'

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(दोनों कटिंग-हिंदुस्तान,लखनऊ,दिनांक 20 जून 2012 से )

पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंघा राव जी ने पद से हट कर 'THE INSIDER' मे यों ही नहीं लिख दिया था कि,"हम स्वतन्त्रता के भ्रमजाल मे जी रहे हैं"। वस्तुतः उनको व्यावहारिक ज्ञान था । उनके बाद अटल जी ने परमाणु विस्फोट के बाद बतौर प्रधानमंत्री यू एस ए के प्रेसीडेंट जनाब बिल क्लिंटन साहब को पत्र द्वारा सूचित किया था। अब माननीय पी एम मनमोहन साहब ने ओबामा साहब को भारत मे गैस व डीजल के दाम बढ़ाने की सूचना दी है और साथ ही साथ हवाई यात्रा मे 20 प्रतिशत कटौती भी दी जा रही है तथा यूरोजों की मदद के लिए 10 अरब डालर भी दिये जा रहे हैं।

हैं न नीति निर्धारण मे परतंत्र हम आज़ादी के 65 वर्ष बाद भी। साम्राज्यवाद का यह नया स्वरूप है। राष्ट्रपति हमारे सांसद-विधायक चुनेंगे किन्तु अमेरिकी पसंद का। विधायक-सांसद जनता द्वारा निर्वाचित हैं अतः चुनाव लोकतान्त्रिक ही होगा। वाकई यह 'लोकतन्त्र का भ्रमजाल' ही है।

समाधान क्या है?यह तो बामपंथ को सोचना पड़ेगा कि कैसे वह जन-समर्थन हासिल करे?वर्तमान नीतियाँ जनता से बामपंथ को दूर रखने वाली हैं।

 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर

Friday, 28 October 2011

अध्यात्म और कम्यूनिज़्म

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मनोज दास जी,बाम-पंथ और आध्यात्मिकता

हिंदुस्तान,लखनऊ,25 अक्तूबर,2011 
उडिया भाषा के प्रख्यात साहित्यकार मनोज दास जी जो खुद बाम-पंथी रहे हैं और अब आध्यात्मिकता के मार्ग से जन-कल्याण मे लगे हुये हैं यहाँ स्पष्ट रूप से कह गए हैं कि 'बुकर पुरस्कार' भारत को नीचा दिखाने वालों को दिया जाता है और "बुकर पुरस्कार तय करने वाली कमेटी सामाजिक यथार्थ और कामुकता का काकटेल है।"

अभी कुछ ही दिनों पहले जन-लोकपाल को नियुक्त करने की कमेटी मे 'बुकर' पुरस्कार प्राप्त लोगों को रखने की मांग एक भारत-विरोधी शख्स ने खुले आम रखी थी। उसी शख्स ने स्वाधीनता दिवस पर ब्लैक आउट रखवाया था उसी ने राष्ट्रध्वज का अपमान करवाया था और आज भी वह तथा उसके गैंग के लोग निर्बाध  घूम रहे हैं।दुर्भाग्य यह है कि विद्वान भी जिनमे इंटरनेटी ब्लागर्स भी शामिल हैं उसी देशद्रोही शख्स के अंध-भक्त बने हुये हैं।

मनोज दास जी ने बताया है कि आज 36 प्रतिशत लोग 'अवसाद'-डिप्रेशन -से ग्रस्त हैं । बच्चों को अपने माँ-बाप पर नही ,फेसबुक और एस एम एस पर विश्वास है।मेरे विचार मे  उसी प्रकार इंटरनेटी ब्लागर्स को देश-भक्तों पर नही 'अन्ना' पर विश्वास है। अन्ना आंदोलन कांग्रेस  के मनमोहन गुट,संघ/भाजपा ,भारतीय और अमेरिकी कारपोरेट घरानों तथा अमेरिकी प्रशासन के सहयोग  से 'कारपोरेट-भ्रष्टाचार के संरक्षण' हेतु चलाया गया था। अपने उद्देश्य मे वह जनता को उल्टे उस्तरे से मूढ़ कर पूरी तरह सफल रहा है।  टाटा,अंबानी,नीरा राडिया आदि उद्योगपति और उनके दलाल जिनहोने 'राजा' आदि मंत्री अपने हितार्थ बनवाए खुले घूम रहे हैं और राजा आदि मंत्री जिनहोने इन उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाया जेल मे विराजमान हैं। राजनेताओं का मखौल उड़ाने वाली किरण बेदी एयर टिकटों का घपला करके और अरविंद केजरीवाल प्राप्त चंदे मे घपला करके भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन मे जनता को बेवकूफ बना रहे थे। हमारे इंटरनेटी ब्लागर्स उनका गुणगान कर रहे थे/हैं। सम्पूर्ण परिस्थितियों के लिए धर्म के नाम पर फैली अधार्मिकता जिम्मेदार है। लेकिन अफसोस कि हमारा बाम-पंथ अधार्मिकों की परिभाषा स्वीकार करके धर्म का विरोध करता तथा जनता की सहानुभूति खोता रहता है। जब मै धर्म की परिभाषा बताने का प्रयास करता हूँ तो सांप्रदायिक तत्व मुझ पर प्रहार करते हैं और हमारे बाम-पंथी बंधु भी उसका विरोध करते हैं। 'सत्य' कड़ुवा होता है और उसे कोई भी स्वीकार नहीं करना चाहता।

