Showing posts with label नारी. Show all posts
Showing posts with label नारी. Show all posts

Monday, 12 February 2018

नारी उत्पीड़न : नारियों की जुबानी

स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) 



    संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Sunday, 28 January 2018

नारी - सम्मान हेतु मिथ्या मिथकों को त्यागना होगा ------ विजय राजबली माथुर

स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )  







परिवार नागरिकता की प्रथम पाठशाला होते हैं वहीं से भेदभाव रहित व्यवहार शुरू करने होंगे। पोंगापंथियों द्वारा गढ़े गए प्रक्षेपकों जैसे श्री कृष्ण गोपियों से रास रचाते थे उनके कपड़े ले भागे थे और राम ने स्वर्ण नखा (अपभ्रंश सूपनखा ) को लक्ष्मण के पास तथा लक्ष्मण ने राम के पास भेजा आदि को निषिद्ध करना होगा उनका प्रतिकार करना होगा। वस्तुतः श्री कृष्ण व राम दोनों तत्कालीन राजनीति में शोषित- उत्पीड़ित वर्ग के साथ शोषकों / साम्राज्यवादियों के विरुद्ध संघर्ष के अगुवा थे। इसलिए पुरोहित वर्ग से शोषक शासकों ने उनको बदनाम करने हेतु प्रक्षेपक डलवाए थे जिंनका समाज के पतन में व्यापक हाथ है। अपनी युवा पीढ़ी को सच्चाई से रू -ब - रू करवाकर समस्या का समाधान प्राप्त किया जा सकता है। 


संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Thursday, 18 October 2012

जीवित दुर्गा के दर्शन

स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )

 पौराणिकों ने नारी को दोयम दर्जे का बना दिया है। विशेषकर 'भागवत' पुराण ने भारत का सर्वाधिक अनिष्ट किया है और कारपोरेट दलालों,ढोंगियों-पाखंडियों के द्वारा आज भागवत -पाठ को सनक की हद तक बढ़ावा दे रखा है। नवरात्र की अवधारणा एक वैदिक -विदुषी महिला के दृष्टिकोण से जानें---


 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर