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Tuesday, 3 July 2018

डिप्लोमेटिक ब्लाईंडनेस है मोदी सरकार की विदेश नीति ------ रहीस सिंह

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 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Thursday, 22 June 2017

ऐसा कहना कि वर्तमान में मोदी का कोई विकल्प नहीं है देश के 125 करोड़ टैलेन्टेड भारतीयों का अपमान हैं ------ रजनीश श्रीवास्तव

 देश 125 करोड़ भारतीयों का है।यहाँ के 30 करोड़ लोग मोदी जी से ज्यादा शिक्षित और गुणी हैं।इनमें से कोई भी मोदी जी से कहीं बेहतर भारत का प्रधानमंत्री बन सकता है।..................मोदी जी बिन बुलाए पाकिस्तान जाकर भारतीय सैनिकों के खून से सना नवाज शरीफ के जन्मदिन का केक खाने वाले भारत के प्रथम प्रधानमंत्री निकले।यही नहीं जब नवाज शरीफ ने आई एस आई की मदद से रिटर्न गिफ्ट के रूप में भारत को पठानकोट आतंकी हमला दिया तो भारत की कातिल पाकिस्तान की इसी आई एस आई को पठानकोट बुला कर कातिल से जाँच कराने वाले भी देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने।......................भाजपा में लगभग दो सौ से ज्यादा सांसद ऐसे होंगे जो मोदी जी से ज्यादा पढ़ेलिखे और काबिल हैं और मौका मिले तो मोदी जी से कहीं बेहतर प्रधानमंत्री साबित होंगे।.....कल कोई और होगा और यकीन मानिए मोदी जी से कहीं बेहतर होगा------------------


Rajanish Kumar Srivastava
#क्या देश नरेन्द्र मोदी के अलावा सक्षम प्रधानमंत्री पाने के मामले में विकल्पहीन हो गया है?#
एक सधी हुई रणनीति के तहत अक्सर भाजपा भक्त यही प्रश्न करते हैं कि माना मोदी जी बहुत सारे वादे पूरा नहीं कर पा रहे हैं व शासन में कुछ कमियाँ हैं तो आप ही बताईये कि वर्तमान में मोदी का क्या विकल्प है।प्रायोजित ढ़ंग से वही स्थिति बनाने की कोशिश की जा रही है कि जैसे "मोदी इज़ इंडिया एण्ड़ इंडिया इज़ मोदी"। जैसा कभी स्व० इन्दिरा गाँधी के लिए कहा जाता था कि,"इन्दिरा इज़ इंडिया एण्ड़ इंडिया इज़ इन्दिरा"।
आइए आज इतिहास के आईने से वर्तमान का जवाब तलाशते हैं।
ये देश 125 करोड़ भारतीयों का है।यहाँ के 30 करोड़ लोग मोदी जी से ज्यादा शिक्षित और गुणी हैं।इनमें से कोई भी मोदी जी से कहीं बेहतर भारत का प्रधानमंत्री बन सकता है।केवल लोकलुभाना भाषण देने से सक्षम प्रधानमंत्री नही हो जाता।मोदी जी जब विपक्ष में थे तो ऐसा ललकारते थे कि लगता था कि उनके सत्ता में आते ही पाकिस्तान विश्व के नक्शे से गायब हो जाएगा और चीन चूहे की तरह बिल में दुबक जाएगा।हुआ बिल्कुल उल्टा मोदी जी बिन बुलाए पाकिस्तान जाकर भारतीय सैनिकों के खून से सना नवाज शरीफ के जन्मदिन का केक खाने वाले भारत के प्रथम प्रधानमंत्री निकले।यही नहीं जब नवाज शरीफ ने आई एस आई की मदद से रिटर्न गिफ्ट के रूप में भारत को पठानकोट आतंकी हमला दिया तो भारत की कातिल पाकिस्तान की इसी आई एस आई को पठानकोट बुला कर कातिल से जाँच कराने वाले भी देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने।इसके विपरीत जब भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू थे तो विद्वानों को यह चिन्ता सताती थी कि नेहरू के बाद कौन? और फिर नेहरू जी की मृत्यु के बाद लाईम लॉईट से दूर रहने वाले अत्यन्त साधारण ,सौम्य और मितभाषी आदरणीय लाल बहादुर शास्त्री जी देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने और ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल बने।इसी तरह जब अचानक असमय ही लाल बहादुर शास्त्री जी कालकवलित हो गये तो यह समझ में नहीं आ रहा था कि चुनौती की इस घड़ी में देश को कौन सम्हालेगा।उस समय तक यद्यपि इन्दिरा गाँधी जी सांसद और कैबिनेट मंत्री का अनुभव रखती थीं लेकिन उनको बोलते हुए बहुधा नहीं पाया जाता था
वो मौन रहना पसन्द करती थीं।मोरारजी देसाई और श्री जयप्रकाश नारायण जी उन्हें #गूँगी गुड़िया# कहा करते थे।यही गूँगी गुड़िया इन्दिरा गाँधी जी जब भारत की प्रधानमंत्री बनीं तो उन्होंने पाकिस्तान का इतिहास और भूगोल दोनों एक साथ बदल दिया और एक नये देश बांग्लादेश को जन्म दे दिया।इसी तरह अनिच्छा से राजनीति में आए मितभाषी और भद्र युवा प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने देश को कम्प्यूटर,संचार और डिजिटल क्रांति के माध्यम से 21 वी सदी में प्रवेशित करा दिया।इसी तरह एक अर्थशास्त्री और मौन रहने वाले मनमोहन सिंह जिनमें नेतागिरी का कोई गुण नहीं था ने राजनीतिक अस्थिरता के दौर में भी दो बार लगातार प्रधानमंत्री बनने का कारनामा कर दिखाया और मौन रहकर देश को आर्थिक प्रगति और उदारीकरण की राह दिखाई।आज मोदी जी देश के प्रधानमंत्री हैं कल कोई और होगा और यकीन मानिए मोदी जी से कहीं बेहतर होगा।भाजपा में लगभग दो सौ से ज्यादा सांसद ऐसे होंगे जो मोदी जी से ज्यादा पढ़ेलिखे और काबिल हैं और मौका मिले तो मोदी जी से कहीं बेहतर प्रधानमंत्री साबित होंगे।यह टैलेंट से भरा देश है और यहाँ प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।ऐसा कहना कि वर्तमान में मोदी का कोई विकल्प नहीं है देश के 125 करोड़ टैलेन्टेड भारतीयों का अपमान हैं।जो देश विश्व गुरू बनने की क्षमता रखता है जिसके वैज्ञानिक नासा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हों, जिस देश का इसरो अपने योग्यतम वैज्ञानिकों के दम पर विश्व कीर्तिमान रच रहा हो।जो देश योग्यतम वैज्ञानिकों,शिक्षाविदों, प्रशासकों आदि से भरापुरा हो वह प्रधानमंत्री के सन्दर्भ में कभी भी विकल्पहीन नहीं हो सकता है।ऐसा कहने वाले कि वर्तमान में मोदी का कोई विकल्प नहीं है, प्रतिभाओं से भरे देश का अपमान करते हैं।कृपया निराशावादी ना बने।ये महान देश ना कभी रूका है ना कभी रूकेगा।

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Tuesday, 28 February 2017

गुरमेहर ने युद्ध और नफरत की राजनीति पर सोचने को मजबूर किया ------ Girish Malviya

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Girish Malviya
गुरमेहर ने युद्ध और नफरत की राजनीति पर सोचने को मजबूर किया। शहीद की बेटी के वीडियो में कही गई बात एक बार पढ़ने से समझ में न आए, तो बार-बार पढ़िए।-

मैं भारत के जालंधर शहर की रहने वाली हूं.
ये मेरे पिता कैप्टन मनदीप सिंह हैं.
वो 1999 के कारगिल युद्ध में मारे गए थे.
मैं दो साल की थी, जब उनका निधन हुआ.
उनसे जुड़ी बहुत कम यादें हैं मेरे पास.
पिता नहीं होते तो कैसा महसूस होता है, इसकी ज़्यादा यादें हैं मेरे पास.
मुझे याद है कि मैं पाकिस्तान और पाकिस्तानियों से कितना नफ़रत करती थी, क्योंकि उन्होंने मेरे पिता को मारा था.
मैं मुसलमानों से भी नफ़रत करती थी, क्योंकि मैं सोचती थी कि सभी मुस्लिम पाकिस्तानी होते हैं.
जब मैं छह साल की थी तो बुर्का पहनी एक महिला को चाकू मारने की कोशिश भी की.
किसी अनजान वजह से मुझे लगा कि उसने मेरे पिता को मारा होगा.
मेरी मां ने मुझे रोका और समझाया कि.
पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, बल्कि जंग ने मारा है.
वक़्त लगा लेकिन आज मैं अपनी नफ़रत को ख़त्म करने में कामयाब रही.
ये आसान नहीं था लेकिन मुश्किल भी नहीं था.
अगर मैं ऐसा कर सकती हूं तो आप भी कर सकती हैं.
आज मैं भी अपने पिता की तरह सैनिक बन गई हूं.
मैं भारत-पाकिस्तान के बीच अमन के लिए लड़ रही हूं.
क्योंकि अगर हमारे बीच कोई जंग ना होती, तो मेरे पिता आज ज़िंदा होते.
मैंने ये वीडियो इसलिए बनाया ताकि दोनों तरफ़ की सरकारें दिखावा करना बंद करें.
और समस्या का समाधान दें.
अगर फ़्रांस और जर्मनी दो विश्व युद्ध के बाद दोस्त बन सकते हैं.
जापान और अमरीका अतीत को पीछे छोड़ आगे देख सकते हैं.
तो हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते?
ज़्यादातर भारत और पाकिस्तानी शांति चाहते हैं, जंग नहीं.
मैं दोनों देशों के नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठा रही हूं.
हम तीसरे दर्जे के नेतृत्व के साथ पहले दर्जे का मुल्क़ नहीं बन सकते.
प्लीज़ तैयार हो जाइए. एक-दूसरे से बातचीत कीजिए और काम पूरा कीजिए.
स्टेट प्रायोजित आतंकवाद बहुत हो चुका.
स्टेट प्रायोजित जासूस बहुत हुए.
स्टेट प्रायोजित नफ़रत बहुत हुई.
सरहद के दोनों तरफ़ कई लोग मारे जा चुके हैं.
बस, बहुत हुआ.
मैं ऐसी दुनिया चाहती हूं, जहां कोई गुरमेहर कौर ना हो, जिसे अपने पिता की याद सताती हो.
मैं अकेली नहीं. मेरे जैसे कई हैं.

एक भाई की वाल पर मिला अभी अभी
https://www.facebook.com/girish.malviya.16/posts/1433656299999347?comment_id=1433747266656917&comment_tracking=%7B%22tn%22%3A%22R2%22%7D




 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Thursday, 4 August 2016

विश्व बंधुत्व की भावना का परित्याग भारत की मूल भावना की समाप्ती होगा ------ हरजिंदर

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 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Saturday, 19 December 2015

ब्राहमणवाद का राजनीतिक अर्थशास्त्र ------ महेश राठी

हिंदू समाज में दलित के रूप में पैदा होना निश्चित ही दुनिया का सबसे निकृष्टतम कृत्य और कृत्य भी ऐसा जिसमें आपका कोई हाथ नही होता है। यह निकृष्टता और अपमान ब्राहमणवादी संघी टोले के केन्द्रीय सत्ता पर काबिज होने के बाद से अपने चरम पर है। ब्राहमणवादियों की दबंगई और उसमें सत्ता का दुरूपयोग अपनी पूरी आक्रामकता और निर्लज्जता के साथ देश में चारो तरफ पैर पसार रहा है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी भी इस दबंगई से अछूती नही है। 


Mahesh Rathi


ब्राहमणवाद का राजनीतिक अर्थशास्त्र :
हिंदू समाज में दलित के रूप में पैदा होना निश्चित ही दुनिया का सबसे निकृष्टतम कृत्य और कृत्य भी ऐसा जिसमें आपका कोई हाथ नही होता है। यह निकृष्टता और अपमान ब्राहमणवादी संघी टोले के केन्द्रीय सत्ता पर काबिज होने के बाद से अपने चरम पर है। ब्राहमणवादियों की दबंगई और उसमें सत्ता का दुरूपयोग अपनी पूरी आक्रामकता और निर्लज्जता के साथ देश में चारो तरफ पैर पसार रहा है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी भी इस दबंगई से अछूती नही है। 
द्वारका इलाके में कुतुब विहार नामक कालोनी में एक दलित रामप्रसाद के नेतृत्व में कालोनी के अनुसूचित जाति के लोगों ने कुछ साल पहले एक मंदिर की नींव रखी और कईं सालों की मेहनत के बाद उसे विकसित भी किया। अब अचानक इलाके के ब्राहमणवादी भाजपाईयों को याद आ गया कि उनकी देवी देवताओं की देखभाल करने वाले लोग दलित हैं और उन्हें उनके देवी देवताओं की रखवाली और पूजा अर्चना करने का कोई अधिकार नही है। उसके बाद भाजपा के स्थानीय नेता शेलैन्द्र पाण्ड़े के साथ मिलकर उनकी ही पार्टी के दो अन्य कार्यकर्ताओं अभिमन्यू और मनीषा ने रामप्रसाद और उनके परिवार को मंदिर से धक्के देकर बाहर कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि तुम नीच जाति वालों को पूजा पाठ करने विशेषकर मंदिर की देखभाल करने का कोई अधिकार ही नही है। रामप्रसाद ने थाने जाकर शिकायत करनी चाही तो थानाध्यक्ष ने साफ कहा कि शिकायत मत करो पछताना पडेगा और शिकायत लेने से मनाकर दिया। उसके बाद उन्होंने अपनी शिकायत डीसीपी और पुलिस आयुक्त को एवं अनुसूचित जाति जनजाति आयोग में भी भेजी जहां आयोग ने 29 दिसम्बर को इस मामले की सुनवाई तय की है। 
अब थानाघ्यक्ष की चेतावनी के मूर्त रूप लेने का समय था। भाजपा नेता ने अपनी सहयोगी मनीषा के माध्यम रामप्रसाद पर छेड़छाड़ करने का आरोप लगवाकर उसे जेल भेज दिया। पंरतु ऐसा मामला बनने की आशंका को लेकर एक शिकायत रामप्रसाद ने पहले ही पुलिस विभाग को कर दी थी और उसी के आधार पर उन्हें जमानत भी मिल गई। इस इलाके में जगह जगह लगे पोस्टर एवं होर्डिंग्स भाजपा नेता के पद एवं रसूख का पता दे रहे हैं तो वहीं उनके साथ उन्हीं होर्डिंग्स में लगी उस महिला की तस्वीर भी पूरी कहानी बयां कर देती है जिसने रामप्रसाद को छेडछाड़ को आरोप में फंसवाया है। 
दरअसल यह पूरा मामला सरकारी जमीन को हड़पने का है। डीडीए की कईं बीघा जमीन में यह मंदिर बना हुआ है। मंदिर के पास भी लगभग एक हजार गज की जमीन पर बना ढ़ंाचा है अर्थात मामला स्थानीय निवासियों द्वारा इस मंदिर को कालोनी के कब्जे में रखकर इसका सामाजिक इस्तेमाल करने बनाम लैंड माफिया द्वारा इसे हथियाकर बेचन का है। जिसने कईं सालों तक इस मंदिर को बनाने में अपना सब कुछ लगाया और जिसका पूरा परिवार इस मंदिर के रख रखाव में लगा उसे एक दिन ब्राहमणवादी संगठन के प्रदेश स्तरीय नेता ने बता दिया कि तुम दलित हो और ना मंदिर तुम्हारा है और यह धर्म ही तुम्हारा है, भागो यहां से। हिंदू धर्म, उसके मंदिर उसके पूरे कार्मकाण्ड़ों का सच ही यही है कि वो एक वर्ग विशेष को देश और समाज के पूरे संसाधनों पर कब्जे और उसके दोहन का अर्थशास्त्र सिखाता है। यह तभी से जारी है जब हजारों साल पहले इस देश के मूल निवासियों पर आर्यों के रूप में पहला साम्राज्यवादी हमला हुआ था।* तभी से इन ब्राहमणवादियों की कोशिश धार्मिक कर्मकाण्ड़ों पर अपना वर्चस्व बनाने के माध्यम से पूरी प्राकृतिक और राष्ट्रीय संपदा के दोहन की है। परंतु अब लड़ाई का बिगुल बज चुका है और कुतुब विहार, गोला डेरी में ब्राहमणवाद के कब्जे से इस मंदिर को आजाद कराकर इसे समता प्रेरणा स्थल के रूप स्थापित किया जायेगा। आप सभी के इसमें सहयोग की आशा है।
https://www.facebook.com/mahesh.rathi.33/posts/10203777537797264
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'भारत पर आर्यों का हमला ' यह एक पाश्चात्य दृष्टिकोण है जो साम्राज्यवादियो द्वारा खुद को श्रेष्ठ साबित करने का एक घृणित प्रयास है। 
वस्तुतः आर्य न कोई जाति है, न संप्रदाय, न ही धर्म । आर्य शब्द आर्ष का अपभ्रंश है जिसका अभिप्राय है 'श्रेष्ठ' अर्थात विश्व का कोई भी मनुष्य जो श्रेष्ठ है वह आर्य है। 
यदि पाश्चात्य दुष्चक्र में फंस कर आर्य को जाति,धर्म,संप्रदाय के रूप में लेकर हमलावर मानते रहेंगे तो कभी भी अपने लक्ष्य में सफल न हो सकेंगे, जैसा कि ब्राह्मणवादी चाहते भी हैं। 
'त्रिवृष्टि' अर्थात तिब्बत क्षेत्र आर्यों का मूल उद्गम क्षेत्र है जहां 'स्व:' और 'स्वधा' का सृजन हुआ। ये श्रेष्ठ लोग जब आबादी बढ्ने पर दक्षिण में हिमालय के पार जिस निर्जन-क्षेत्र में बसे वह इनके कारण आर्यावृत कहलाया। पहले मूल निवासी तो ये श्रेष्ठ जन- आर्य ही थे। तब तक आज का दक्षिण भारत  'जंबू द्वीप' के रूप में एक अलग निर्जन टापू था। जब  भू- गर्भीय हलचलों से 'जंबू द्वीप' उत्तर की ओर बढ़ कर आर्यावृत से टकराया तब 'हिंदमहासागर' नाम से जाना जाने वाला समुद्र सिकुड़ कर धुर दक्षिण में चला गया तथा जंबू द्वीप व  आर्यावृत को संयुक्त करने वाले 'विंध्याचल' पर्वत की उत्पत्ति हुई। आर्यावृत से जंबू द्वीप पर आबादी के स्थानांतरण से आर्यजन वहाँ भी आबाद हुये। पाश्चात्य इतिहासकारों ने इनको प्रथक द्रविन घोषित करके पार्थक्य की भावना को पोषित कर रखा है। 