आध्यात्मिकता=अध्ययन +आत्मा= अपनी आत्मा का अध्ययन करना ही अध्यात्म है।


धर्म=जो धारण करता है (शरीर को धारण करने हेतु जो आवश्यक है वही धर्म है बाकी सब अधर्म है,एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए मूली अथवा दही का सेवन करना धर्म है लेकिन जुकाम-खांसी के रोगी व्यक्ति हेतु वही दही अथवा मूली सेवन अधर्म है)। यह व्यक्ति सापेक्ष है। सब को एक ही तरह नहीं हाँका जा सकता।

भगवान=भ (भूमि)+ग (गगन)+व (वायु)+I(अनल-अग्नि)+न (नीर-जल)। इन पाँच प्रकृतिक तत्वों के समन्वय को भगवान कहते हैं इनके पहले अक्षरों के संयोजन से और चूंकि ये खुद ही बने हैं इन्हें किसी ने बनाया नहीं है इसीलिए इन्हे 'खुदा' भी कहते हैं और चूंकि येGENERATE,OPERATE ,DESTROY करते हैं पहले अक्षरों के संयोजन से इन्हे ही GOD भी कहते हैं। भगवान=खुदा =GOD तीनों एक ही के तीन नाम हैं। मतभेद कहाँ है?

मतभेद जो है वह दलालों=पुरोहितों ने अपने निजी स्वार्थ मे जनता को बाँट कर शोषण करने हेतु उत्पन्न किया है। अतः हमे पुरोहितवाद का जम कर और डट कर विरोध करना है न कि,अध्यात्म,भगवान,खुदा या गाड का या शरीर को धारण करने वाले धर्म का।

बाम-पंथ,कम्यूनिस्ट और वैज्ञानिक यहीं गलती करते हैं कि वे ढ़ोंगी-पोंगापंथी-पुरोहितों की व्याख्या को धर्म मान कर धर्म का विरोध करते हैं। महर्षि कार्ल मार्क्स ने भी पुरोहितवाद को ही धर्म मान कर उसका विरोध किया है। आज के कम्यूनिस्ट भी दक़ियानूसी पोंगापंथियों के काले कारनामों को ही धर्म मान कर धर्म का विरोध करते हैं जबकि उन्हे वास्तविकता को समझ कर,पहचान कर जनता को भी समझाना चाहिए तभी 'मानव को मानव के शोषण 'से मुक्त कराकर 'मानव जीवन को सुंदर,सुखद और समृद्ध' बनाया जा सकेगा अन्यथा पुरोहितवाद का शिकार होकर परस्पर संघर्षरत रह कर जनता अपना उल्टे उस्तरे से मुंडन कराती रहेगी।

साहित्यकार मनोज दास जी ने जनता को  बामपंथ के मर्म  को समझाने हेतु अध्यात्म का मार्ग अपना कर एक  सकारात्मक पहल की है। हम उनके प्रयासों की सफलता की कामना करते हैं और 'भाई-दोज़' के इस पावन पर्व पर दुनिया मे भाई-चारा और अमन कायम करने की दिली ख़्वाहिश रखते हैं।

'भाई-दोज' पर' चित्रगुप्त-पूजा' भी होती है। 'चित्रगुप्त' के संबंध मे भी पुरोहितवाद ने भ्रांति फैला रखी है। ढोंगियों के अनुसार ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न होने के कारण 'कायस्थ'कहलाने वाले चित्रगुप्त की एक पत्नी ब्राह्मण कन्या और दूसरी नाग कन्या थीं। पढे-लिखे और समझदार कहलाने वाले कायस्थ इसे ही सही मान कर इतराते हैं। लेकिन यह पुरोहितवाद के शिकंजे को और मजबूत करने वाली मनगढ़ंत दन्त-कथा है।

वस्तुतः अब से दस लाख वर्ष पूर्व जब मानव आज जैसी स्थिति मे आया तो बुद्धि,ज्ञान और विवेक द्वारा उसने मनन करना प्रारम्भ किया और इसीलिए वह 'मनुष्य' कहलाया। उस समय 'काया' से संबन्धित ज्ञान देने वाले को 'कायस्थ' कहा गया। अर्थात मनुष्य की 'काया' से संबन्धित सभी प्रकार का ज्ञान देना इस कायस्थ का कर्तव्य था। 12 राशियों के आधार पर चित्रगुप्त की 12 संतानों की गणना प्रचलित हो गई। 

'चित्रगुप्त' कोई व्यक्ति-विशेष नहीं है बल्कि प्रत्येक मनुष्य के 'अवचेतन-मस्तिष्क' मे  गुप्त रूप से सक्रिय रहने वाला उसका अपना ही 'चित्त' है । प्रत्येक मनुष्य द्वारा किए गए सदकर्म,दुष्कर्म और अकर्म का लेखा-जोखा उसके अपने मस्तिष्क के इसी 'चित्त' पर गुप्त रूप से अंकित होता रहता है जो मोक्ष-प्राप्ति तक जन्म-जन्मांतर मे उस मनुष्य के 'कारण शरीर' और 'सूक्ष्म शरीर' के साथ उसकी 'आत्मा' के साथ चलता रहता है और उसी अनुरूप आगामी जन्म मे उसका 'भाग्य' या प्रारब्ध निर्धारित होता है।

अतः चित्रगुप्त पूजा का अभिप्राय तो मानव मस्तिष्क मे  इस 'गुप्त' रूप से अवस्थित 'चित्त' को स्वस्थ व संतुलित रखने से है न कि,पुरोहितवादी वितंडवाद  मे फँसने से।

बढ़ती आबादी के साथ-साथ जब  'कायस्थ' पर अधिक भार हो गया तो 'श्रम-विभाजन' के आधार पर शिक्षा को चार वर्गों मे बाँट दिया गया-
1-ब्रह्मांड से संबन्धित ज्ञान को ब्रह्म-विद्या और देने वाले को 'ब्राह्मण' कहा गया ,उत्तीर्ण करने पर विद्यार्थी को 'ब्राह्मण' की उपाधी दी जाती थी। 
2-क्षात्र विद्या जिसमे सैन्य तथा सामान्य प्राशासन आता था को 'क्षत्री' कहा गया। 
3-व्यापार,बानिज्य से समांबंधित ज्ञान को 'वैश्य' -उपाधि  से विभूषित किया गया। 
4-विभिन्न प्रकार की सेवाओं से संबन्धित ज्ञान प्राप्त  करने वालों को 'क्षुद्र' की उपाधि मिलती थी। 

ये चारों उपाधियाँ अर्जित ज्ञान के आधार पर थीं। 'कर्म' करना उनका उद्देश्य था। जैसे बिना डिग्री के डॉ की संतान डॉ नहीं हो सकती,इंजीनियर की संतान बिना डिग्री के इंजीनियर नहीं हो सकती उसी प्रकार उस समय भी ये उपाधियाँ ज्ञानार्जन से प्राप्त करने वाला ही उसके अनुरूप उन्हें धारण व उनका उपयोग कर सकता था। एक ही पिता की अलग-अलग सन्तानें उपाधि के आधार पर -ब्राह्मण,क्षत्री,वैश्य और क्षुद्र हो सकती थीं।

कालांतर मे शोषणवादी व्यवस्था मे 'पुरोहितवाद' पनपा और उसने इन उपाधियों-डिगरियों के स्थान पर 'कर्म'सिद्धान्त की अवहेलना करके 'जातिगत'व्यवस्था फैला दी जो आज तक उत्पीड़न और शोषण का माध्यम बनी हुई है।

जरूरत तो इस बात की है कि अपनी प्राचीन 'कर्म-सिद्धान्त'पर आधारित ज्ञान-व्यवस्था को बहाल करने मे कम्यूनिस्ट तथा बामपंथी कोशिश करेंतथा जनता को जागरूक करें और 'पुरोहितवाद' की जकड़न से उसे छुड़ाए। लेकिन पुरोहितवादियो के कुचक्र मे फंस कर अभी बामपंथ एवं कम्यूनिस्ट आंदोलन इस ओर से आँखें मूँदे हुये है और इसीलिए सफल नहीं हो पा रहा है। हम आशा करते हैं कि महापंडित राहुल सांस्कृतियायान ,स्वामी सहजानन्द सरस्वती और क्रांतिकारी गेंदा लाल दीक्षित सरीखे आर्यसमाजी -कम्यूनिस्टों से प्रेरणा लेकर बामपंथ और कम्यूनिस्ट आंदोलन जनता को 'सन्मार्ग' पर ला सकेगा।  





http://janhitme-vijai-mathur.blogspot.com/2011/10/blog-post_28.html




 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर