Wednesday 22 June 2011

भूख और बम

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मार्टिन लूथर किंग ने कहा था-"संसार में व्याप्त त्रासदी बुरे लोगों का कोहराम नहीं वरन अच्छे लोगों का खामोश रहना है"

यह कथन अक्षरशः सत्य है.देश में वैचारिक संकीरनटा वादी,धार्मिक कट्टर-पंथी,जातिवादी,युधोंमादी अंधराष्ट्रवादी और साम्राज्यवादी ताकतें अपने खूनी पंजे पसार रही हैं,किन्तु अच्छे लोग खामोश हैं.यह खामोशी कैसे टूटे?आज ऐसे समय में जब हमारे अधिकाँश दिशानाय्कों ने अपने आदर्श ,अपने लक्ष्य से मुंह मोड कर समाज और देश को अपनी सोच से बाहर कर दिया है कुछ उत्साही नव रचनाकारों ने इन सुलगते सवालों के रूबरू होकर जन आक्रोश को बुलंद करने का हौसला किया है.जब भारत और पाकिस्तान द्वारा एटम -बमों का परीक्षण किया गया तो जनता को क्या मिला ?इस सम्बन्ध में 'मधुर'जी की यह कविता आँखें खोलने को पर्याप्त है---------






 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर

2 comments:

  1. सही कहा आँखे खोलती रचना.हार्दिक आभार पढ़वाने के लिए.

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  2. एक अच्छी कविता की प्रस्तुति के लिए आपको हार्दिक धन्यवाद! इस कविता में नैतिकता से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डाला गया हैं। हम सभी भारतीयों को उस पर विचार करना चाहिए। भारत कभी नैतिकता के मामले में विश्व में आगे था। किन्तु वह गुज़रे जमाने की बातें हो गई हैं। हमारे यहाँ नैतिकता का पाठ किताबों में क़ैद हो कर रह गया है। उसे वहाँ से निकाल कर व्यवहार में लाए जाने का प्रयत्न किए जाने की जरूरत है।

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