जब अफ्रीका व यूरोप की आबादी को श्रेष्ठ अर्थात आर्य बनाने के उद्देश्य से आर्यों के जत्थे पश्चिम से चले तो उनका पहला पड़ाव था आर्यनगर= एर्यान= ईरान। खोमेनी से पहले तक वहाँ का शासक खुद को आर्य मेहर रज़ा पहलवी कहता था। आगे बढ़ते हुये आर्य मेसोपोटामिया होते हुये जर्मनी पहुंचे थे। लेकिन पाश्चात्य जगत से गुमराह लोग उल्टा कहते हैं कि वहाँ से आर्य भारत पर आक्रमण करके आए थे। 
पूर्व से चले आर्य वर्तमान चीन, साईबेरिया क्षेत्र से होते हुये ब्लाड़ीवासटक और अलास्का को पार करते हुये कनाडा से दक्षिण की ओर बढ़े थे। उनका पहला पड़ाव 'तक्षक' ऋषि के नेतृत्व में जहां पड़ा था वह स्थान आज भी उनके नाम पर अपभ्रंश में 'टेक्सास' कहलाता है जहां  जान एफ केनेडी को गोली मारी गई थी। दूसरा पड़ाव धुर दक्षिण में 'मय' ऋषि के नेतृत्व में जहां पड़ा वह आज भी उनके ही नाम पर मेक्सिको है।  
दक्षिण दिशा में 'पुलत्स्य'ऋषि के नेतृत्व में गए आर्य वर्तमान आस्ट्रेलिया पहुंचे थे जहां का शासक 'सोमाली' एक निर्जन टापू की ओर अपने समर्थकों सहित भाग गया था वह आज भी उसी के नाम पर सोमाली लैंड है। 
भारत से बाहर गए इन आर्यों का ध्येय लोगों को श्रेष्ठ मार्ग सिखाना अर्थात आर्यत्व में ढालना था। किन्तु पुलत्स्य के वंशज 'विश्र्श्वा' ने वर्तमान लंका में एक राज्य की स्थापना कर डाली जो अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ और इसी कारण उनका पुत्र रावण साम्राज्यवादी बन सका अपने अमेरिकी और साईबेरियाई सहयोगियों (एरावन व कुंभकरण ) की सहायता से। इसी साम्राज्यवादी आर्य - रावण को भारत के आर्य - राम ने कूटनीति व युद्ध में परास्त कर साम्राज्यवाद का सर्व प्रथम विनाश किया था। 
दुर्भाग्यपूर्ण है कि विद्वान लेखक महेश राठी जी ने भी पाश्चात्य साम्राज्यवादियों के दुर्भावनापूर्ण शब्द आर्य हमलावर थे को अपना लिया। भारतीय साम्यवाद के जनता के मध्य अलोकप्रिय होने का सबसे बड़ा कारण साम्यवादी विद्वानों द्वारा साम्राज्यवादी इतिहासकारों से भ्रमित होते रहना ही है। काश अब भी साम्यवादी विद्वान 'सत्य ' को स्वीकार करके ' हिन्दू' और 'ब्रहमनवाद' को अभारतीय कहने का साहस दिखा सकें तो सफलता उनके चरण चूम लेगी। साम्यवाद और कुछ नहीं वेदोक्त समष्टिवाद ही है लेकिन सत्य से दूर रहना और उसका वरन करने की बजाए उस पर प्रहार करते रहना ही वह वजह है जिसने जनता के दिलो-दिमाग में साम्यवाद के प्रति नफरत भर रखी है।महेश राठी जी सत्य के शस्त्र से हिंदूवाद और ब्रहमनवाद पर प्रहार करें तो निश्चय ही सफल होंगे , हमारी शुभकामनायें उनके साथ हैं। 
(विजय राजबली माथुर ) 

Monday, 21 March 2011

आर्य भारत के मूल निवासी हैं--- आचार्य डॉ देवव्रत

**फोटो पर डबल क्लिक कर बड़ा करके पढ़ें :

(निष्काम परिवर्तन पत्रिका -अगस्त-२००२)







संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर