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Wednesday, 13 June 2012

मंत्री जी आप आरोप न लगाएँ -आप तो कारवाई कर सकते हैं?

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हिंदुस्तान,लखनऊ,11 जून 2012

दैनिक भास्कर,10 जून 2012

पी एम कार्यालय के मंत्री जी ने अन्ना टीम का जवाब दे दिया और परवासी मंत्री जी ने उन पर अमेरिकी कारपोरेट कंपनियों से मिल कर भारत की राजनीति को अस्थिर करने का आरोप लगा दिया। एस एंड पी ने भी भारत की अंदरूनी राजनीति पर कटाक्ष किया है जिसको वित्त मंत्री जी ने खारिज कर दिया है। अभी 07 जून को वित्त मंत्रालय मे अग्निकांड हो गया जिसमे महत्वपूर्ण रिकार्ड जल गए हैं। 10 जून को यह रिपोर्ट छ्पी है कि रांची से 25 किलोमीटर दूर एक गाँव मे महिलाओं को बैलों के स्थान पर जोता गया है। रांची के एक आई ए एस आफ़ीसर जो वित्त मंत्रालय मे डेपुटेशन पर कर्नाटक से आए हैं जो 2009 के संसदीय चुनावों मे पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह जी से टकरा कर सुर्खियों मे आए थे। 11 मई को स्कूली बच्चों का जो ट्रूप अमेरिका गया था उसमे इन अधिकारी महोदय की बेटी भी शामिल थी। ये बच्चे अमेरिकी परिवारों मे ठहरे थे और बदले मे वहाँ के बच्चे इन्हीं के परिवारों मे ठहरेंगे। यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान गोपनीय सूचनाओं के भी प्रदान के अवसर उपस्थित कर सकता है और इस प्रकार के अग्ङ्कांडोन मे और वृद्धि हो सकती है। इन अधिकारी महोदय के रांची के पैतृक निवास पर शानदार पार्टी होने जा रही है लेकिन उन्हें पास के गाँव की  चित्र मे प्रदर्शित वह दुर्दशा नहीं दीख पा रही है।

केंद्र सरकार के मंत्री गण अखबारों मे बयान जारी करने की बजाए खुद कारवाई क्यों नहीं करते?भिंडरावाला को पहले इंदिरा जी ने बढ़ाया और जब वह भस्मासुर बन गया तो उसे खत्म कराया। उसी प्रकार मनमोहन जी ने पहले अन्ना की आव-भगत की,पुष्प गुच्छ भेजे अब जब वह भस्मासुर बन कर उनके पीछे दौड़े तो अब उनका खंडन करवा रहे हैं। DIRके तहत अन्ना और उनकी टीम के विरुद्ध कारवाई किया जाना ही समय की मांग है अन्यथा भिंडरावाला कांड न दोहरा जाये?

संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर

Sunday, 18 December 2011

सेना का विजय दिवस और अन्ना

'हिंदुस्तान'के प्रधान संपादक श्री शशि शेखर ने अपने 18 दिसंबर के संपादकीय लेख मे 16 दिसंबर की भारतीय सेना की 40 वर्ष  पूर्व प्राप्त अद्भुत विजय के संबंध मे लिखा है-
"अन्ना हज़ारे के इर्द-गिर्द घूम रहे राजनीतिज्ञों को क्या दोष दें?खुद अन्ना भी इस मुद्दे पर मौनी बाबा बने रहे। वह खुद भारतीय सेना मे रहे हैं और पाकिस्तान के खिलाफ एक जंग मे भी शरीक हुये थे। और कुछ नहीं,तो सार्वजनिक तौर पर वह फौज के अपने उन साथियों को श्रद्धांजली ही दे देते,जो देश की रक्षा करतेहुए इस युद्ध मे शहीद हुये थे। "

अब शशि शेखर जी को कौन समझाये कि अन्ना को भारत या भारतीय फौज से क्या ताल्लुक ?वह तो अमेरिकी और भारतीय कारपोरेट घरानों के हित मे भारत के राष्ट्रीय ध्वज का लगातार अपमान करते आ रहे हैं। अमेरिका को स्वतन्त्रता दिलाने वाले जार्ज वाशिंगटोन ने अमेरिकी ध्वज का अपमान करने वाले को जहां का तहां मार डालने को कहा था और भारत के राष्ट्रीय ध्वज जिसे 15 अगस्त,02 अक्तूबर और 26 जनवरी को छोड़ कर सरकारी भवनों के अतिरिक्त सार्वजनिक रूप से नहीं फहराया जा सकता किस प्रकार खुले आम पाखंडी जुलूसों मे इस्तेमाल किया जा रहा है नीचे के चित्रों मे द्खे-






उपरोक्त वीडियो मे सच्चाई जानने -समझने के बाद भी क्या आप अन्ना के कारपोरेट आंदोलन का ही समर्थन करते रहेंगे?

स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर

Tuesday, 13 December 2011

अन्ना आंदोलन-संसद पर हमला

स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )

कुछ तथाकथित प्रकांड पंडित अन्ना-आंदोलन को जन-आंदोलन कहते नहीं थक रहे हैं। ये लोग मध्यम वर्ग के उन लोगों को जो उच्च वर्ग की नकल करता रहता है को ही असली जनता बताते फिर रहे हैं। सुप्रसिद्ध मजदूर नेता और लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी साहब के लेख की इस स्कैन कापी का अवलोकन करें और सच्चाई से वाकिफ हों। यह लेख हिंदुस्तान,लखनऊ के 13 दिसंबर 2011 के अंक मे  प्रकाशित हुआ है।

आज 13 दिसंबर को संसद पर आतंकवादी हमला हुये 10 वर्ष व्यतीत हो चुके हैं। लेकिन इधर 06 माह से अन्ना और उनकी टीम लगातार जो संसद पर हमला कर रही है वह उस आतंकवादी हमले से ज्यादा गंभीर और खतरनाक है। यह अर्द्ध सैनिक तानाशाही स्थापित करने की गंभीर साजिश है।








 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर