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Saturday, 9 May 2015

रेशमी आवाज़ के मालिक तलत महमूद --- Dhruv Gupt




इतना न मुझसे तू प्यार बढ़ा कि मैं एक बादल आवारा !
दिल में उतर जाने वाली भावुक, थरथराती, रेशमी आवाज़ के मालिक तलत महमूद अपने दौर के बेहद अजीम पार्श्वगायक रहे हैं। अपनी अलग-सी मर्मस्पर्शी अदायगी के बूते उन्होंने अपने समकालीन गायकों मोहम्मद रफ़ी, मुकेश, मन्ना डे और हेमंत कुमार के बरक्स अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। 1939 में आल इंडिया रेडियो, लखनऊ से ग़ज़ल गायक के रूप में अपनी पहचान बनाने के बाद फिल्मों में उन्हें पहला ब्रेक 'शिक़स्त' के गीत 'सपनों की सुहानी दुनिया को' से मिला, लेकिन ख्याति मिली उन्हें 1944 में गाए गीत 'तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी' से। खूबसूरत चेहरे वाले तलत महमूद ने अपने आरंभिक दौर में गायन के साथ कुछ फिल्मों में नायक की भूमिकाएं भी निभाई, लेकिन कई महान अभिनेताओं के उस दौर में अभिनेता के रूप में उनकी कोई पहचान न बन सकी तो उन्होंने अपना सारा ध्यान अपनी गायिकी पर केंद्रित कर दिया। उनके गाए कुछ कालजयी गीत हैं - चल दिया कारवां, हमसे आया न गया तुमसे बुलाया न गया, जाएं तो जाएं कहां, ऐ मेरे दिल कहीं और चल, सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया, तस्वीर बनाता हूं तस्वीर नहीं बनती, आसमां वाले तेरी दुनिया से जी घबड़ा गया, दिले नादां तुझे हुआ क्या है, ये हवा ये रात ये चांदनी, इतना न मुझसे तू प्यार बढ़ा, आंसू समझ के क्यों मुझे आंख से तूने गिरा दिया, जलते हैं जिसके लिए तेरी आंखों के दीये, मेरी याद में तुम न आंसू बहाना, फिर वही शाम वही गम वही तन्हाई है, मैं तेरी नज़र का सरूर हूं, मैं दिल हूं एक अरमान भरा, अंधे ज़हान के अंधे रास्ते, अश्कों में जो पाया है वो गीतों में दिया है, रात ने क्या क्या ख्वाब दिखाए, ऐ गमे दिल क्या करूं ऐ वहशते दिल क्या करूं, प्यार पर बस तो नहीं है मेरा, तेरी आंख के आंसू पी जाऊं, होके मज़बूर मुझे उसने भुलाया होगा आदि। इस महान गायक की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि, उनके गाए फिल्म 'जहांआरा' के एक गीत की पंक्तियों के साथ !
जाने अब तुमसे मुलाक़ात कभी हो के न हो
जो अधूरी रही वो बात कभी हो के न हो
मेरी मंज़िल तेरी मंज़िल से बिछड़ आयी है
दिल को बहलाने तेरी याद चली आयी है
फिर वही शाम, वही ग़म, वही तन्हाई है !