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Saturday, 17 February 2018

ज़ोजिला का प्लेटिनम और अनुच्छेद 370 ------ विजय राजबली माथुर

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1981  में एक रात मुझे भी डल झील में 'शिकारा ' में गुजरना पड़ा , उस वक्त किराया रु 15/- था। शिकारा मालिक का व्यवहार वाकई काफी अच्छा था। 
कश्मीर वस्तुतः ' पर्यटन उद्योग ' पर निर्भर है इसलिए वहाँ के लोग मूलतः शान्तिप्रिय हैं। यू एस ए से प्रभावित जो अंतर्राष्ट्रीय शक्तियाँ वहाँ अशांति के लिए जिम्मेदार हैं उनका उद्देश्य कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र - द्रास में 'ज़ोजिला ' दर्रा में दबे हुये ' प्लेटिनम ' पर है। प्लेटिनम से यूरेनियम प्राप्त किया जाता है जो परमाणु ऊर्जा का स्त्रोत है। वैसे भी प्लेटिनम धातु स्वर्ण से भी अधिक मूल्यवान है। इसीलिए पाकिस्तान के माध्यम से कश्मीर को हड़पने की कोशिश की गई थी। यदि संविधान में अनुच्छेद 370 का प्राविधान न होता तो विदेशी शक्तियाँ उस क्षेत्र में भूमि क्रय कर इस प्लेटिनम को ले जातीं। श्रीनगर से लेह जाने वाले मार्ग में सुरंग - टनेल बनाने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के पास आया था । यदि यह सुरंग बन जाती तो एक ही दिन में सफर तय हो जाता। अभी रात्रि विश्राम कर्गिल में करना पड़ता है क्योंकि पर्यटकों को रात्रि में सेना सफर नहीं करने देती है। कनाडाई फार्म नाम - मात्र के शुल्क और जर्मन फार्म बिलकुल मुफ्त में टनेल बनाने को तैयार थीं। शर्त यह थी कि, ज़ोजिला की सुरंग खुदाई में निकलने वाला मलवा वे ले जाएँगे जिससे प्लेटिनम हासिल किया जा सके । किन्तु इन्दिरा गांधी मालवा देने को तैयार नहीं थीं बल्कि  पूरा खर्च देने को तैयार थीं। बिना मलवा हासिल किए वे फर्म्स काम करने को तैयार नहीं हुईं । 

जो लोग संविधान में संशोधन करके अनुच्छेद 370 को हटाना चाहते हैं वे वस्तुतः विदेशी शक्तियों को लाभ पहुंचाना चाहते हैं। देशहित को ध्यान में रखते हुये ही सरदार वल्लभ भाई पटेल और शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 का प्रविधान करवाया था वरना महाराजा हरी सिंह तो यू एस ए / ब्रिटेन की चाल में फंस कर अलग रहने का ऐलान कर ही चुके थे। उनको हटा कर उनके पुत्र युवराज कर्ण सिंह को सदर - ए - रियासत बनाया गया था।
विदेशी शक्तियों की चालों को विफल करने हेतु भारत और पाकिस्तान में मित्रता व शांति परमावश्यक है जिससे कश्मीर में भी शांति बहाल होकर यहाँ के पर्यटन उद्योग को विस्तार व जनता को खुशहाली मिल सके। 

 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Friday, 15 July 2016

भारत-भू 'तृतीय विश्वयुद्ध' का अखाड़ा भी बन सकती है ------ विजय राजबली माथुर

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बेहद अफसोसनाक है कि, कश्मीर के राजनेता होकर भी उपरोक्त लेख में अनुच्छेद 370 के महत्व को विद्वान लेखक नहीं जानते हैं और उसे हटाने की पैरवी कर रहे हैं। मई से अगस्त तक ढाई माह 1981 में मुझे भी श्रीनगर व करगिल में रहने का अवसर मिला है। कर्गिल से पहले 'द्रास' क्षेत्र में है जोजीला दर्रा और इसी में ज़मीन के नीचे 'प्लेटिनम' का प्रचुर भंडार छिपा पड़ा है। इसी जगह अक्सर बर्फबारी के कारण रास्ता जाम में वाहनों को फंसना पड़ता है। हमारा ट्रक भी यहीं फंस गया था। यदि यहाँ सुरंग बना दी जाये तो श्रीनगर से कर्गिल तक छह घंटों के समय में पहुंचा जा सकता है और लेह जाने वालों को करगिल में रात्रि विश्राम भी न करना पड़े। परंतु जैसा मैंने एक ब्लाग-पोस्ट में दिया है सच्चाई वहीं ज्ञात हुई है तब उक्त लेख के राजनेता लेखक कैसे अनभिज्ञ रहे ताज्जुब की बात है : 
"तमाम राजनीतिक विरोध के बावजूद इंदिरा जी की इस बात के लिए तो प्रशंसा करनी ही पड़ेगी कि उन्होंने अपार राष्ट्र-भक्ति के कारण कनाडाई,जर्मन या किसी भी विदेशी कं. को वह मलवा देने से इनकार कर दिया क्योंकि उसमें 'प्लेटिनम'की प्रचुरता है.सभी जानते हैं कि प्लेटिनम स्वर्ण से भी मंहगी धातु है और इसका प्रयोग यूरेनियम निर्माण में भी होता है.कश्मीर के केसर से ज्यादा मूल्यवान है यह प्लेटिनम.सम्पूर्ण द्रास क्षेत्र प्लेटिनम का अपार भण्डार है.अगर संविधान में सरदार पटेल और रफ़ी अहमद किदवई ने अनुच्छेद  '३७०' न रखवाया  होता  तो कब का यह प्लेटिनम विदेशियों के हाथ पड़ चुका होता क्योंकि लालच आदि के वशीभूत होकर लोग भूमि बेच डालते और हमारे देश को अपार क्षति पहुंचाते.अनुच्छेद ३७० को हटाने का आन्दोलन चलाने वाले भी छः वर्ष सत्ता में रह लिए परन्तु इतना बड़ा देश-द्रोह करने का साहस नहीं कर सके,क्योंकि उनके समर्थक दल सरकार गिरा देते,फिर नेशनल कान्फरेन्स भी उनके साथ थी जिसके नेता शेख अब्दुल्ला साहब ने ही तो महाराजा हरी सिंह के खड़यंत्र  का भंडाफोड़ करके कश्मीर को भारत में मिलाने पर मजबूर किया था .तो समझिये जनाब कि अनुच्छेद  ३७० है 'भारतीय एकता व अक्षुणता' को बनाये रखने की गारंटी और इसे हटाने की मांग है-साम्राज्यवादियों की गहरी साजिश.और यही वजह है कश्मीर समस्या की .साम्राज्यवादी शक्तियां नहीं चाहतीं कि भारत अपने इस खनिज भण्डार का खुद प्रयोग कर सके इसी लिए पाकिस्तान के माध्यम से विवाद खड़ा कराया गया है.इसी लिए इसी क्षेत्र में चीन की भी दिलचस्पी है.इसी लिए ब्रिटिश साम्राज्यवाद की रक्षा हेतु गठित आर.एस.एस.उनके स्वर को मुखरित करने हेतु 'अनुच्छेद  ३७०' हटाने का राग अलापता रहता है.इस राग को साम्प्रदायिक रंगत में पेश किया जाता है.साम्प्रदायिकता साम्राज्यवाद की ही सहोदरी है.यह हमारे देश की जनता का परम -पुनीत कर्तव्य है कि, वह सरकार की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखे कि वह यू एस ए के मंसूबे न पूरे कर दे। 
अनुच्छेद 370 को समाप्त कराने की मांग उठाते रहे लोग जब सत्ता में मजबूती से आ गए हैं तब बिना पाकिस्तान के अस्तित्व के ही 'जोजीला'दर्रे में स्थित 'प्लेटिनम' जो 'यूरेनियम' के उत्पादन में सहायक है यू एस ए को देर सबेर हासिल होता दीख रहा है । अड़ंगा चीन व रूस की तरफ से हो सकता है और उस स्थिति में भारत-भू 'तृतीय विश्वयुद्ध' का अखाड़ा भी बन सकती है। देश और देश कि जनता का कितना नुकसान तब होगा उसका आंकलन वर्तमान सरकार नहीं कर सकती है तो क्या विपक्ष भी नहीं करेगा ?"
http://krantiswar.blogspot.in/2016/07/blog-post.html


(विजय राजबली माथुर )



***  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
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