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Sunday, 7 February 2016

बेगुनाहों के लिए सड़क पर भी लड़ना होगा- ---- मुहम्मद शुऐब

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आतंकवाद के नाम पर फंसाए गए बेगुनाहों के लिए अदालतों के साथ-
साथ सड़क पर भी लड़ना होगा- मुहम्मद शुऐब
संजरपुर आजमगढ़ में हुआ रिहाई मंच के अध्यक्ष मु0 शुऐब का नागरिक अभिनन्दन
सपा की वादा खिलाफी के खिलाफ रिहाई मंच का प्रदेश व्यापी आंदोलन शुरू

आजमगढ़ 6 फरवरी 2016, आतंकवाद के नाम पर बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को फंसाए जाने का सिलसिला तब तक नहीं रूकेगा जब तक इस सवाल पर व्यापक जनआंदोलन नहीं खड़ा होगा। इन मसलों को सिर्फ अदालती लड़ाई से नहीं जीता जा सकता। इसलिए जरूरी है कि अदालत के साथ-साथ सड़क पर भी अवाम उतरे। यह बातें रिहाई मंच के अध्यक्ष एडवोकेट मुहम्मद शुऐब ने संजरपुर आजमगढ़ में स्थानीय निवासीयों द्वारा उनके नागरिक अभिनन्दन के दौरान कहीं। इस अवसर उन्हें माला पहनाकर मोमेंटो दिया गया और शाॅल ओढ़ाया गया।

बटला हाउस फर्जी मुठभेड़ में मारे गए बेगुनाह नौजवानों के गांव वासियों को सम्बोधित करते हुए मुहम्मद शुऐब ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था कि वह सत्ता में आने के बाद बेगुनाहों पर से मुकदमें हटा लेगी लेकिन चार साल बाद भी सपा ने यह वादा पूरा नहीं किया। उल्टे अहमद हसन जैसे मुस्लिम मंत्रियों से यह अफवाह भी फैला रही है कि प्रदेश में एक भी मुस्लिम बेगुनाह जेल में बंद नहीं है। जो मुसलमानों को चिढ़ाने जैसा है। उन्होंने कहा कि इसी तरह आतंकवाद से बरी हुए मुस्लिम नौजवानों के पुर्नवास और मुआवजे के वादे से भी सरकार मुकर गई है। मुहम्मद शुऐब ने कहा कि रिहाई मंच और वे खुद भी जिन बेगुनाहों को अदालत से बरी कराने में कामयाब रहे हैं उसे वह उन बेगुनाहों पर किया गया एहसान नहीं मानते बल्कि एक इंसाफ पसंद संगठन और संविधान में यकीन रखने के नाते किया जाने वाला अपना फर्ज मानते हैं। लेकिन कुछ सरकार पोषित धार्मिक संगठन इन मुकदमों में मिली जीत का श्रेय लोगों को गुमराह करके लेने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उनके नाम पर वह लोगों से चंदा इकठ्ठा कर सकें। जो एक तरह का धर्म के नाम पर किया जाने वाला भ्रष्टाचार है। उन्होंने कहा कि ऐसे कथित धार्मिक संगठनों का इतिहास हर कदम पर मौजूदा सरकारों के साथ खड़े रहने का रहा है। इसलिए लोगों को न सिर्फ ऐसे संगठनों से सचेत रहने की जरूरत है बल्कि उनसे मुकदमे लड़ने के नाम पर मिलने वाले चंदे का हिसाब भी मांगना चाहिए।

इस अवसर पर खालिद मुजाहिद जिनकी हत्या एटीएस और खुफिया विभाग के इशारे पर कर दिया गया और जिसमें पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह और पूर्व एडीजी कानून व्यवस्था बृजलाल भी हत्यारोपी हैं के चचा जहीर आलम फलाही ने भी सम्बोधिति किया। उन्होंने कहा कि बेगुनाहों की रिहाई के सवाल पर जबतक पूरा समाज एक साथ सरकारों के खिलाफ खड़ा नहीं होगा आतंकी घटनाएं भी नहीं रूकेंगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह एडवोकेट मुहम्मद शुऐब ने हमलों को झेलते हुए भी इन मुकदमों को लड़ा और बेगुनाहों को छुड़ा रहे हैं वह एक मिसाल है।

वहीं रिहाई मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने कहा कि रिहाई मंच सपा सरकार की वादा खिलाफी के खिलाफ प्रदेश व्यापी आंदोलन के पहले चरण के तहत आज आजमगढ़ में लोगों के बीच आया है। ताकि लोगों को सपा सरकार की वादा खिलाफी से अवगत कराकर लोगों से ऐसी सरकार को हमेशा के लिए बिदा कर देने का आह्वान कर सके। रिहाई मंच नेता शकील कुरैशी ने कहा कि रिहाई मंच इंसाफ पसंद अवाम के बीच जाकर आतंकवाद के नाम पर फंसाए जाने वाले बेगुनाहों के पक्ष में खड़े होने का आह्वान कर रहा है। क्योंकि सपा और भाजपा गुप्त गठबंधन के तहत प्रदेश से आईएस के नाम पर बेगुनाहों को फंसा रही हैं ताकि साम्प्रदायिक आधार पर समाज का विभाजन किया जा सके।
इंसाफ अभियान के महासचिव और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रनेता दिनेश चैधरी ने कहा कि आज दलितों और मुसलमानों पर सबसे ज्यादा हमले हो रहे हैं लिहाजा इन समाजों को आज एकजुट होकर चुनौतियों का सामना करना होगा। रिहाई मंच और इंसाफ अभियान इसी अभियान के तहत आज आजमगढ़ आया है।

इस मौके पर तारिक कासमी की फर्जी गिरफतारी के खिलाफ चले आंदोलन के नायक रहे तारिक शमीम ने कहा कि इस देश में आतंकवादी घटनाएं खुफिया एजेंसियों द्वारा भारत के मुसलमानों के खिलाफ छेड़ा गया अघोषित युद्ध है। बेगुनाहों की रिहाई साबित कर रही है कि इस युद्ध के वास्तविक अपराधियों को एजेंसियां बचा रही हैं। बम विस्फोटों में निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हैं परंतु असली मुजरिमों को आजतक कानून के कटघरे में खड़ा नहीं किया गया और खाना पूर्ती के लिए बेगुनाहों को जेल भेज दिया गया जो इस देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए खतरनाक है।

इस मौके पर अध्यक्षता करते हुए हरिमंदिर पांडेय ने कहा कि आतंकवाद के नाम पर बेगुनाह मुसलमानों को फंसाने के पीछे समाज को साम्प्रदायिक आधार पर बांटना है। जिससे कि जनता के वास्तविक सवाल राजनीति से गायब हो जाए। नागरिक अभिनन्दन और सम्मान समारोह का संचालन रिहाई मंच के आजमगढ़ प्रभारी मसीहुद्दीन संजरी ने की।

इस अवसर पर सालिम दाउदी, मोहम्मद आसिम, गुलाम अम्बिया, शादाब उर्फ मिस्टर भाई, सुनील कुमार, अब्दुल्लाह एडवोकेट, हाजी बदरूद्दीन, फहीम, शाकिर, आमिर, तारिक शफीक, मौलवी असलम, जितेंद्र हरि पांडेय, असलम खान, अबू शाद संजरी, शाहिद इकबाल समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे।

मसीहुद्दीन संजरी
मो0- 9455571488
संजरपुर आजमगढ़

Sunday, 17 January 2016

देशद्रोह के आरोप से दोषमुक्त ------मुहम्मद शुऐब व राजीव यादव

**सिर्फ मुसलमान होने के नाते हमें आतंकी बताकर फंसा दिया गया- अजीजुर्रहमान
छोड़ने के वादे से मुकरने वाली सरकार से मुआवजे की कोई उम्मीद नहीं- शेख मुख्तार
देश के खिलाफ नारे लगाने के झूठे आरोप ने मुझे सबसे ज्यादा झटका दिया- अली अकबर
मेरे बेटे की बुरी मानसिक हालत के लिए पुलिस और सरकार गुनहगार- अल्ताफ हुसैन, अली अकबर के पिता
सपा ने चुनावी वादा पूरा किया होता तो पहले ही छूट गए होते बेगुनाह- मु0 शुऐब
देशद्रोह का फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले पुलिस व खुफिया अधिकारियों के खिलाफ हो कारवाई
रिहाई मंच ने बेगुनाहों के लिए जमानतदार के बतौर खड़े होने की अवाम से की अपील
साढ़े 8 साल जेल में रहने के बाद बरी हुए अजीर्जुरहमान, मो0 अली अकबर, शेख मुख्तार हुसैन ने बयान किया अपना दर्द
....................**रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने ....................पुर्नवास व मुआवजा न देना साबित करता है कि अखिलेश यादव हिन्दुत्वादी चश्मे से बेगुनाहों को आतंकवादी ही समझते हैं। उन्होंने पूछा कि सरकार को बताना चाहिए कि इन बेगुनाहों के पास से पुसिल ने जो  आरडीएक्स, डिटोनेटर और हैंडग्रेनेड बरामद दिखाया उसे वह कहां से मिला। किसी आतंकी संगठन ने उन्हंे ये विस्फोटक दिया या फिर पुलिस खुद इनका जखीरा अपने पास रखती है ताकि बेगुनाहों कों फंसाया जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसी बरामदगी दिखाने वाले पुलिस अधिकारियों का समाज में खुला घूमना देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कुछ मीडिया संस्थानों ने इनके छूटने पर यह खबर छापी की ये सभी पाकिस्तानी है असल में यह वही जेहनियत है जिसके चलते पुलिस ने देश के खिलाफ नारा लगाने का झूठा एफआईआर करवाया। 


लखनऊ 16 जनवरी 2016। 8 साल 7 महीने लखनऊ जेल में रहने के बाद देशद्रोह के आरोप से दोषमुक्त हो चुके अजीर्जुरहमान, मो0 अली अकबर, शेख मुख्तार हुसैन, उनके परिजनों, रिहाई मंच के अध्यक्ष अधिवक्ता मुहम्मद शुऐब व राजीव यादव ने आज यूपी प्रेस क्लब लखनऊ में प्रेस वार्ता की। 

24 परगना के बशीर हाट के रहने वाले 31 वर्षीय अजीर्जुरहमान ने बताया कि उसे 11 जून 2007 को सीआईडी वालों ने चोरी के इल्जाम में उठाया था। 16 जून को कोर्ट में पेश करने के बाद 22 जून को दोबारा कोर्ट में पेश कर 26 तक हिरासत में लिया। जबकि यूपी एसटीएफ ने मेरे ऊपर इल्जाम लगाया था कि मैं 22 जून को लखनऊ अपने साथियों के साथ आया था। आप ही बताएं की यह कैसे हो सकता है कि जब मैं 22 जून को कोलकाता पुलिस की हिरासत में था तो यहां कैसे उसी दिन कोई आतंकी घटना अंजाम देने के लिए आ सकता हूं। 12 दिन की कस्टडी में यूपी एसटीएफ ने रिमांड में 5 लोगों के साथ लिया और बराबर नौशाद और जलालुद्दीन के साथ टार्चर किया जा रहा था जिसे देख हम दहशत में आ गए थे कि हमारी बारी आने पर हमारे साथ भी ऐसा ही किया जाएगा। टार्चर कुछ इस तरह था कि बिजली का झटका लगाना, उल्टे लटका कर नाक से पानी पिलाना, टांगे दोनों तरफ फैलाकर खड़ाकर डंडा से पीटना, नंगा कर पेट्रोल डालना, पेशाब पिलाना इन जैसे तमाम जिसके बारे में आदमी सोच भी नहीं सकता, हमारे साथ किया जाता था। 6 दिन तक लगातार एक भी मिनट सोने नहीं दिया। हमारा रिमांड खत्म होने के एक दिन पहले लखनऊ से बाहर जहां ईट भट्टा और एक कोठरी नुमा खाली कमरा पड़ा था, वहां ले जाकर गाड़ी रोका और मीडिया के आने का इंतजार किया। यहां लाने से पहले एसटीएफ वालों ने हमसे कहा था कि मीडिया के सामने कुछ मत बोलना। इस बीच धीरेन्द्र नाम के एक पुलिस कर्मी ने सीमेंट की बोरी और फावड़ा लिया और कोठरी के अंदर गया फिर कोठरी के अंदर गड्डा खोदा, बोरी के अंदर से जो भी सामान ले गए थे गड्डे के अंदर टोकरी में रख दिया। फिर जब सारे मीडिया वाले आ चुके तो हमको गाड़ी से निकालकर उस गड्डे के पास से एक चक्कर घुमाया जिसका फोटो मीडिया खींचती रही। एसटीएफ वालों ने मीडिया को बताया कि ये आतंकी हैं जो कि यहां दो किलो आरडीएक्स, दस डिटोनेटर और दस हैंड ग्रेनेड छुपाकर भाग गए थे। इनकी निशानदेही पर यह बरामद किया गया है। मीडिया वाले बात करना चाह रहे थे पर एसटीएफ ने तुरंत हमें ढकेलकर गाड़ी में डाल दिया। 

अजीजुर्रहमान ने बताया कि हम लोगों को जब यूपी लाया गया उस समय उसमें एक लड़का बांग्लादेशी भी था। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि वह हिन्दू है और उसका नाम शिमूल है। उसके बाद दो कांस्टेबलों ने उसके कपड़े उतरवाकर देखा कि उसका खतना हुआ है कि नहीं। जब निश्चिंत हो गए की खतना नहीं हुआ है तो पुलिस वालों ने उससे कहा कि यह बात कोलकाता में क्यों नहीं बताया। उसके बाद दो कांस्टेबल उसे फिर से कोलकाता छोड़ आए। सिर्फ मुसलमान होने के नाते हमें आतंकी बताकर फंसा दिया गया। 

मिदनापुर निवासी शेख मुख्तार हुसैन जो कि मटियाबुर्ज में सिलाई का काम करते थे ने बताया कि उसने एक पुराना मोबाइल खरीदा था। उस समय उसकी बहन की शादी थी। उसी दौरान एक फोन आया कि उसकी लाटरी लग गयी है और लाटरी के पैसों के लिए उसे कोलकाता आना होगा। इस पर उसने कहा कि अभी घर में शादी की व्यस्तता है अभी नहीं आ पाउंगा। उसी दौरान उसे साइकिल खरीदने के लिए नंद कुमार मार्केट जाना था तो उसी दौरान फिर से उन लाटरी की बात करने वालों का फोन आया और उन लोगों ने कहा कि वे वहीं आ जाएंगे। फिर वहीं से उसे खुफिया विभाग वालों ने पकड़ लिया। जीवन के साढे़ आठ साल बर्बाद हो गए। उनका परिवार बिखर चुका है। उन्होंने अपने बच्चों के लिए जो सपने बुने थे उसमें देश की सांप्रदायिक सरकारों, आईबी और पुलिस ने आग लगा दी। उनके बच्चे पढ़ाई छोड़कर सिलाई का काम करने को मजबूर हो गए, उनकी बेटी की उम्र शादी की हो गई है। लेकिन साढे आठ साल जेल में रहने के कारण अब वे पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। अब उनके सामने आगे का रास्ता भी बंद हो गया है। क्योंकि फिर से जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए जो पैसा रुपया चहिए वह कहा से आएगा। सरकार पकड़ते समय तो हमें आतंकवादी बताती है पर हमारे बेगुनाह होने के बाद न तो हमें फंसाने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है और न ही मुआवजा मिलता है। पत्रकारों द्वारा सवाल पूछने पर कि मुआवजा की लड़ाई लड़ेगे पर शेख मुख्तार ने कहा कि छोड़ने के वादे से मुकरने वाली सरकार से मुआवजे की कोई उम्मीद नहीं। 

24 परगना बनगांव के रहने वाले अली अकबर हुसैन ने कहा कि देश के खिलाफ नारे लगाने के झूठे आरोप ने उसे सबसे ज्यादा झटका दिया। जिस देश में हम रहते हैं उसके खिलाफ हम कैसे नारा लगाने की सोच सकते हैं। आज जब यह आरोप बेबुनियाद साबित हो चुके हैं तो सवाल उठता है कि हम पर देश के खिलाफ नारा लगाने का झूठा आरोप क्यों मढ़ा गया। उन्होंने कहा कि हमारे वकील मु0 शुऐब जो कि हमारा मुकदमा लड़ने (12 अगस्त 2008) कोर्ट में गए थे को मारा पीटा गया और हम सभी पर झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया गया कि हम देश के खिलाफ नारे लगा रहे थे। 

जेल की पीड़ा और अपने ऊपर लगे आरोपों से अपना मानसिक असंतुलन का शिकार हो चुके अली अकबर के पिता अल्ताफ हुसैन ने कहा कि मेरे बेटे की हालत की जिम्मेदार पुलिस और सरकार है। एयर फोर्स के रिटायर्ड अल्ताफ ने कहा कि जिस तरह से झूठे मुकदमें में उनके लड़के और अन्य बेगुनाहों को फंसाया गया ऐसे में एडवोकेट मुहम्मद शुऐब की मजबूत लड़ाई से ही इनकी रिहाई हो सकी। उन्होंने कहा कि हमारे बेटों के खातिर मार खाकरद भी जिस तरीके से शुऐब साहब ने लड़ा उससे इस लड़ाई को मजबूती मिली। पत्रकार वार्ता में रिहा हो चुके लोगों के परिजन अब्दुल खालिद मंडल, अन्सार शेख भी मौजूद रहे। 

पत्रकार वार्ता के दौरान जेल में कैद आतंकवाद के अन्य आरोपियों के बारे में सवाल पूछने पर अजीजजुर्रहमान ने बताया कि उनके साथ ही जेल में बंद नूर इस्लाम की आंख की रौशनी कम होती जा रही है। लेकिन मांग करने के बावजूद जेल प्रशासन उनका इलाज नहीं करा रहा है। शेख मुख्तार से यह पूछने पर कि अब आगे जिंदगी कैसे बढ़ेगी, उन्होंने कहा कि बरी होने के बाद भी हमें जमानत लेनी है और अभी तक हमारे पास जमानतदार भी नहीं है। हम एडवोकेट मोहम्मद शुऐब के उपर ही निर्भर हैं। इस सिलसिले में मोहम्मद शुऐब से पूछने पर कि जमानत कैसे होगी ये कहते हुए वो रो पड़े कि आतंकवाद के आरोपियों के बारे में फैले डर की वजह से मुश्किल होती है और लोग इन बेगुनाहों के जमानतदार के बतौर खड़े हों। इसीलिए मैंने इसकी शुरूआत अपने घर से की मेरी पत्नी और साले जमानतदार के बतौर खड़े हुए हैं। इन भावनाओं से प्रभावित होते हुए पत्रकार वार्ता में मौजूद आदियोग और धर्मेन्द्र कुमार ने जमानतदार के बतौर खड़े होने की बात कही। मु0 शुऐब ने समाज से अपील की कि लोग ऐसे बेगुनाहों के लिए खड़े हों। इस मामले में अभी और जमानतदारों की जरूरत है अगर कोई इनके लिए जमानतदार के बतौर खड़ा होगा तो ये जल्दी अपने घर पहंुच जाएंगे। 

रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि सपा सरकार ने अगर आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को छोड़ने का अपना चुनावी वादा पूरा किया होता तो यही नहीं इन जैसे दर्जनों बेगुनाह पहले ही छूट गए होते। उन्होंने कहा कि सपा ने चुनाव में मुसलमानों का वोट लेने के लिए उनसे झूठे वादे किए। जिसमें से एक वादा छूटे बेगुनाहों के पुर्नवास और मुआवजे का भी था। लेकिन किसी भी बेगुनाह को सरकार ने उनकी जिन्दगी बर्बाद करने के बाद आज तक कोई मुआवजा या पुर्नवास नहीं किया है। पुर्नवास व मुआवजा न देना साबित करता है कि अखिलेश यादव हिन्दुत्वादी चश्मे से बेगुनाहों को आतंकवादी ही समझते हैं। उन्होंने पूछा कि सरकार को बताना चाहिए कि इन बेगुनाहों के पास से पुसिल ने जो  आरडीएक्स, डिटोनेटर और हैंडग्रेनेड बरामद दिखाया उसे वह कहां से मिला। किसी आतंकी संगठन ने उन्हंे ये विस्फोटक दिया या फिर पुलिस खुद इनका जखीरा अपने पास रखती है ताकि बेगुनाहों कों फंसाया जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसी बरामदगी दिखाने वाले पुलिस अधिकारियों का समाज में खुला घूमना देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कुछ मीडिया संस्थानों ने इनके छूटने पर यह खबर छापी की ये सभी पाकिस्तानी है असल में यह वही जेहनियत है जिसके चलते पुलिस ने देश के खिलाफ नारा लगाने का झूठा एफआईआर करवाया। आज असलियत आपके सामने है कि यह अपनी बात कहते-कहते भूल जा रहे हैं। मानसिक रुप से असुंतलित हो गए हैं। ऐसे में देशद्रोह और आतंकी होने का फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले असली देशद्रोही हैं उनपर मुकदमा होना चाहिए। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या उसमें यह हिम्मत है?  

रिहाई मंच नेता राजीव यादव ने बताया कि आफताब आलम अंसारी, कलीम अख्तर, अब्दुल मोबीन, नासिर हुसैन, याकूब, नौशाद, मुमताज, अजीजुर्रहमान, अली अकबर, शेख मुख्तार, जावेद, वासिफ हैदर वो नाम हैं जिन पर आतंकवादी का ठप्पा लगाकर उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी गई। जिनके बरी होने के बावजूद सरकारों ने उनके प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं दिखाई। तो वहीं ऐसे कई नौजवान यूपी की जेलों में बंद हैं जो कई मुकदमों में बरी हो चुके है जिनमें तारिक कासमी, गुलजार वानी, मुहम्मद अख्तर वानी, सज्जादुर्रहमान, इकबाल, नूर इस्लाम है। उन्होंने कहा कि सरकार बेगुनाहों की रिहाई से सबक सीखते हुए इन आरोपों में बंद बेगुनाहों को तत्काल रिहा करे और सांप्रदायिक पुलिस कर्मियों के खिलाफ कारवाई करे। उन्होंने कहा कि जब इन बेगुनाहों को फंसाया गया तब बृजलाल एडीजी कानून व्यवस्था और बिक्रम सिंह डीजीपी थे और उन्होनें ही मुसलमानों को फंसाने की पूरी साजिश रची। जिनकी पूरी भूमिका की जांच के लिए सकरार को जांच आयोग गठित करना चाहिए ताकि आतंकवाद के नाम पर फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों को सजा दी जा सके। मंच ने यूएपीए को बेगुनाहों को फंसाने का पुलिसिया हथियार बताते हुए इसे खत्म करने की मांग की है। 

द्वारा जारी- 
शाहनवाज आलम
(प्रवक्ता, रिहाई मंच) 
09415254919