Showing posts with label जोजीला दर्रा. Show all posts
Showing posts with label जोजीला दर्रा. Show all posts

Friday, 15 July 2016

भारत-भू 'तृतीय विश्वयुद्ध' का अखाड़ा भी बन सकती है ------ विजय राजबली माथुर

स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) 

बेहद अफसोसनाक है कि, कश्मीर के राजनेता होकर भी उपरोक्त लेख में अनुच्छेद 370 के महत्व को विद्वान लेखक नहीं जानते हैं और उसे हटाने की पैरवी कर रहे हैं। मई से अगस्त तक ढाई माह 1981 में मुझे भी श्रीनगर व करगिल में रहने का अवसर मिला है। कर्गिल से पहले 'द्रास' क्षेत्र में है जोजीला दर्रा और इसी में ज़मीन के नीचे 'प्लेटिनम' का प्रचुर भंडार छिपा पड़ा है। इसी जगह अक्सर बर्फबारी के कारण रास्ता जाम में वाहनों को फंसना पड़ता है। हमारा ट्रक भी यहीं फंस गया था। यदि यहाँ सुरंग बना दी जाये तो श्रीनगर से कर्गिल तक छह घंटों के समय में पहुंचा जा सकता है और लेह जाने वालों को करगिल में रात्रि विश्राम भी न करना पड़े। परंतु जैसा मैंने एक ब्लाग-पोस्ट में दिया है सच्चाई वहीं ज्ञात हुई है तब उक्त लेख के राजनेता लेखक कैसे अनभिज्ञ रहे ताज्जुब की बात है : 
"तमाम राजनीतिक विरोध के बावजूद इंदिरा जी की इस बात के लिए तो प्रशंसा करनी ही पड़ेगी कि उन्होंने अपार राष्ट्र-भक्ति के कारण कनाडाई,जर्मन या किसी भी विदेशी कं. को वह मलवा देने से इनकार कर दिया क्योंकि उसमें 'प्लेटिनम'की प्रचुरता है.सभी जानते हैं कि प्लेटिनम स्वर्ण से भी मंहगी धातु है और इसका प्रयोग यूरेनियम निर्माण में भी होता है.कश्मीर के केसर से ज्यादा मूल्यवान है यह प्लेटिनम.सम्पूर्ण द्रास क्षेत्र प्लेटिनम का अपार भण्डार है.अगर संविधान में सरदार पटेल और रफ़ी अहमद किदवई ने अनुच्छेद  '३७०' न रखवाया  होता  तो कब का यह प्लेटिनम विदेशियों के हाथ पड़ चुका होता क्योंकि लालच आदि के वशीभूत होकर लोग भूमि बेच डालते और हमारे देश को अपार क्षति पहुंचाते.अनुच्छेद ३७० को हटाने का आन्दोलन चलाने वाले भी छः वर्ष सत्ता में रह लिए परन्तु इतना बड़ा देश-द्रोह करने का साहस नहीं कर सके,क्योंकि उनके समर्थक दल सरकार गिरा देते,फिर नेशनल कान्फरेन्स भी उनके साथ थी जिसके नेता शेख अब्दुल्ला साहब ने ही तो महाराजा हरी सिंह के खड़यंत्र  का भंडाफोड़ करके कश्मीर को भारत में मिलाने पर मजबूर किया था .तो समझिये जनाब कि अनुच्छेद  ३७० है 'भारतीय एकता व अक्षुणता' को बनाये रखने की गारंटी और इसे हटाने की मांग है-साम्राज्यवादियों की गहरी साजिश.और यही वजह है कश्मीर समस्या की .साम्राज्यवादी शक्तियां नहीं चाहतीं कि भारत अपने इस खनिज भण्डार का खुद प्रयोग कर सके इसी लिए पाकिस्तान के माध्यम से विवाद खड़ा कराया गया है.इसी लिए इसी क्षेत्र में चीन की भी दिलचस्पी है.इसी लिए ब्रिटिश साम्राज्यवाद की रक्षा हेतु गठित आर.एस.एस.उनके स्वर को मुखरित करने हेतु 'अनुच्छेद  ३७०' हटाने का राग अलापता रहता है.इस राग को साम्प्रदायिक रंगत में पेश किया जाता है.साम्प्रदायिकता साम्राज्यवाद की ही सहोदरी है.यह हमारे देश की जनता का परम -पुनीत कर्तव्य है कि, वह सरकार की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखे कि वह यू एस ए के मंसूबे न पूरे कर दे। 
अनुच्छेद 370 को समाप्त कराने की मांग उठाते रहे लोग जब सत्ता में मजबूती से आ गए हैं तब बिना पाकिस्तान के अस्तित्व के ही 'जोजीला'दर्रे में स्थित 'प्लेटिनम' जो 'यूरेनियम' के उत्पादन में सहायक है यू एस ए को देर सबेर हासिल होता दीख रहा है । अड़ंगा चीन व रूस की तरफ से हो सकता है और उस स्थिति में भारत-भू 'तृतीय विश्वयुद्ध' का अखाड़ा भी बन सकती है। देश और देश कि जनता का कितना नुकसान तब होगा उसका आंकलन वर्तमान सरकार नहीं कर सकती है तो क्या विपक्ष भी नहीं करेगा ?"
http://krantiswar.blogspot.in/2016/07/blog-post.html


(विजय राजबली माथुर )



***  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
*******************************************************************
फेसबुक कमेंट्स : 

Wednesday, 17 February 2016

जोजीला दर्रे के नीचे छिपे 'प्लेटिनम' हड़पने हेतु जे एन यू को कश्मीर से जोड़ा गया है

स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) 












 http://delhincr.amarujala.com/photo-gallery/lawyers-again-beats-journalists-and-fought-with-each-other-in-patiala-house-court-on-jnu-issue/




आज न्यायालय में  जे एन यू  छात्रसंघ  के अध्यक्ष  पर  पुलिस की मौजूदगी  में जो हमला किया गया  और हिंदुस्तान के इस  सम्पादकीय के अंतिम अनुच्छेद  में  सरकारी हस्तक्षेप को पूरे प्रकरण के लिए जिम्मेदार माना गया है  उसकी पुष्टि  अमर उजाला में प्रकाशित व आन लाईन समाचारों से भी एवं वीडियो से भी होती है। 

फासिस्टों का उद्देश्य अफरा-तफरी मचा कर देश तोड़ना और जोजीला दर्रे के नीचे छिपे 'प्लेटिनम' जो 'यूरेनियम' निर्माण में सहायक होता है को यू एस ए को सौंपना है। अन्यथा गृह मंत्री के स्तर से गैर कानूनी काम न कराया जाता । 
यह सरकार संविधान के अनुच्छेद 370 हटाने की मांग करने वालों की है। यह अनुच्छेद कश्मीर से बाहर के लोगों पर वहाँ ज़मीन खरीदने पर प्रतिबंध लगाता है। यदि इसे हटा दिया जाये तो व्यापारी/उद्योगपति /देशी-विदेशी कारपोरेट घराने वहाँ की ज़मीन हथिया सकेंगे। तब श्रीनगर- कारगिल मार्ग पर 'द्रास' क्षेत्र में 'जोजीला दर्रा ' के नीचे पाया जाने वाला 'प्लेटिनम' खनन करके यू एस ए पहुंचाना सुगम हो जाएगा। प्लेटिनम धातु 'यूरेनियम' के निर्माण में सहायक है जो परमाणु ऊर्जा व बम में प्रयोग किया जा सकता है। यू एस ए इसे हस्तगत करके विश्व दमन का मजबूत हथियार अपने पास रखना चाहता है इसीलिए आज़ादी के तुरंत बाद 'कश्मीर' पर हमला करवाया गया था और इसीलिए 'जनसंघ' ने अपने घोषणा -पत्र में अनुच्छेद हटाने की मांग शामिल की थी। जैसे-तैसे यू एस ए भक्त पूर्व पी एम साहब की मेहरबानी से वर्तमान सरकार सत्तासीन हुई है तब बिना किसी सबूत के कश्मीरी अलगाव वादियों से  कामरेड कन्हैया को जोड़ कर सम्पूर्ण वामपंथ को देश-द्रोही घोषित करके कुचल डालना इस सरकार का ध्येय है। वरना पुलिस तथा खुफिया  एजेंसीज के सबूत न होने की घोषणा के बाद कामरेड कन्हैया को रिहा कर दिया जाता। ऐसा न करके उनको 14 दिनों के लिए जेल भेजा जा रहा है जिससे पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हों और उन प्रदर्शनों को झारखंड की भांति हमले करके वामपंथ की शक्ति को क्षीण किया जा सके। लेकिन वामपंथ में बैठे ब्राह्मण व ब्राह्मण वादी भी पूंजीवादी फासिस्टों के नाजायज इरादों को कामयाब करा रहे हैं। अन्यथा निर्दोष कामरेड कन्हैया व कामरेड अमीक पर कोर्ट परिसर में प्राण घातक हमले न होते।