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Saturday, 22 April 2017

सेहत के पाँच तत्व : अर्थ डे (22 अप्रैल ) ------ शमीम खान

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अर्थ डे (22 अप्रैल ) :





भगवान =भ (भूमि-ज़मीन  )+ग (गगन-आकाश )+व (वायु-हवा )+I(अनल-अग्नि)+न (जल-पानी)
चूंकि ये तत्व खुद ही बने हैं इसलिए ये ही खुदा हैं। 

इनका कार्य G(जेनरेट )+O(आपरेट )+D(डेसट्राय) है अतः यही GOD हैं। 
 मिट्टी  अर्थात ज़मीन अथवा भूमि ,गगन अर्थात आकाश , वायु अर्थात हवा,अनल अर्थात अग्नि,और नीर अर्थात जल या पानी  का जो स्वस्थ्य हेतु सुश्री शमीम खान ने बताए हैं  वस्तुतः उनके अनुसार आचरण करना ही वास्तविक धर्म है। लेकिन मजहबी दूकानदारों और इनके ठेकेदार एथीस्ट्स ने जनता को उलझा रखा है तथा व्यापारियों / उद्योगपतियों के हितार्थ गलत व्याख्याएँ पेश कर राखी हैं। जिस कारण जनता भटक कर शोषण व उत्पीड़न का शिकार होती रहती है। इस लेख से प्रेरित होकर काश लोग अब भी जाग्रत हो जाएँ तो इस पृथ्वी पर सुख,स्वास्थ्य व समृद्धि को प्राप्त किया जा सकता है। 
(विजय राजबली माथुर )

Friday, 22 March 2013

जल ही जीवन है ---विजय राजबली माथुर

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Hindustan-Lucknow-31/03/2012

वैज्ञानिक विकासक्रम मे जल की उत्पत्ति के बाद ही प्राणियों के अस्तित्व की बात आती है।करोडों  वर्ष पूर्व जब पृथ्वी की सतह ठंडी होने पर तमाम गैसों की वर्षा हुई उस दौरान ही हाईड्रोजन के दू भाग व आक्सीजन का एक भाग मिलने से 'जल' की उत्पत्ति हुई। उसके काफी बाद वनस्पती और फिर प्राणियों की उत्पत्ति हुई। दस लाख वर्ष पूर्व मानव का यह स्वरूप सामने आया था जो आज है। 'मनन' करने के कारण हम मनुष्य कहलाए थे किन्तु आज मनन का नितांत आभाव है और यही कारण मनुष्यता के ही संकट का नहीं समस्त प्राणियों व वनस्पतियों के भी संकट का हेतु है। जिस प्रकार एक प्रतिशत धनवानों द्वारा प्रकृति प्रदत्त संसाधनों का 99 प्रतिशत दुरुपयोग किया जा रहा है उनमे 'जल' का प्रमुख स्थान है। आने वाला समय अगली पीढ़ियों के लिए जलाभाव के संकट का होगा। यदि अपनी मनुष्यता को 'मनन' के प्रयोग से बचना है तो अब अविलंब 'जल' के महत्व को समझना चाहिए। जल का अनावश्यक दुरुपयोग तत्काल रोका जाये तभी अंतर्राष्ट्रीय 'जल दिवस' मनाने का महत्व सार्थक हो सकता है।
 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर