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Wednesday, 28 January 2015

सुमन कल्याणपुर : संगीत-राजनीति का निर्मम शिकार --- ध्रुव गुप्त






 जन्मदिन पर  विशेष -----
साभार : 

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=593930347350234&set=a.379477305462207.89966.100001998223696&type=1&theater



यूं ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना
तेरी याद तो बन गई एक बहाना !


सुमन कल्याणपुर, मुबारक बेगम और शमशाद बेगम हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर की उन बेहतरीन गायिकाओं में थीं जो अपनी आवाज़ और अदायगी की बेपनाह नेमतों के बावजूद उस दौर की संगीत-राजनीति का निर्मम शिकार हो गईं| सुमन जी की रेशमी, कांपती आवाज़ रूमानी और विरह गीतों के लिए सबसे उपयुक्त आवाज़ थी, लेकिन उन्हें अपना जादू चलाने के पर्याप्त मौके नहीं मिले| उन्होंने लता जी और आशा जी की तुलना में बहुत कम गीत गाए, लेकिन बावजूद इसके उनके पचासों गीत हमारी अनमोल संगीत-धरोहर का मूल्यवान हिस्सा है |1954 में अपनी फिल्मी पारी की शुरूआत करने वाली सुमन जी के कुछ कालजयी एकल और युगल गीत हैं - न तुम हमें जानो न हम तुम्हें जानें, दिल गम से जल रहा है जले पर धुआं न हो, यूं ही दिल ने चाहा था रोना रुलाना, मेरे महबूब न जा आज की रात न जा, बुझा दिए हैं खुद अपने हाथों मुहब्बतों के दीये जला के, तुम अगर आ सको तो आ जाओ, सावरिया रे अपनी मीरा को भूल न जाना, ज़िंदगी ज़ुल्म सही ज़बर सही गम ही सही, इतने बड़े ज़हां में अपना भी कोई होता, जूही की कली मेरी लाडली, बहना ने भाई की कलाई पे प्यार बांधा है, शराबी शराबी ये सावन का मौसम, तुम्ही मेरे मीत हो, ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे, अजहू न आए बालमा सावन बीता जाए, तुमने पुकारा और हम चले आए, चुरा ले न तुमको ये मौसम सुहाना, दिल ने फिर याद किया बर्क सी लहराई है, अंखियों का नूर है तू अंखियों से दूर है तू, आपसे हमको बिछड़े हुए एक ज़माना बीत गया, आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर जुबान पर, दिल एक मंदिर है, इतना है तुमसे प्यार मुझे मेरे राजदार, तुझे प्यार करते हैं करते रहेंगे, मेरा प्यार भी तू है ये बहार भी तू है !

जन्मदिन पर सुमन कल्याणपुर के लंबे, स्वस्थ और सृजनात्मक जीवन की शुभकामनाएं !

Sunday, 4 January 2015

प्रेम और विरह के यशस्वी गीतकार गोपाल दास नीरज ----- ध्रुव गुप्त


जन्मदिन / नीरज (4 जनवरी):
फूलों के रंग से, दिल के कलम से तुझको लिखी रोज पाती !
प्रेम और विरह के यशस्वी गीतकार गोपाल दास नीरज के गीतों के श्रृंगार ने कभी हमारे युवा सपनों को आसमान और परवाज़ बख़्शा था। उनके गीतों में बड़ी खामोशी से चीखती विगत प्रेम की वेदना और टीस कभी हमारी नम आंखों के लिए रूमाल हुआ करती थी। हिंदी कविता के पूर्वग्रहग्रस्त वामपंथी आलोचकों द्वारा निरंतर हाशिए पर रखे गए नीरज जी ने हिंदी गीतों और ग़ज़लों को समृद्ध करने के अलावा मेरा नाम जोकर, गैम्बलर, तेरे मेरे सपने, पहचान, नई उमर की नई फसल, पतंगा, चा चा चा, दुनिया, शर्मीली, प्रेम पुजारी, छुपा रुस्तम जैसी फिल्मों के गीतों को जो तेवर, कोमलता, विचार और संस्कार दिए, वह अभूतपूर्व था। अगाध प्रेम और शाश्वत विरह के इस महाकवि के जन्मदिन पर उनके लंबे और सृजनशील जीवन की अशेष शुभकामनाएं, उन्हीं की पंक्तियों के साथ !

 "प्यार अगर थामता न पथ में ऊंगली इस बीमार उमर की
हर पीड़ा वेश्या बन जाती, हर आंसू आवारा होता !

मन तो मौसम सा चंचल है, सबका होकर भी न किसी का
अभी सुबह का कभी शाम का, अभी रुदन का अभी हंसी का
और इसी भौरे की गलती क्षमा न यदि ममता कर देती
ईश्वर तक अपराधी होता, पूरा खेल दुबारा होता !

हर घर-आंगन रंगमंच है, औ' हर एक सांस कठपुतली
प्यार सिर्फ वह डोर कि जिसपर नाचे बादल, नाचे बिजली
तुम चाहे विश्वास न लाओ लेकिन मैं तो यही कहूंगा
प्यार न होता धरती पर तो सारा जग बंजारा होता !
"

Thursday, 11 December 2014

आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज़ तो दे !:दिलीप कुमार-----ध्रुव गुप्त

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जन्मदिन / दिलीप कुमार (11 दिसंबर)
आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज़ तो दे !:
भारतीय सिनेमा के महानतम अभिनेता, हिंदी सिनेमा के पहले महानायक दिलीप कुमार उर्फ़ युसूफ खान का उदय भारतीय सिनेमा की शायद सबसे बड़ी घटना थी। बगैर शारीरिक हावभाव के चेहरे और आंखों से भी अभिनय किया जा सकता है, यह साबित करने वाले देश के वे पहले अभिनेता थे। अपनी छह दशक लम्बी अभिनय-यात्रा में उन्होंने अभिनय की जिन ऊचाइयों और गहराईयों को छुआ, वह अद्भुत, असाधारण और अकल्पनीय था। सत्यजीत राय ने उन्हें ' The Ultimate Method Actor ' की संज्ञा दी थी। भारतीय उपमहाद्वीप में उनकी लोकप्रियता का आलम यह है कि पाकिस्तान सरकार ने वहां उनके पैतृक घर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया हुआ है। फिल्मों में प्रेम की व्यथा की जीवंत अभिव्यक्ति के कारण उन्हें ' ट्रैजेडी किंग ' कहा गया, लेकिन 'कोहिनूर' 'आज़ाद' और 'राम और श्याम' जैसी फिल्मों में उन्होंने साबित किया कि हास्य भूमिकाओं में भी उनका कोई सानी नहीं है। 1941 में 'ज्वारभाटा' से अपनी फिल्मी पारी शुरू करने वाले दिलीप साहब ने साठ से ज्यादा फिल्मों में अभिनय के नए-नए प्रतिमान गढ़े। उनकी कुछ यादगार फ़िल्में हैं - मिलन, जुगनू, शहीद, नदिया के पार, हलचल, मेला, अंदाज़, दाग, बाबुल, दीदार, आरज़ू, संगदिल, आन, कोहिनूर, आज़ाद, शिक़स्त, मुसाफिर, फुटपाथ, अमर, उड़न खटोला, देवदास, नया दौर, यहूदी, मधुमती, पैग़ाम, मुग़ल-ए-आज़म, गंगा जमना, आदमी, लीडर, दिल दिया दर्द लिया, राम और श्याम, संघर्ष, सगीना महतो, गोपी, मजदूर, सौदागर, मशाल, धर्म अधिकारी, शक्ति, क्रांति और कर्मा। मधुबाला के साथ उनका असफल प्रेम उस दौर की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में एक रही है। हाल में उनकी आत्मकथा ' The Substance And The Shadow' प्रकाशित और चर्चित हुई है जिसमें उन्होंने अपने जीवन के कई अनखुले पहलुओं पर रोशनी डाली है । सिनेमा में अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान 'दादासाहब फाल्के अवार्ड' से नवाज़ा गया।
दिलीप कुमार के जन्मदिन पर उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की हार्दिक शुभकामनाएं !

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दिलीप साहब का जन्मदिन मुबारक हो। हम उनके सुंदर,स्वस्थ,सुखद,समृद्ध उज्ज्वल भविष्य एवं दीर्घायुष्य की मंगल कामना करते हैं।:
दिलीप साहब से मुलाक़ात ---
 1981 में मैं पाँच माह के डेपुटेशन पर अन्य लोगों के साथ होटल मुगल शेरेटन,आगरा से होटल हाई लैण्ड्स,कारगिल भेजा गया था। किन्तु एक साथी के साथ मैं जूलाई में बीच में ही वापिस लौट आया था। 
उस समय होटल मुगल में 'विधाता' की शूटिंग सुभाष घई साहब के निर्देशन में चल रही थी। लॉबी में हो रही 'कुणाल महल' की दिलीप साहब शूटिंग मैंने भी देखी थी। स्टाफ केफेटेरिया में पद्मिनी कोल्हापूरे के डायलाग-"मक्के की रोटी"की शूटिंग भी मैंने देखी थी। लेकिन ज़्यादातर मैं आफिस से गायब होकर शूटिंग देखने वालों में शामिल नहीं रहता था। एक रोज़ मेनेजमेंट ने पूरे स्टाफ के साथ फिल्म -टीम को चाय पर गार्डेन में आमंत्रित किया था। जेनरल मेनेजर सरदार नृपजीत सिंह चावला साहब ने वरिष्ठ अभिनेता जनाब यूसुफ खान साहब से मेरा परिचय कराते हुये कहा था -" दिलीप साहब मीट आवर सीनियर मोस्ट एम्प्लाई विजय माथुर" । दिलीप साहब ने बड़े ही उत्साह और आत्मीयता के साथ मुझसे हाथ मिलाया था। हमारे दूसरे साथी मुकेश भटनागर का परिचय जी एम साहब ने शम्मी कपूर साहब से करवाया था। ये दोनों महान अभिनेता जी एम साहब के अगल-बगल चल रहे थे। 
आज दिलीप साहब के जन्मदिन पर उनसे मुलाक़ात की बात पुनः याद आ गई  एक बार पुनः
हम उनके सुंदर,स्वस्थ,सुखद,समृद्ध उज्ज्वल भविष्य एवं दीर्घायुष्य की मंगल कामना करते हैं।
(विजय राजबली माथुर)