Saturday, 18 November 2017

कुँवर नारायण को लखनऊ किन हालात में छोडना पड़ा ? ------ नवीन जोशी

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संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Friday, 17 November 2017

नर्मदा यात्रा, साफ्ट हिन्दुत्व : कांग्रेस - भाजपा कारपोरेट हित और जनता ------ विजय राजबली माथुर

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दिग्विजय सिंह जी की नर्मदा यात्रा हो अथवा राहुल गांधी की गुजरात के मंदिरों का दर्शन  अंततः भाजपा को ही लाभ पहुंचा सकते हैं क्योंकि , जिस प्रकार किसी वनस्पति का बीज जब बोया जाता है तब अंकुरित होने के बाद वह धीरे-धीरे बढ़ता है तथा पुष्पवित,पल्लवित होते हुये फल भी प्रदान करता है। उसी प्रकार जितने और जो कर्म किए जाते हैं वे भी समयानुसार सुकर्म,दुष्कर्म व अकर्म भेद के अनुसार अपना फल प्रदान करते हैं। यह चाहे व्यक्तिगत,पारिवारिक,सामाजिक,राजनीतिक क्षेत्र में हों अथवा व्यवसायिक क्षेत्रों में। पालक,गन्ना और गेंहू एक साथ बोने पर भी भिन्न-भिन्न समय में फलित होते हैं। उसी प्रकार विभिन्न कर्म एक साथ सम्पन्न होने पर भी भिन्न-भिन्न समय में अपना फल देते हैं। 16 वीं लोकसभा चुनावों में भाजपा की सफलता का श्रेय RSS को है जिसको राजनीति में मजबूती देने का श्रेय इंदिरा जी व राजीव जी को जाता है। 

1967,1975 ,1980,1989 में लिए गए इन्दिरा जी व राजीव जी के निर्णयों ने 2014 में भाजपा को पूर्ण बहुमत तक पहुंचाने में RSS की भरपूर मदद की है। प्रियंका गांधी वाडरा,राहुल गांधी अथवा दिग्विजय सिंह या जो भी भाजपा विरोधी लोग राजनीति में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं उनको खूब सोच-समझ कर ही निर्णय आज लेने होंगे जिनके परिणाम आगामी समय में ही मिलेंगे। 'धैर्य',संयम,साहस के बगैर लिए गए निर्णय प्रतिकूल फल भी दिलवा सकते हैं।  

 27 मई 1964 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का निधन हुआ था। कार्यवाहक प्रधानमंत्री गुलज़ारी लाल नन्दा को यदि कांग्रेस अपना नेता चुन कर स्थाई प्रधानमंत्री बना देती तो कांग्रेस की स्थिति सुदृढ़ रहती किन्तु इन्दिरा जी पी एम नहीं बन पातीं। इसलिए समाजवाद के घोर विरोधी लाल बहादुर शास्त्री जी को पी एम पद से नवाजा गया था जिंनका 10/11 जनवरी 1966 को ताशकंद में निधन हो गया फिर कार्यावाहक पी एम तो नंदा जी ही बने किन्तु उनकी चारित्रिक दृढ़ता एवं ईमानदारी के चलते  उनको कांग्रेस संसदीय दल का नेता न बना कर इंदिराजी को पी एम बनाया गया। 1967 के चुनावों में उत्तर भारत के अनेक राज्यों में कांग्रेस की सरकारें न बन सकीं। केंद्र में मोरारजी देसाई से समझौता करके इंदिराजी पुनः पी एम बन गईं। अनेक राज्यों की गैर-कांग्रेसी सरकारों में 'जनसंघ' की साझेदारी थी। उत्तर प्रदेश में प्रभु नारायण सिंह व राम स्वरूप वर्मा (संसोपा) ,रुस्तम सैटिन व झारखण्डे राय(कम्युनिस्ट ),प्रताप सिंह (प्रसोपा),पांडे  जी आदि (जनसंघ) सभी तो एक साथ मंत्री थे। बिहार में ठाकुर प्रसाद(जनसंघ ),कर्पूरी ठाकुर व रामानन्द तिवारी (संसोपा ) एक साथ मंत्री थे। मध्य प्रदेश में भी यही स्थिति थी। इन्दिरा जी की नीतियों से कांग्रेस को जो झटका लगा था उसका वास्तविक लाभ जनसंघ को हुआ था। जनसंघी मंत्रियों ने प्रत्येक राज्य में संघियों को सरकारी सेवा में लगवा दिया था जबकि सोशलिस्टों व कम्युनिस्टों ने ऐसा नहीं किया कि अपने कैडर को सरकारी सेवा में लगा देते। 

1974 में जब जय प्रकाश नारायण गुजरात के छात्र आंदोलन के माध्यम से पुनः राजनीति में आए तब संघ के नानाजी देशमुख आदि उनके साथ-साथ उसमें शामिल हो गए।

1977 में मोरारजी देसाई की जनता पार्टी की केंद्र सरकार में आडवाणी व बाजपेयी साहब जनसंघ  कोटे से  तो राजनारायन संसोपा कोटे से मंत्री थे। बलराज माधोक तो मोरारजी देसाई को 'आधुनिक श्यामा प्रसाद मुखर्जी' कहते थे। जनसंघी मंत्रियों ने सूचना व प्रसारण तथा विदेश विभाग में खूब संघी प्रविष्ट करा दिये थे।  

1977 में उत्तर प्रदेश में राम नरेश यादव (पूर्व  राज्यपाल-मध्य प्रदेश) की जनता पार्टी सरकार में कल्याण सिंह(जनसंघ),मुलायम सिंह(संसोपा ) आदि सभी एक साथ मंत्री थे। पूर्व जनसंघ गुट के मंत्रियों ने संघियों को सरकारी सेवाओं में खूब एडजस्ट किया था। 
 1975 में संघ प्रमुख मधुकर दत्तात्रेय 'देवरस' ने जेल से बाहर आने हेतु इंदिराजी से एक गुप्त समझौता किया कि भविष्य में संकट में फँसने पर वह इंदिराजी की सहायता करेंगे। और उन्होने अपना वचन निभाया 1980 में संघ का पूर्ण समर्थन इन्दिरा कांग्रेस को देकर जिससे इंदिराजी पुनः पी एम बन सकीं।परंतु इसी से प्रतिगामी नीतियों पर चलने की शुरुआत भी हो गई 'श्रम न्यायालयों' में श्रमिकों के विरुद्ध व शोषक व्यापारियों /उद्योगपतियों के पक्ष में निर्णय घोषित करने की होड लग गई।इंदिराजी की हत्या के बाद 1984 में बने पी एम राजीव गांधी साहब भी अपनी माता जी की ही राह पर चलते हुये कुछ और कदम आगे बढ़ गए । अरुण नेहरू व अरुण सिंह की सलाह पर राजीव जी ने केंद्र सरकार को एक 'कारपोरेट संस्थान' की भांति चलाना शुरू कर दिया था।आज 2014 में  बनी नई भाजपा  सरकार कारपोरेट के हित में जाती दिख रही है तो यह उसी नीति का ही विस्तार है। 

 1989 में उन्होने सरदार पटेल द्वारा लगवाए विवादित बाबरी मस्जिद/राम मंदिर का ताला खुलवा दिया। बाद में वी पी सिंह की सरकार को बाहर से समर्थन देने के एवज में भाजपा ने स्वराज कौशल (सुषमा स्वराज जी के पति) जैसे लोगों को राज्यपाल जैसे पदों तक नियुक्त करवा लिया था। सरकारी सेवाओं में संघियों की अच्छी ख़ासी घुसपैठ करवा ली थी। 

आगरा पूर्वी विधान सभा क्षेत्र मे 1985 के परिणामों मे संघ से संबन्धित क्लर्क कालरा ने किस प्रकार भाजपा प्रत्याशी को जिताया  वह कमाल पराजित घोषित कांग्रेस प्रत्याशी सतीश चंद्र गुप्ता जी के  अलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती देने से उजागर हुआ। क्लर्क कालरा ने नीचे व ऊपर कमल निशान के पर्चे रख कर बीच में हाथ का पंजा वाले पर्चे छिपा कर गिनती की थी जो जजों की निगरानी में हुई पुनः गणना में पकड़ी गई। भाजपा के सत्य प्रकाश'विकल' का चुनाव अवैध  घोषित करके सतीश चंद्र जी को निर्वाचित घोषित किया गया। 
ऐसे सरकारी संघियों के बल पर 1991 में उत्तर-प्रदेश आदि कई राज्यों में भाजपा की बहुमत सरकारें बन गई थीं।1992 में कल्याण सिंह के नेतृत्व की सरकार ने बाबरी मस्जिद ध्वंस करा दी और देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए। 1998 से 2004 के बीच रही बाजपेयी साहब की सरकार में पुलिस व सेना में भी संघी विचार धारा के लोगों को प्रवेश दिया गया। 

2011 में सोनिया जी के विदेश में इलाज कराने जाने के वक्त से डॉ मनमोहन सिंह जी हज़ारे/केजरीवाल के माध्यम से संघ से संबंध स्थापित किए हुये थे जिसके परिणाम स्वरूप 2014 के चुनावों में सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों ने भी परिणाम प्रभावित करने में अपनी भूमिका अदा की है



Thursday, 16 November 2017

पर्यावरण और किसान की बरबादी मशीनीकरण के कारण ------ बृजेश शुक्ल

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संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

बुद्ध - तुल्य : कुँवर नारायण ------ पंकज चतुर्वेदी

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संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Sunday, 12 November 2017

अभिव्यक्ति के खतरे उठाए जाएँ ------ वीरेंद्र यादव

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NBT, Lko., 12-11-2017, Page --- 4


पुनश्च : 

    संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

हवा में बढ़ते जहर का समाधान : ' हवन ' ------ विजय राजबली माथुर

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भोपाल गैस कांड के बाद यूनियन कारबाईड ने खोज करवाई थी कि तीन परिवार सकुशल कैसे बचे ? निष्कर्ष मे ज्ञात हुआ कि वे परिवार घर के भीतर हवन कर रहे थे और दरवाजों व खिड़कियों पर कंबल पानी मे भिगो कर डाले हुये थे। ट्रायल के लिए गुजरात मे अमेरिकी वैज्ञानिकों ने 'प्लेग ' के कीटाणु छोड़ दिये। इसका प्रतिकार करने हेतु राजीव गांधी सरकार ने हवन के पैकेट बँटवाए थे और 'हवन ' के माध्यम से उस प्लेग से छुटकारा मिला था।अमेरिकी मनोवैज्ञानिक मिसेज पेट्रिसिया हेमिल्टन ने भोपाल के उप नगर (15 किलो मीटर दूर ) बेरागढ़ के समीप माधव आश्रम मे स्वीकार किया था कि'होम -चिकित्सा'अमेरिका,चिली और पोलैंड मे प्रासंगिक हो रही है। राजधानी वाशिंगटन (डी सी ) मे "अग्निहोत्र विश्वविद्यालय"की स्थापना हो चुकी है । बाल्टीमोर मे तो 04 सितंबर 1978 से ही लगातार 'अखंड हवन ' चल रहा है और जो ओजोन का छिद्र अमेरिका के ऊपर था वह खिसक कर दक्षिण-पूर्व एशिया की तरफ आ गया है। लेकिन भारत के लोग ओशो, मुरारी और आशाराम बापू ,रामदेव ,अन्ना हज़ारे ,गायत्री परिवार जैसे ढोंगियों के दीवाने बन कर अपना अनिष्ट कर रहे हैं । परिणाम क्या है एक विद्वान ने यह बताया है-

परम पिता से प्यार नहीं ,शुद्ध रहे व्यवहार नहीं। 
इसी लिए तो आज देख लो ,सुखी कोई परिवार नहीं। । परम ... । । 

फल और फूल अन्य इत्यादि,समय समय पर देता है। 
लेकिन है अफसोस यही ,बदले मे कुछ नहीं लेता है। । 
करता है इंकार नहीं,भेद -भाव तकरार नहीं। 
ऐसे दानी का ओ बंदे,करो जरा विचार नहीं। । परम ....। । 1 । ।

मानव चोले मे ना जाने कितने यंत्र लगाए हैं। 
कीमत कोई माप सका नहीं,ऐसे अमूल्य बनाए हैं। । 
कोई चीज बेकार नहीं,पा सकता कोई पार नहीं । 
ऐसे कारीगर का बंदे ,माने तू उपकार नहीं। । परम ... । । 2 । । 

जल,वायु और अग्नि का,वो लेता नहीं सहारा है। 
सर्दी,गर्मी,वर्षा का अति सुंदर चक्र चलाया है। । 
लगा कहीं दरबार नहीं ,कोई सिपाह -सलारनहीं। 
कर्मों का फल दे सभी को ,रिश्वत की सरकार नहीं। । परम ... । । 3 । । 

सूर्य,चाँद-सितारों का,जानें कहाँ बिजली घर बना हुआ। 
पल भर को नहीं धोखा देता,कहाँ कनेकशन लगा हुआ। । 
खंभा और कोई तार नहीं,खड़ी कोई दीवार नहीं। 
ऐसे शिल्पकार का करता,जो 'नरदेव'विचार नहीं। । परम .... । । 4 । । 

"सीता-राम,सीता-राम कहिए ---जाहि विधि रहे राम ताही विधि रहिए।"-यह निष्कर्ष 35 वर्ष आर एस एस मे रह कर और उससे दुखी होकर अलग होने वाले सोरो निवासी आचार्य राम किशोर जी(पूर्व प्राचार्य ,संस्कृत महाविद्यालय,हापुड़)का है। 


आलसी और अकर्मण्य लोग राम को दोष दे कर बच निकलना चाहते हैं। राम ने जो त्याग किया और कष्ट देश तथा देशवासियों के लिए खुद व पत्नी सीता सहित सहा उसका अनुसरण करने -पालन करने की जरूरत है । राम के नाम पर आज फिर से देश को तोड़ने और बांटने की साजिशे हो रही हैं जबकि राम ने पूरे 'आर्यावृत ' और 'जंबू द्वीप 'को एकता के सूत्र मे आबद्ध किया था और रावण के 'साम्राज्य' का विध्वंस किया था । राम के नाम पर क़त्लो गारत करने वाले राम के पुजारी नहीं राम के दुश्मन हैं जो साम्राज्यवादियो के मंसूबे पूरे करने मे लगे हुये हैं । जिन वेदिक नियमों का राम ने आजीवन पालन किया आज भी उन्हीं को अपनाए जाने की नितांत आवश्यकता है।

          यज्ञ  माहात्म्य

लिखा वेदों मे विधान ,अद्भुत है महिमा हवन की।
जो वस्तु अग्नि मे जलाई,हल्की होकर वो ऊपर उड़ाई।
करे वायु से मिलान,जाती है रस्ता गगन की।
लिखा वेदों मे विधान ,अद्भुत है महिमा हवन की। । 1 । ।

फिर आकाश मण्डल मे भाई,पानी की होत सफाई।
वृष्टि होय अमृत समान,वृद्धि होय अन्न और धन की।
लिखा वेदों मे विधान,अद्भुत है महिमा हवन की। । 2 । ।

जब अन्न की वृद्धि होती है,सब प्रजा सुखी होती है।
न रहता दु : ख का निशान ,आ जाती है लहर अमन की।
लिखा वेदों मे विधान ,अद्भुत है महिमा हवन की। । 3 । ।

जब से यह कर्म छुटा है,भारत का भाग्य लुटा है।
'सुशर्मा'करते बयान सहते हैं मार दु :खन की।
लिखा वेदों मे विधान ,अद्भुत है महिमा हवन की। । 4 । ।

जनाब 'हवन' एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। कैसे? Material  Science (पदार्थ विज्ञान ) के अनुसार अग्नि मे जो भी चीजें डाली जाती हैं उन्हे अग्नि परमाणुओ (Atoms) मे विभक्त कर देती है और वायु उन परमाणुओ को बोले गए मंत्रों की शक्ति से संबन्धित ग्रह अथवा देवता तक पहुंचा देती है।

देवता=जो देता है और लेता नहीं है जैसे-अग्नि,वायु,आकाश,समुद्र,नदी,वृक्ष,पृथ्वी,ग्रह-नक्षत्र आदि।(पत्थर के टुकड़ों तथा कागज पर उत्कीर्ण चित्र वाले नहीं )। 

मंत्र शक्ति=सस्वर मंत्र पाठ करने पर जो तरंगें (Vibrations) उठती हैं वे मंत्र के अनुसार संबन्धित देवता तक डाले गए पदार्थों के परमाणुओ को पहुंचा देती हैं।

अतः हवन और मात्र हवन (यज्ञ ) ही वह पूजा या उपासना पद्धति है जो कि पूर्ण रूप से वैज्ञानिक सत्य पर आधारित है। बाकी सभी पुरोहितों द्वारा गढ़ी गई उपासना पद्धतियेँ मात्र छ्ल हैं-ढोंग व पाखंड के सिवा कुछ भी नहीं हैं। चाहे उनकी वकालत प्रो . जैन अर्थात 'ओशो-रजनीश' करें या आशा राम बापू,मुरारी बापू,अन्ना/रामदेव,बाल योगेश्वर,आनंद मूर्ती,रवी शंकर जैसे ढ़ोंगी साधू-सन्यासी। 'राम' और 'कृष्ण' की पूजा करने वाले राम और कृष्ण के शत्रु हैं क्योंकि वे उनके बताए मार्ग का पालन न करके ढ़ोंगी-स्वांग रच रहे हैं। राम को तो विश्वमित्र जी 'हवन'-'यज्ञ 'की रक्षा हेतु बाल -काल मे ही ले गए थे। कृष्ण भी महाभारत के युद्ध काल मे भी हवन करना बिलकुल नहीं भूले। जो लोग उनके द्वारा प्रदर्शित मार्ग 'हवन 'करना छोड़ कर उन्हीं की पूजा कर डालते हैं वे जान बूझ कर उनके कर्मों का उपहास उड़ाते हैं। राम और कृष्ण को 'भगवान' या भगवान का अवतार बताने वाले इस वैज्ञानिक 'सत्य ' को स्वीकार नहीं करते कि 'भगवान' न कभी जन्म लेता है न उसकी मृत्यु होती है। अर्थात भगवान कभी भी 'नस' और 'नाड़ी' के बंधन मे नहीं बंधता है क्योंकि,-

भ=भूमि अर्थात पृथ्वी।
ग=गगन अर्थात आकाश।
व=वायु।
I=अनल अर्थात अग्नि (ऊर्जा )।
न=नीर अर्थात जल।

प्रकृति के ये पाँच तत्व ही 'भगवान' हैं और चूंकि इन्हें किसी ने बनाया नहीं है ये खुद ही बने हैं इसी लिए ये 'खुदा' हैं। ये पांचों तत्व ही प्राणियों और वनस्पतियों तथा दूसरे पदार्थों की 'उत्पत्ति'(GENERATE),'स्थिति'(OPERATE),'संहार'(DESTROY) के लिए उत्तरदाई हैं इसलिए ये ही GOD हैं। पुरोहितों ने अपनी-अपनी दुकान चमकाने के लिए इन को तीन अलग-अलग नाम से गढ़ लिया है और जनता को उल्टे उस्तरे से मूढ़ रहे हैं। इनकी पूजा का एकमात्र उपाय 'हवन ' अर्थात 'यज्ञ ' ही है और कुछ भी कोरा पाखंड एवं ढोंग।

                                         यज्ञ महिमा

होता है सारे विश्व का कल्याण यज्ञ से।
जल्दी प्रसन्न होते हैं भगवान यज्ञ से। ।

1-ऋषियों ने ऊंचा माना है स्थान यज्ञ का।
करते हैं दुनिया वाले सब सम्मान यज्ञ का।
दर्जा है तीन लोक मे-महान यज्ञ का।
भगवान का है यज्ञ और भगवान यज्ञ का।
जाता है देव लोक मे इंसान यज्ञ से। होता है ...........

2-करना हो यज्ञ प्रकट हो जाते हैं अग्नि देव।
डालो विहित पदार्थ शुद्ध खाते हैं अग्नि देव।
सब को प्रसाद यज्ञ का पहुंचाते हैं अग्नि देव।
बादल बना के भूमि पर बरसाते हैं अग्निदेव।
बदले मे एक के अनेक दे जाते अग्नि देव।
पैदा अनाज होता है-भगवान यज्ञ से।
होता है सार्थक वेद का विज्ञान यज्ञ से। होता है ......

3-शक्ति और तेज यश भरा इस शुद्ध नाम मे ।
 साक्षी यही है विश्व के हर नेक काम मे।
 पूजा है इसको श्री कृष्ण-भगवान राम ने।
होता है कन्या दान भी इसी के सामने।
मिलता है राज्य,कीर्ति,संतान यज्ञ से।
सुख शान्तिदायक मानते हैं सब मुनि इसे। होता है .....

4-वशिष्ठ विश्वमित्र   और नारद मुनि इसे।
इसका पुजारी कोई पराजित नहीं होता।
भय यज्ञ कर्ता को कभी किंचित नहीं होता।
होती हैं सारी मुश्किलें आसान यज्ञ से। होता है ......

5-चाहे अमीर है कोई चाहे गरीब है।
 जो नित्य यज्ञ करता है वह खुश नसीब है।
हम सब मे आए यज्ञ के अर्थों की भावना।
'जख्मी'के सच्चे दिल से है यह श्रेष्ठ कामना।

होती हैं पूर्ण कामना--महान यज्ञ से । होता है .... 


संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Saturday, 11 November 2017

राहुल- मोदी, गुजरात चुनाव और आगे ------

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2004 के लोकसभा चुनावों से पूर्व जहां एक ओर अधिकांश लोग ए बी बाजपेयी साहब के दोबारा लौटने के कयास लगा रहे थे वहीं दूसरी ओर एक बड़ा तबका सोनिया जी के पी एम बनने के स्वप्न सँजो रहा था।अखिल भारतीय कायस्थ महासभा आगरा के अध्यक्ष सी एम शेरी साहब के निजी कार्यक्रम में एकत्र कांग्रेस व भाजपा के तमाम लोग ऐसी ही चर्चाए कर रहे थे। मैंने तब सबके समक्ष स्पष्ट कहा था कि, न तो बाजपेयी साहब न ही सोनिया जी पी एम बनेंगी कोई तीसरा ही व्यक्ति बनेगा। चुनाव परिणाम के बाद सुषमा स्वराज, उमा भारती जैसे महिला नेत्रियों ने सोनिया जी के विरुद्ध आग उगलना शुरू कर दिया था। लेकिन डॉ एम एम सिंह साहब पी एम बने। 

गुजरात चुनावों के परिप्रेक्ष्य में एक बार 2019 के लिए फिर चर्चा है कि, क्या मोदी साहब लौटेंगे अथवा राहुल गांधी पी एम बनेंगे। मेरा पुनः विचार है कि, दोनों में से कोई नहीं फिर कोई तीसरा ही पी एम बनेगा। चुनाव भी समय पूर्व ही हो सकते हैं । बड़े अखबारों में बड़े - बड़े लेख लिखने वाले सब लोग निराश ही होंगे।
संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Thursday, 9 November 2017

काले धन की सच्चाई छिपाने को हुई डैफ्नी की हत्या ------ किंशुक पाठक

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संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Wednesday, 8 November 2017

कारपोरेट को मजबूत करने, काला धन सफ़ेद करने की कवायद थी --- नोटबंदी

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गतवर्ष की नोटबंदी के संबंध में  जर्मनी की चांसलर साहिबा ने यू एस ए की ही प्रेस के हवाले से यह रहस्योद्घाटन किया था कि, भारत में की गई नोटबंदी अमेरिकी दबाव में की गई थी। वस्तुतः ओबामा साहब रिटायर होने वाले थे और यू एस ए में आठ नवंबर 2016 को अगले राष्ट्रपति चुनाव हेतु मतदान चल रहा था जिस दिन भारत में नोटबंदी का ऐलान किया गया। यू एस ए में डिजिटल कंपनियों का व्यापार चौपट हो चुका था और उनके बंद होने की नौबत आ रही थी लेकिन भारत की नोटबंदी ने उनका अस्तित्व बचा लिया क्योंकि यहाँ कैशलेस और डिजिटल लेन - देन के लिया जनता को बाध्य कर दिया गया था। पुराने बड़े नोट बैंकों में जमा हो चुके थे और नई करेंसी बाज़ार में आई नहीं थी। गरीब जनता कराह रही थी और बड़े कारपोरेट घराने मस्ती में अपना धंधा कर रहे थे। क्योंकि : 
डिजिटल पेमेंट्स पर इतने चार्जेस
नई दिल्ली
कैश में लेन-देन की हमारी आदत को बड़ा झटका नोटंबदी के बाद लगा जब हमें डिजिटल पेमेंट्स के लिए मजबूर होना पड़ा। ऑनलाइन पेमेंट्स से लेकर मोबाइल वॉलिट और ऑनलाइन ट्रांसफर तो हमने शुरू कर दिया लेकिन क्या हमें पता है कि हमें इसके लिए कितना टैक्स या चार्ज चुकाना पड़ता है।
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संकलन-विजय माथुर

Saturday, 4 November 2017

नई पीढ़ी सांप्रदायिकता से लड़ने में सक्षम ------ कृष्णा सोबती

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    संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश


Wednesday, 1 November 2017

गुनाह,तकदीर,खुदा और कलम ------ विजय राजबली माथुर

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पंजाब की कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे और खालिस्तान आंदोलन का विरोध करने के कारण शहीद हुये लाला जगत नारायण द्वारा स्थापित अखबार द्वारा गलत दलील पेश की जा रही है। 
'खुदा ' अर्थात जो खुद ही बना हो और जिसे किसी इंसान ने बनाया नहीं हो और जिसका कार्य उत्पत्ति (GENERATE), स्थिति (OPERATE),संहार (DESTROY)होता है जो भूमि (भ ),ग (गगन-आकाश ),व (वायु - हवा ),I (अनल-अग्नि ),न (नीर - जल ) का समन्वय होता है। 

 प्रकृति ने सृष्टि 'सत ' , ' रज ' और 'तम ' के परमाणुओं से की है। ये सदैव विषम अवस्था में रहते हैं  और परस्पर  ' संसर्ग ' करते रहते हैं  जिस कारण इसे संसार कहा जाता है। जब भी सत, रज और तम के परमाणु सं अवस्था में हो जाते हैं तब वह अवस्था  ' प्रलय ' की होते है जिसमें सम्पूर्ण सृष्टि या संसार नष्ट हो जाता है। ' मनन ' करने वाला प्राणी  ' मनुष्य ' कहलाता है। यदि कोई मनन नहीं करता है तो उसे मनुष्य तन धारी पशु ही कहा जाता है। मनुष्य सदैव कुछ न कुछ ' कर्म ' करता है जिस कारण उसे  ' कृतु ' भी कहा जाता है। कर्म  तीन प्रकार के होते हैं -  सदकर्म, दुष्कर्म और अकर्म । सदकर्म का परिणाम सुफल , दुष्कर्म का परिणाम विफल होता है। अकर्म  वह कर्म  होता है जो किया जाना चाहिए था और किया नहीं गया । यद्यपि संसार के नियमों में यह अपराध नहीं है और समाज ऐसे कृत्य को दंडित नहीं करता है किन्तु प्रकृति, खुदा, GOD, भगवान की निगाह  में यह दंडित होता है।   
यह संसार एक परीक्षालय है यहाँ निरंतर परीक्षा चलती रहती है।खुदा = GOD=भगवान =भूमि,गगन,वायु,अग्नि,जल किसी भी प्राणी के कार्य में हस्तक्षेप नहीं करते हैं वे एक निरीक्षक (Investigator) के तौर पर इंसान - मनुष्य के कार्यों का सिर्फ अवलोकन करते हैं। परंतु एक परीक्षक (Examinar) के तौर पर उसके कार्यों के लेखा- जोखा के आधार पर पुरस्कृत करते व दंड देते हैं। 


खुदा की कलम से तकदीर नहीं लिखी जाती तकदीर तो इंसान खुद गढ़ता है इसलिए खुदा को दोष देने की बात पूर्णतया: गलत है। 




संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Monday, 30 October 2017

दान देने का महत्व प्रचारण नुकसान पहुंचाने का उपक्रम भी बन सकता है ------ विजय राजबली माथुर

टी वी पर,जगह-जगह प्रवचनों मे, अखबारो मे आपको दान देने का महत्व प्रचारित करके नुकसान पहुंचाने का उपक्रम किया जाता है और आप धर्म के नाम पर ठगे जाकर गर्व की अनुभूति करते हैं। यह आप पर है कि ढ़ोंगी-लुटेरे महात्माओ के फेर मे दान देकर नुकसान उठाएँ या फिर इस प्रस्तुतीकरण का लाभ उठाते हुये दान न दें। बेहतर यही है कि दान देकर पाखंडियों की लूट और शोषण को मजबूत न करें।
* आगरा में पोस्टेड UPSIDC के एक एक्ज़ीक्यूटिव इंजीनियर साहब ने वृन्दावन में दो भूखे लोगों को भोजन कराया और रात्रि समय लौटते में आगरा की सीमा में प्रवेश होते ही हथियारों की नोक पर उनकी सोने की  चेन वाली घड़ी, उनकी पत्नी के कंगन, गले का हार और दोनों की नकदी लूट ली गई। 
** झांसी की एक शिक्षिका नें अपनी कालोनी के एक मंदिर को रु 1100/- दान दिये और शिला पट्टिका पर उनका नाम भी दर्ज हुआ लेकिन उनकी खुद की ड्राइविंग पर उनकी कार से टकरा कर एक मोटर साईकिल सवार जैन दंपति की मौत हो गई जिसके मुकदमे का उनको नौ वर्ष सामना करना पड़ा। 
*** एक EO साहब ने गया जाकर दान - पुण्य किया परिणाम स्वरूप उनको गंभीर बीमारी व आपरेशन का सामना करना पड़ा। 
अतः दान देने के महत्व को समझने के साथ - साथ दान देने के नुकसान को भी समझ लें और फिर करें या न करें का निर्णय लें।




टी वी पर,जगह-जगह प्रवचनों मे, अखबारो मे आपको दान देने का महत्व प्रचारित करके नुकसान पहुंचाने का उपक्रम किया जाता है और आप धर्म के नाम पर ठगे जाकर गर्व की अनुभूति करते हैं। यह आप पर है कि ढ़ोंगी-लुटेरे महात्माओ के फेर मे दान देकर नुकसान उठाएँ या फिर इस प्रस्तुतीकरण का लाभ उठाते हुये दान न दें। बेहतर यही है कि दान देकर पाखंडियों की लूट और शोषण को मजबूत न करें।  
निकटतम और घनिष्ठतम लोगों के उदाहरण उनकी जन्म-पत्रियों की ओवरहालिंग करने के बाद ही दिये हैं,  ब्रहस्पति स्व-राशि का हो या  उच्च का उससे संबन्धित वस्तुओं का दान नहीं करना चाहिए । अब प्रश्न है कि आप कैसे जानेंगे कि आप का कौन सा ग्रह उच्च का या स्व-ग्रही है और उसके लिए क्या-क्या दान नहीं करना चाहिए?इसके लिए निम्न-लिखित तालिका का अवलोकन करें-


क्रम संख्या          ग्रह       उच्च राशि            स्व-राशि 

1-                 सूर्य              मेष (1 )                सिंह (5 )


 2-               चंद्र                 वृष  (2 )                 कर्क (4 )


3-              मंगल             मकर (10 )                 मेष (1 ) और वृश्चिक (8 )


4-              बुध                कन्या (6 )                  मिथुन (3 ) और कन्या (6 )


5-             ब्रहस्पति        कर्क (4 )                     धनु (9 ) और मीन (12 )


6-             शुक्र                मीन (12 )                   वृष (2 ) और तुला (7 )


7-            शनि                 तुला (7 )                     मकर (10 ) और कुम्भ (11 )


8-            राहू                   मिथुन (3 )                 'राहू' और 'केतू' वस्तुतः हमारी पृथिवी के उत्तरी और 

9-            केतू                   धनु (9 )                दक्षिणी      ध्रुव हैं जिन्हें छाया ग्रह के रूप मे गणना मे लिया जाता है।

ऊपर क्रम संख्या मे ग्रहों के नाम दिये हैं जबकि राशियों की क्रम संख्या कोष्ठक मे दी गई है। जन्मपत्री मे बारह घर होते हैं और उनमे ये बारह राशिया उस व्यक्ति के जन्म के अनुसार राशियो की क्रम संख्या मे अंकित रहती हैं। उस समय के अनुसार जो ग्रह जिस राशि मे होता है वैसा ही जन्मपत्री मे लिखा जाता है। यदि सूर्य संख्या (1 ) मे है तो समझें कि उच्च का है। ब्रहस्पति यदि संख्या (4 ) मे है तो उच्च का है। इसी प्रकार ग्रह की स्व-राशि भी समझ जाएँगे। अब देखना यह है कि जितने ग्रह उच्च के अथवा स्व-राशि के हैं उनसे संबन्धित पदार्थों का न तो दान करना है और न ही निषेद्ध्य किया गया कार्य करना है वरना कोई न कोई हादसा या नुकसान उठाना ही पड़ेगा। नीचे नवों ग्रहों से संबन्धित निषिद्ध वस्तुओं का अवलोकन करके सुनिश्चित कर लें-


1-सूर्य :

सोना,माणिक्य,गेंहू,किसी भी प्रकार के अन्न से बने पदार्थ,गुड,केसर,तांबा और उससे बने पदार्थ,भूमि-भवन,लाल और गुलाबी वस्त्र,लाल और गुलाबी फूल,लाल कमल का फूल,बच्चे वाली गाय आदि।


2-चंद्र :

चांदी,मोती,चावल,दही,दूध,घी,शंख,मिश्री,चीनी,कपूर,बांस की बनी चीजें जैसे टोकरी-टोकरा,सफ़ेद स्फटिक,सफ़ेद चन्दन,सफ़ेद वस्त्र,सफ़ेद फूल,मछली आदि।


3-मंगल :

किसी भी प्रकार की मिठाई,मूंगा,गुड,तांबा और उससे बने पदार्थ,केसर,लाल चन्दन,लाल फूल,लाल वस्त्र,गेंहू,मसूर,भूमि,लाल बैल आदि।

4-बुध :

छाता,कलम,मशरूम,घड़ा,हरा मूंग,हरे वस्त्र,हरे फूल,सोना,पन्ना,केसर,कस्तूरी,हरे रंग के फल,पाँच-रत्न,कपूर,हाथी-दाँत,शंख,घी,मिश्री,धार्मिक पुस्तकें,कांसा और उससे बने बर्तन आदि।

5-ब्रहस्पति :

सोना,पुखराज,शहद,चीनी,घी,हल्दी,चने की दाल,धार्मिक पुस्तकें,केसर,नमक,पीला चावल,पीतल और इससे बने बर्तन,पीले वस्त्र,पीले फूल,मोहर-पीतल की,भूमि,छाता आदि। कूवारी कन्याओं को भोजन न कराएं और वृद्ध-जन की सेवा न करें (जिनसे कोई रक्त संबंध न हो उनकी )।किसी भी मंदिर मे और मंदिर के पुजारी को दान नहीं देना चाहिए।

6-शुक्र :

हीरा,सोना, सफ़ेद छींट दार चित्र और  वस्त्र,सफ़ेद वस्त्र,सफ़ेद फूल,सफ़ेद स्फटिक,चांदी,चावल,घी,चीनी,मिश्री,दही,सजावट-शृंगार की वस्तुएं,सफ़ेद घोडा,गोशाला को दान,आदि। तुलसी  की पूजा न करें,युवा स्त्री का सम्मान न करें ।


7-शनि :

सोना,नीलम,उड़द,तिल,सभी प्रकार के तेल विशेष रूप से सरसों का तेल,भैंस,लोहा और स्टील तथा इनसे बने पदार्थ,चमड़ा और इनसे बने पदार्थ जैसे पर्स,चप्पल-जूते,बेल्ट,काली गाय,कुलथी, कंबल,अंडा,मांस,शराब आदि।

8-राहू :

सोना,गोमेद,गेंहू,उड़द,कंबल,तिल,तेल सभी प्रकार के,लोहा और स्टील तथा इनके पदार्थ,काला घोडा, काला वस्त्र,काला फूल,तलवार,बंदूक,सप्तनजा,सप्त रत्न,अभ्रक आदि।

9-केतू :

वैदूर्य (लहसुन्यिया),सीसा-रांगा,तिल,सभी प्रकार के तेल,काला वस्त्र, काला फूल,कंबल,कस्तूरी,किसी भी प्रकार के शस्त्र,उड़द,बकरा (GOAT),काली मिर्च,छाता,लोहा-स्टील और इनके बने पदार्थ,सप्तनजा आदि।

पति या पत्नी किसी एक के भी ग्रह उच्च या स्व ग्रही होने पर दोनों मे से किसी को भी उससे संबन्धित दान नहीं करना है और उन दोनों की आय  से किसी तीसरे को भी दान नहीं करना है। 

* आगरा में पोस्टेड UPSIDC के एक एक्ज़ीक्यूटिव इंजीनियर साहब ने वृन्दावन में दो भूखे लोगों को भोजन कराया और रात्रि समय लौटते में आगरा की सीमा में प्रवेश होते ही हथियारों की नोक पर उनकी सोने की  चेन वाली घड़ी, उनकी पत्नी के कंगन, गले का हार और दोनों की नकदी लूट ली गई। 
** झांसी की एक शिक्षिका नें अपनी कालोनी के एक मंदिर को रु 1100/- दान दिये और शिला पट्टिका पर उनका नाम भी दर्ज हुआ लेकिन उनकी खुद की ड्राइविंग पर उनकी कार से टकरा कर एक मोटर साईकिल सवार जैन दंपति की मौत हो गई जिसके मुकदमे का उनको नौ वर्ष सामना करना पड़ा। 
*** एक EO साहब ने गया जाकर दान - पुण्य किया परिणाम स्वरूप उनको गंभीर बीमारी व आपरेशन का सामना करना पड़ा। 
अतः दान देने के महत्व को समझने के साथ - साथ दान देने के नुकसान को भी समझ लें और फिर करें या न करें का निर्णय लें। 

यद्यपि ढ़ोंगी-पाखंडी-आडंबरधारी  तो इस विश्लेषण का विरोध करेंगे ही किन्तु 'एथीस्टवादी' भी इसका विरोध करेंगे और अंततः अधर्मी- ढ़ोंगी-पाखंडी-आडंबरधारी तबके का ही समर्थन करेंगे। इसी कारण देश की जनता उल्टे उस्तरे से मूढ़ी जाती रहती है। 

Friday, 27 October 2017

एक नारीवादी लेखिका का सच --- Er S D Ojha / सच स्वीकारने को कोई तैयार नहीं --- विजय राजबली माथुर




Er S D Ojha
2 hrs
एक नारीवादी लेखिका का सच ।
मशहूर लेखिका मैत्रेयी पुष्पा का छठ ब्रती महिलाओं पर कसा तंज उन पर हीं भारी पड़ गया । उन्होंने लिखा था -
"छठ के त्यौहार में बिहार वासिनी स्त्रियां मांग माथे के अलावा नाक पर भी सिंदूर पोत रचा लेती हैं । कोई खास वजह होती है क्या ?"
लोग उन्हें ट्रोल करने लगे । एक पाठक ने लिखा कि आपके पति हैं , फिर भी आप सिंदूर नहीं लगातीं । इस बात पर तो किसी ने आज तक तंज नहीं कसा । वैसे इस बात पर उन्हीं के शब्दों में यह सवाल तो बनता है - क्या कोई खास वजह है क्या ? ज्यादा हो हल्ला मचने पर मैत्रेयी पुष्पा ने अपनी यह विवादित पोस्ट हटा ली है , पर जितनी सुर्खियां बटोरनी थी , वह बटोरने के बाद या जितना उनके व्यक्तित्व को नुकसान होना था , उसके हो चुकने के बाद ।
मैत्रेयी पुष्पा हिंदी अकादमी दिल्ली की उपाध्यक्ष हैं । उन्हें महिला हिंदी लेखन की यदि सुपर स्टार भी कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी । उनकी कहानी " ढैसला " पर टेलिफिल्म बन चुकी है । उनके उपन्यास " बेतवा बहती रही " को हिंदी संस्धान द्वारा " प्रेमचंद सम्मान " दिया गया है । " कहैं ईसुरी फाग " एक स्थानीय लोक गायक ईसुरी पर लिखा उपन्यास है । मैत्रेयी पुष्पा को गांव की पहली लेखिका कहा जाता है , जिन्होंने गांव की गवईं स्त्री के दर्द को समझा है । लेकिन " इदन्नम " , "चाक "और "अलमा कबूतरी " में गांव की स्त्री का मैत्रेयी पुष्पा ने जो एडवांस रूप दिखाया है । वह वास्तव में वैसा नहीं है । यदि मांग में सिंदूर न पहनना , सिगरेट पीना और जींस पहनना हीं फेमिनिस्ट की पहचान है तो माफ कीजिए , मुझे आज तक कोई ऐसी औरत गांव में नहीं मिली । मैत्रेयी पुष्पा भी एक नारीवादी हैं , पर वह भी साड़ी पहनती हैं । ये और बात है कि वे मांग में सिंदूर नहीं पहनतीं । ये उनकी मर्जी है । मानिए वही जो मन भावे ।
सरिता से अपने कथा संसार का सूत्रपात करने वाली मैत्रेयी पुष्पा जब धर्मयुग , साप्ताहिक हिंदुस्तान और सारिका जैसी उच्च श्रेणी की पत्रिकाओं में अपनी पैठ कायम करती हैं तो सभी लोग उनके इस इल्म का लोहा मानने लगते हैं । वही मैत्रेयी पुष्पा जब होटल में राजेंद्र यादव के साथ पहुंचती हैं तो वह जल्दी जल्दी अपने कमरे में पहुंच जाना चाहती हैं । उन्हें डर है कि राजेंद्र यादव कहीं उनका हाथ न पकड़ लें । किंतु जब रात को मैत्रेयी पुष्पा को पानी की दरकार होती है तो रिस्पेशन में फोन न कर वह राजेंद्र यादव के कमरे का दरवाजा खटखटाती हैं । ऐसा क्यों ? यह बात किसी ने मैत्रेयी पुष्पा से नहीं पूछी । कारण , उनकी मर्जी । हो सकता है कि उनको होटल स्टाफ से ज्यादे राजेंद्र यादव पर विश्वास हो । या जल्दी से कमरे में अपने को बंद कर लेने से वे अपने आप को अपराधी मान रहीं हों । उनको ऐसा लगा हो कि ऐसा कर उन्होंने राजेंद्र यादव का अपमान किया है । कुछ भी हो सकता है । इस बात का तो किसी ने विवाद का विषय नहीं बनाया । फिर बिहार वासिनी औरतों के नाक ,मांग व माथे पर सिंदूर पोतने पर ऐसा तंज क्यों ?
कभी राजेंद्र यादव ने भी हनुमान को विश्व का पहला आतंकवादी कहा था । ऐसा कह उन्होंने काफी सुर्खियां बटोरी थीं । वैसे आप पूछ सकते हैं कि राजेंद्र यादव को सुर्खियों की क्या जरूरत थी ? वे तो पहले से हीं एक स्थापित कथाकार थे । लेकिन उनके इस कथन से जो उन्हें जानते तक नहीं थे वे भी जानने लगे । आम तौर पर साहित्यकारों को साहित्यिक अभिरूचि रखने वाले लोग हीं जानते हैं । लेकिन साहित्यकार कुछ इस तरह का उथल पुथल मचा दे कि वह पूरी मीडिया में खबर की खबर बन जाय तो उसको जानने वाले बहुत से लोग हो जाएंगे । कहीं यही मंशा मैत्रेयी पुष्पा की भी तो नहीं थी ।
राजेंद्र यादव ने मैत्रेयी पुष्पा के लिए एक बार लिखा था -"तुम स्त्री को गांव लेकर आईं ।" यहां बात विल्कुल उलट हुई है । गांव गवईं स्त्रियों के सिंदूर लगाने की परम्परा पर तंज कसकर मैत्रेयी ने स्त्री को शहर ले जाने की कोशिश की है । इनके पति श्री आर सी शर्मा ने भी इनसे एक बार कहा था कि तुम दूसरी औरतों जैसी क्यों नहीं हो ? इसका कारण मैत्रेयी ने यह बताया - मैंने खुद को पत्नी माना नहीं कभी । चलो मान लेते हैं कि आप अपने को पत्नी नहीं मानतीं , लेकिन एक दोस्त तो मानती होंगी ? तो दोस्त का भी यह कर्तव्य होता है कि टूर पर जाते वक्त दोस्त से एक बार पूछ तो ले कि वह कब आएगा ? आपने ऐसा कभी शर्मा जी से नहीं पूछा । ऐसा क्यों ? ऐसा शायद इसलिए कि आप एक फेमिनिस्ट हैं । ऐसा करेंगी तो आपकी छवि एक फेमिनिस्ट की नहीं रह जाएगी ।
आप कहती हैं कि कभी भी आपने जाते समय शर्मा जी की अटैची तैयार नहीं की । ठीक है । एक आदमी टूर पर जा रहा है । उसे जाने की जल्दी है । वह चीजों को सहेजने में तनाव ग्रस्त है । ऐसे में आप उसकी थोड़ा मदद कर देंगी तो आपका क्या जाएगा ? लेकिन नहीं , आप ऐसा कर देंगी तो आपके नाम से फेमिनिस्ट का तगमा हटा लिया जाएगा । आपकी बड़ी बेइज्जत हो जाएगी ।आपने यह भी कहा है कि शर्मा जी के जाने के बाद आप बहुत अच्छा महसूस करती हैं । अपने को आजाद महसूस करती हैं । अपना पसंददीदा गजल सुनती हैं । क्या शर्मा जी के रहते हुए आप पर बंदिश रहती है ? नहीं , ऐसा कुछ नहीं है । चूंकि आप एक फेमिनिस्ट हैं तो कुछ अलग हट कर करना चाहिए । कुछ अलग सोचना चाहिए । कुछ अलग लिखना चाहिए । तभी तो आप एक नारीवादी लेखिका कहलाएंगी !
राजेंद्र यादव ने एक बार "हंस" में आपको मरी हुई गाय कहा था । उसके बाद आपकी शान में कसीदे भी पढ़े थे । उस समय आपने राजेंद्र यादव से इसकी वजह क्यों नहीं पूछी । आपको भी एक लेख लिखना चाहिए था और राजेंद्र यादव से पूछना चाहिए था , " इसकी खास वजह है क्या ?" लेकिन नहीं । आपने नहीं पूछा । पूछती भी कैसे ? उस लेख में केवल आपकी बड़ाई हीं बड़ाई थी । बड़ाई सबको अच्छी लगती है । आपको भी लगी होगी । मन्नू भंडारी ने एक बार लिखा था कि आपको कथा लिखने की समझ विल्कुल नहीं थी । आपने अपना पहला उपन्यास मन्नू जी को हीं दिखाया था । मन्नू ने कोई टिप्पणी नहीं की थी । क्योंकि उसमें टिप्पणी करने जैसा कुछ था हीं नहीं । मन्नू भण्डारी आपको हताश भी नहीं करना चाहती थीं । इसलिए कोई टिप्पणी नहीं की थी । राजेंद्र यादव का साथ मिला तो आप में लेखन कौशल आया । आज आप इस मकाम पर पहुंची हैं तो राजेंद्र यादव की बदौलत । आदमी को कभी भी नहीं भूलना चाहिए कि वह कौन सी सीढ़ियां चढ़कर इस मकाम पर पहुंचा है । अब आप इस मकाम पर पहुंच कर किसी परम्परा का मजाक उड़ाएं तो यह आपको कत्तई शोभा नहीं देता । आप पूछती हैं - इसकी कोई खास वजह है क्या ? जिस तरह से हर " क्यों" का जवाब नहीं होता , उसी तरह से हर परम्परा की हर बार वजह नहीं होती । यह पीढ़ी दर पीढ़ी बिना वजह के भी चलती रहती है ।
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1927343070924903&set=a.1551150981877449.1073741826.100009476861661&type=3
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लेकिन सच्चाई तो यह है कि, आज के पूंजीवादी युग में जबकि 'पूंजी' की ही पूजा है बाजारवाद (उद्योगपति/ व्यापारी वर्ग ) ब्राह्मणवाद (पुरोहित वर्ग ) के सहयोग से जनता को उल्टे उस्तरे से मूढ़ रहा है। जब भी सच्चाई को सामने लाने का प्रयास किया जाता है यह गठजोड़ उसे हर तरीके से दबाने - कुचलने का प्रयास करता है।  
(विजय राजबली माथुर )

देखिये प्रमाण : 

Thursday, 26 October 2017

गिरिजा देवी का जीवन सुखमय था : विनोद दुआ / " शादी के बाद का जीवन बहुत त्रासद रहा था । " : अभिषेक श्रीवास्तव

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 वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ साहब और  ठुमरी गायिका विद्या राव जी का कहना है कि, गिरिजा देवी का जीवन सुखमय था। वहीं बनारस से संबन्धित वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव साहब का कहना है कि, बेगम अख्तर और गिरिजा देवी " शादी के बाद दोनों का जीवन बहुत त्रासद रहा था । "





    संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Tuesday, 24 October 2017

क्यों लायी वसुंधरा सरकार ये अध्यादेश : पर्दे के पीछे की कहानी ------ हिमा अग्रवाल

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 Hima Agrawal
16 hrs
क्यों लायी वसुंधरा सरकार ये अध्यादेश, आईये जानें पर्दे के पीछे की कहानी।

साभार:-- वकील #पूनम_चन्द_भंडारी

खो नागोरियन 【 आगरा रोड़】 मे 200 बीघा #ईकोलोजिकल भूमि को जेडीए ने #आवासीय मे बदल दिया था जिसके विरूद्ध यशवंत शर्मा ने जनहित याचिका लगायी थी उस पर हाईकोर्ट ने 2005 मे आदेश दिया कि भविष्य मे ईकोलोजिकल भूमि का भू-उपयोग नहीं बदला जावे लेकिन इस आदेश की धज्जियाँ उड़ाते हुए 2006 मे जेडीए ने मिलीभगत करके 1222.93 हेक्टेयर भूमि का उपान्तरण ईकोलोजिकल से आवासीय व मिश्रित भू उपयोग कर दिया ..... क्योंकि ये ज़मीन ज़्यादातर IAS-IPS ने ख़रीद रखी थी जिनमें --

डी.बी.गुप्ता,
वीनू गुप्ता, 
दिनेश कुमार गोयल, 
मधुलिका गोयल, 
सुनील अरोड़ा, 
रीतू अरोड़ा, 
सत्यप्रिय गुप्ता, 
प्रियदर्शी ठाकुर , 
ईश्वर चन्द श्रीवास्तव , 
अलका काला, 
पुरूषोत्तम अग्रवाल, 
डाक्टर लोकेश गुप्ता, 
ऊषाशर्मा, 
एम के खन्ना, 
केएस गलूणडिया,
चित्रा चोपड़ा, 
पवन चोपड़ा 
अशोक शेखर , 
संदीप कुमार बैरवा वग़ैरह हैं !


इतना ही नहीं इन अधिकारियों ने जेडीए से इनके आसपास की ज़मीनों को सड़के बनाने के लिए अधिग्रहण करवा दिया ताकि इनकी ज़मीनों के आगे 160 फ़ीट चौड़ी सड़के बन जाएँ । 21.01.017 को जोधपुर हाईकोर्ट ने मास्टर प्लान याचिका मे आदेश पारित किया और इस 1222 हैक्टेयर ज़मीन का रिकोर्ड मँगवाया लेकिन जेडीए ने कोर्ट को गुमराह करने के लिए उपांतरण का रिकोर्ड ही पेश किया लेकिन वो रिकार्ड नहीं पेश किया जिसके द्वारा उपांतरण किया गया था और न्यायालय मे कहा कि इसके अलावा कोई रिकोर्ड नहीं है हमने ज़बर्दस्त एतराज़ किया और हाईकोर्ट ने फटकार लगायी तो जेडीए ने रिकोर्ड पेश किया तब पोल खुली कि मुख्य नगर नियोजक ने ईकोलोजिकल से भूउपयोग बदलने से इंकार किया था लेकिन इन अधिकारियों ने मिलिभगत करके भू-उपयोग परिवर्तन करा लिया और कोड़ियों की ज़मीन करोड़ों रूपए की होगयी जिसमें मोहन लाल गुप्ता एम एल ए और अशोक परनामी एमएलए वग़ैरह भी शामिल हैं हमने याचिका मे सारे दस्तावेज़ व जमाबंदियां भी पेश की थी हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा थी क्या कार्यवाही करेगी और ये जानकारी मिलने के बाद हम भी रिपोर्ट दर्ज करने की कार्यवाही कर रहे थे कि सरकार इनको बचाने के लिए ये ordinance लेकर आगयी जो असंवैधानिक है। इसके अलावा हम हाईकोर्ट से बारबार कह रहे थे कि जेडीए योजनाओं का नियमन बिना ज़ोनल प्लान बनाए कर रहा है जो अवैध है हाईकोर्ट ने मना किया लेकिन नियमन लगातार जारी रहा मैंने अवमानना याचिका 02 जून को लगायी तो सरकार एवं अधिकारी समझ गए कि वे जेल जा सकते हैं तो सरकार ये ordinance लायी ताकि अधिकारियों को बचाया जा सके।और इनके ख़िलाफ़ FIR भी दर्ज नहीं हो सके।
साभार : 
https://www.facebook.com/hima.cool.25/posts/2049541525278126

संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
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Monday, 23 October 2017

हमारे गणतन्त्र के लिए अत्यंत खतरनाक स्थिति ------ उर्मिलेश

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  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Wednesday, 18 October 2017

प्रणब मुखर्जी कहते हैं ' ए एम यू राष्ट्रवाद का सबसे सही उदाहरण है

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उच्च शिक्षा संस्थानों में मौलिक अनुसंधानो  को महत्व न देना पिछड़ने का कारण है  : 


https://www.facebook.com/photo.php?fbid=465023307231342&set=a.250610915339250.1073741828.100011710314174&type=3












  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Saturday, 14 October 2017

' चित भी मेरी : पट भी मेरी ' संघी नीति को नहीं समझ कर विपक्ष अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी चला रहा है ------ विजय राजबली माथुर

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Arvind Raj Swarup Cpi
16 hrs
हिंदू राष्ट्रवादी सम्पादक हरिशंकर व्यास ने अपने अख़बार ‘नया इंडिया’ में आज लिखा है -

“ढाई लोगों के वामन अवतार ने ढाई कदम में पूरे भारत को माप अपनी ढाई गज की जो दुनिया बना ली है, उसमें अंबानी, अडानी, बिड़ला, जैन, अग्रवाल, गुप्ता याकि वे धनपति और बड़े मीडिया मालिक जरूर मतलब रखते हैं, जिनकी दुनिया क्रोनी पूंजीवाद से रंगीन है और जो अपने रंगों की हाकिम के कहे अनुसार उठक-बैठक कराते रहते हैं।

“आज का अंधेरा हम सवा सौ करोड़ लोगों की बीमारी की असलियत लिए हुए है। ढाई लोगों के वामन अवतार ने लोकतंत्र को जैसे नचाया है, रौंदा है, मीडिया को गुलाम बना उसकी विश्वसनीयता को जैसे बरबाद किया है - वह कई मायनों में पूरे समाज, सभी संस्थाओं की बरबादी का प्रतिनिधि भी है। तभी तो यह नौबत आई जो सुप्रीम कोर्ट के जजों को कहना पड़ा कि यह न कहा करें कि फलां जज सरकारपरस्त है और फलां नहीं!

“अदालत हो, एनजीओ हो, मीडिया हो, कारोबार हो, भाजपा हो, भाजपा का मार्गदर्शक मंडल हो, संघ परिवार हो या विपक्ष सबका अस्तित्व ढाई लोगों के ढाई कदमों वाले ‘न्यू इंडिया’ के तले बंधक है!

“आडवाणी, जोशी जैसे चेहरे रोते हुए तो मीडिया रेंगता हुआ। आडवाणी ने इमरजेंसी में मीडिया पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि इंदिरा गांधी ने झुकने के लिए कहा था मगर आप रेंगने लगे! वहीं आडवाणी आज खुद के, खुद की बनाई पार्टी और संघ परिवार या पूरे देश के रेंगने से भी अधिक बुरी दशा के बावजूद ऊफ तक नहीं निकाल पा रहे हैं।

“सोचें, क्या हाल है! हिंदू और गर्व से कहो हम हिंदू हैं (याद है आडवाणी का वह वक्त), उसका राष्ट्रवाद इतना हिजड़ा होगा यह अपन ने सपने में नहीं सोचा था। और यह मेरा निचोड़ है जो 40 साल से हिंदू की बात करता रहा है! मैं हिंदू राष्ट्रवादी रहा हूं। इसमें मैं ‘नया इंडिया’ का वह ख्याल लिए हुए था कि यदि लोकतंत्र ने लिबरल, सेकुलर नेहरूवादी धारा को मौका दिया है तो हिंदू हित की बात, दक्षिणपंथ, मुसलमान को धर्म के दड़बे से बाहर निकाल उन्हें आधुनिक बनवाने की धारा का भी सत्ता में स्थान बनना चाहिए।

“यह सब सोचते हुए कतई कल्पना नहीं की थी कि इससे नया इंडिया की बजाय मोदी इंडिया बनेगा और कथित हिंदू राष्ट्रवादी सवा सौ करोड़ लोगों की बुद्धि, पेट, स्वाभिमान, स्वतंत्रता, सामाजिक आर्थिक सुरक्षा को तुगलकी, भस्मासुरी प्रयोगशाला से गुलामी, खौफ के उस दौर में फिर हिंदुओं को पहुंचा देगा, जिससे 14 सौ काल की गुलामी के डीएनए जिंदा हो उठें। आडवाणी भी रोते हुए दिखलाई दें।

“आप सोच नहीं सकते हैं कि नरेंद्र मोदी, और उनके प्रधानमंत्री दफ्तर ने साढ़े तीन सालों में मीडिया को मारने, खत्म करने के लिए दिन-रात कैसे-कैसे उपाय किए हैं। एक-एक खबर को मॉनिटर करते हैं। मालिकों को बुला कर हड़काते हैं। धमकियां देते हैं।

“जैसे गली का दादा अपनी दादागिरी, तूती बनवाने के लिए दस तरह की तिकड़में सोचता है, उसी अंदाज में नरेंद्र मोदी और उनके प्रधानमंत्री दफ्तर ने भारत सरकार की विज्ञापन एजेंसी डीएवीपी के जरिए हर अखबार को परेशान किया ताकि खत्म हों या समर्पण हो। सैकड़ों टीवी चैनलों, अखबारों की इम्पैनलिंग बंद करवाई।

“इधर से नहीं तो उधर से और उधर से नहीं तो इधर के दस तरह के प्रपंचों में छोटे-छोटे प्रकाशकों-संपादकों पर यह साबित करने का शिकंजा कसा कि तुम लोग चोर हो। इसलिए तुम लोगों को जीने का अधिकार नहीं और यदि जिंदा रहना है तो बोलो जय हो मोदी! जय हो अमित शाह! जय हो अरूण जेटली!


“और इस बात पर सिर्फ मीडिया के संदर्भ में ही न विचार करें! लोकतंत्र की तमाम संस्थाओं को, लोगों को कथित ‘न्यू इंडिया’ में ऐसे ही हैंडल किया जा रहा है। ढाई लोगों की सत्ता के चश्मे में आडवाणी हों या हरिशंकर व्यास या सिर्दाथ वरदराजन, भाजपा का कोई मुख्यमंत्री या मोहन भागवत तक सब इसलिए एक जैसे हैं कि सभी ‘न्यू इंडिया’ की प्रयोगशाला में महज पात्र हैं, जिन्हें भेड़, चूहे के अलग-अलग परीक्षणों से ‘न्यू इंडिया’ लायक बनाना है। ...”
https://www.facebook.com/arvindrajswarup.cpi/posts/1984164238468371




वरुण गांधी (भाजपा सांसद ), हरिशंकर व्यास ( जिनका  लेख अरविंद राज स्वरूप CPI के वरिष्ठ नेता द्वारा उद्धृत किया गया है )  और  हज़ारे साहब के साक्षात्कार पर ध्यान दें  तो स्पष्ट होता है कि , संघ की पसंद के पी एम मोदी  की सरकार के विरुद्ध अभियान में भी अग्रणी संघ के नेता और विचारक ही हैं। यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और शत्रुघन सिन्हा  आदि नेताओं व विचारकों के कदम भी इसी कड़ी का हिस्सा हैं। विपक्ष के जो नेता या विचारक मुखर होते हैं उनके विरुद्ध क्रिमिनल  व सिविल केस चलाये जाते हैं या उनकी हत्या करा दी जाती है। यह है ' चित भी मेरी : पट भी मेरी ' संघी नीति जिसे वर्तमान विपक्ष के नेता और दल नहीं समझ रहे हैं  जो कि, भारतीय राजनीति से उनके सफाये की योजना है। 
संघ ने सत्ता ( शासन और प्रशासन दोनों ) पर  मजबूत पकड़ बनाने के बाद  अब विपक्ष पर भी पकड़ बनाना शुरू कर दिया है जिससे मोदी सरकार के पतन  की दशा में बनने वाली सरकार में भी संघ की मजबूत पकड़ बरकरार रहे। 
यदि वर्तमान विपक्ष ने आगामी लोकसभा चुनाव कांग्रेस + CPM समेत सम्पूर्ण वामपंथ + ममता बनर्जी समेत समस्त क्षेत्रीय दलों ने एक साथ न लड़ कर अलग - अलग लड़ा या आ आ पा (AAP) को अपने साथ जोड़ा तो तय है कि, बनने वाली सरकार  पर भी संघ का ही नियंत्रण रहेगा। 
------ विजय राजबली माथुर