Showing posts with label भाकपा. Show all posts
Showing posts with label भाकपा. Show all posts

Friday, 11 November 2016

उत्तर प्रदेश की जनता की ज़रूरत है सपा / भाजपा विरोधी संयुक्त मोर्चा ------ विजय राजबली माथुर

स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) 




* जिनहोने भाजपा ऊमीद्वार पूर्व प्रधानमंत्री को सपा प्रत्याशी के तौर पर चुनावी चुनौती दी थी जब उनकी ही यह पीड़ा है तब औरों का क्या कहना ?
** 11 नवंबर 2016 के हिंदुस्तान, लखनऊ अंक के पृष्ठ 02 पर समाचार छ्पा है कि, सपा किसी पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी जिसको विलय करना हो वह सपा में विलय कर सकता है। 
*** वस्तुतः 2017 का चुनाव 2012 की तर्ज़ पर और 2019 का चुनाव 2014 की तर्ज़ पर लड़ा जाएगा। अगर सपा का अन्य दलों से गठबंधन होता तब यह फार्मूला कैसे लागू हो पाता ? आर एस एस को भाजपा के अलावा दूसरे दलों में स्थित (बैठाये हुये ) अपने समर्थकों पर पूर्ण भरोसा है और उनका लाभ संविधान संशोधन के वक्त उठाना है। 

**** यह तो भाजपा विरोधी दलों का कर्तव्य है कि, वे आपसी टांग - खिंचाई छोड़ कर एकजुट हों तथा भाजपा को उसके समर्थकों सहित पराजित करने हेतु जनता के समक्ष मजबूत विकल्प दें। यदि वास्तव में लक्ष्य भाजपा को परास्त करना होगा तब कांग्रेस,बसपा,वामपंथी दलों समेत सभी जंतान्त्रिक दलों का गठबंधन सपा/भाजपा गठजोड़ के विरुद्ध सामने आयेगा वरना तो होइहें वही जे आर एस एस रची राखा।
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1223776617684312&set=a.154096721318979.33270.100001559562380&type=3&permPage=1

("**** यह तो भाजपा विरोधी दलों का कर्तव्य है कि, वे आपसी टांग - खिंचाई छोड़ कर एकजुट हों तथा भाजपा को उसके समर्थकों सहित पराजित करने हेतु जनता के समक्ष मजबूत विकल्प दें। यदि वास्तव में लक्ष्य भाजपा को परास्त करना होगा तब कांग्रेस,बसपा,वामपंथी दलों समेत सभी जंतान्त्रिक दलों का गठबंधन सपा/भाजपा गठजोड़ के विरुद्ध सामने आयेगा वरना तो होइहें वही जे आर एस एस रची राखा।")

लेकिन अब प्रश्न यह है कि, क्या ऐसा होगा? अथवा भाजपा को हटाने/हराने का नारा सिर्फ नारा ही है केवल दिखावे का ढोंग है ढोंग !
सबसे पुरानी पार्टी आज 1925 में स्थापित  'भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ' ही है क्योंकि उससे पूर्व  1885  में स्थापित दो बैलों की जोड़ी वाली  'इंडियन नेशनल कांग्रेस ' 1969 में कांग्रेस (ओ ) व कांग्रेस ( आर ) में विभाजित हो गई थी एवं  चरखा चलाती महिला वाला उसका संगठन पक्ष 1977 में 'जनता पार्टी ' में विलीन हो गया था।  गाय -बछड़ा वाली कांग्रेस ( आर ) बाद में विभाजित हो कर 'पंजा ' वाली ' कांग्रेस ( आई )' बनी जो आज सोनिया/राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रही है और अनधिकृत रूप से 131 वर्ष पुरानी कांग्रेस होने का दावा कर रही है। और क्यों न करे जब अब सबसे पुरानी भाकपा का  ब्राह्मण वादी नेतृत्व ही अपने दावे को सामने लाने से कतराता है। 
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी कहते थे- इंडिया दैट इज़ भारत दैट इज़ उत्तर प्रदेश - 1925 में स्थापित आर एस एस का दूसरा राजनीतिक संस्करण भाजपा इसी सिद्धान्त पर चल कर 1991 में यू पी में पूर्ण बहुमत की सरकार बना चुका है। तभी 1998 से 2004 एवं पुनः 2014 से केंद्र की सत्ता में आ सका है। 
लेकिन 1925 में स्थापित भाकपा के लिए उत्तर प्रदेश का कोई महत्व नहीं है। जबकि रघुवीर सहाय 'फिराक गोरखपुरी ' का विश्लेषण काफी सटीक है कि, मेरठ/ कानपुर डायगनल से शुरू आंदोलन विफल रहे हैं चाहे वे 1857 की प्रथम क्रांति हों अथवा किसान आंदोलन। एवं आगरा  / बलिया डायगनल से प्रारम्भ आंदोलन पूरे उत्तर प्रदेश में फैल कर राष्ट्रीय आंदोलन बने और सफल रहे हैं। चाहे 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन हो अथवा अन्य कोई। 
1992 में आगरा में सम्पन्न प्रदेश भाकपा के सम्मेलन के बाद बजाए भाकपा के प्रसार के 1994 में विभाजन हो गया। क्यों? क्योंकि ब्राह्मण वादी मानसिकता का नेतृत्व  पिछड़ा वर्ग से संबन्धित मित्रसेन जी यादव / राम चंद्र बख्श सिंह जी को स्वीकार नहीं कर सका और उनको हटना पड़ा। उसी मानसिकता ने कौशल किशोर जी  के नेतृत्व में दलित वर्ग को भाकपा से अलग किया। दो- दो विभाजनों के बाद भी 2015 में पिछड़ा व दलित वर्ग से संबन्धित पूर्व भाकपा विधायक प्रत्याशियों को पार्टी से अलग होना पड़ा । क्यों? क्योंकि, ब्राह्मण वादी मानसिकता के नायक का कथन है कि, पिछड़े व दलित कामरेड्स से सिर्फ काम लिया जाये उनको कोई पद न सौंपा जाये। 
भारत का सर्व हारा वर्ग दलित समुदाय से ही संबन्धित है जिसका भाकपा में कोई  सम्मानित स्थान नहीं है। बगैर सर्व हारा के समर्थन व सहयोग के 'मास्को रिटर्न ' ब्राह्मण वादी  नेतृत्व 'आर्थिक आधार ' पर सफलता की कपोलकल्पित मृग मरीचिका में विचरण करते हुये 2017 के चुनाव में मात्र 200 सीटों पर चुनाव लड़ कर व्यवस्था परिवर्तन का थोथा दावा कर रहा है जबकि, पूर्ण बहुमत हेतु 202 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। नौ नवंबर की वामपंथी रैली से लखनऊ वासी राष्ट्रीय सचिव कामरेड अतुल अंजान को दूर रखा गया व उनके स्थान पर डी राजा साहब से अङ्ग्रेज़ी में भाषण दिलवा कर हिन्दी प्रदेश की जनता को उपेक्षित किया  गया है। क्या ब्राह्मण वादी / मोदीईस्ट इन गतिविधियों के बल पर भाजपा / सपा  गुप्त - गठजोड़ को सत्ता से अलग रखा जा सकता है? यह विशेष विचारणीय विषय है।  


    संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Friday, 1 June 2012

लखनऊ मे बामपंथी मोर्चे का मंहगाई विरोधी प्रदर्शन

स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )


हिंदुस्तान,लखनऊ,01 जून 2012 के पृष्ठ 07 पर ( अग्रिम पंक्ति मे दायें से बाएँ-भाकपा,लखनऊ के जिलामंत्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़,फारवर्ड ब्लाक के प्रदेश अध्यक्ष राम किशोर जी,जन-संघर्ष मोर्चा के दिनकर कपूर और जनवादी महिला नेत्री )


आज विधानसभा मार्ग स्थित माकपा के कार्यालय पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी,भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी),अखिल भारतीय फारवर्ड ब्लाक,रिवोलुशनरी सोशलिस्ट पार्टी के नेता और कार्यकर्ता एकत्र होकर एक शांतिपूर्ण जुलूस के रूप मे जैसे ही आगे बढ़े विधायक निवास गेट के पास एक पुलिस के दारोगा ने जुलूस को जबरन रोकने का प्रयास किया। उसने माकपा के डॉ कश्यप,फारवर्ड ब्लाक के  राम किशोर जी जैसे प्रांतीय वरिष्ठ नेताओं एवं छोटे लाल पाल तथा मोहम्मद ख़ालिक़ जैसे ज़िला नेताओं एवं महिलाओं  को भी धक्का देकर रोक्न चाहा। युवा वर्ग ने आगे आकर उस पुलिस अधिकारी को ही जुलूस के आगे-आगे खींच कर चलना शुरू कर दिया। बाकी पुलिस फोर्स भी तमाशा देखते हुये आगे बढ़ा। अंततः जुलूस को निर्बाध रूप से बढ्ने दिया गया। हज़रत गंज की ओर मुड़ते वक्त भी कुछ पुलिस अधिकारियों ने रोना चाहा किन्तु उनको जल्दी ही सद्बुद्धि आ गई। नवेलती सिनेमा से लाल बाग,हजरतगंज आदि बाज़ारों मे होता हुआ जुलूस विधायक निवास के उसी गेट से अंदर प्रविष्ट हुआ जहां जाते मे रोकने का प्रयास हुआ था। भारी फोर्स होने के बावजूद इस बार रोका नहीं गया। वहीं एक सभा हुई जिसे मार्क्सवादी पार्टी के प्रदेश सचिव डॉ श्री प्रकाश कश्यप (पूर्व प्राचार्य),फारवर्ड ब्लाक के प्रदेश अध्यक्ष राम किशोर जी,भकपा के जिलामंत्री कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़,माकपा के जिला मंत्री कामरेड छोटे लाल पाल,जन-संघर्ष मोर्चा के कामरेड दिनकर कपूर आदि ने संबोधित किया।  

वक्ताओं ने केंद्र सरकार को अमेरिकी इशारे पर न चल कर जनता के हितों के लिए काम करने,मंहगाई पर रोक लगाने और बढ़ी हुई पेट्रोल की कीमतों को वापिस लेने की मांग की। मार्ग मे जो नारे खास थे वे इस प्रकार हैं। 'मनमोहन सिंह होश मे आओ-मंहगाई पर रोक लगाओ','पेट्रोल की बढ़ी कीमतें वापिस लो-वापिस लो','बेरोजगारों को दो जीने का अधिकार',आदि-आदि। 

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से प्रदर्शन मे जिन लोगों ने भाग लिया उनमे जिलमंत्री कामरेड ख़ालिक़ के अलावा कामरेड विजय माथुर,कामरेड मोहम्मद अकरम,कामरेड शरीफ आदि प्रमुख थे। 


 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर

Thursday, 1 December 2011

वालमार्ट का विरोध क्यों ?

स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )





तमाम लोग आज वालमार्ट के विरोध मे खड़े हैं उनमे भाजपा भी शामिल है जबकि भाजपाई प्रधानमंत्री ए बी बाजपाई ने ही वालमार्ट को भारत आने का न्यौता दिया था। लेकिन यू पी ए -1 को भाकपा एवं बामपंथियों का समर्थन होने के कारण यह प्रक्रिया थम गई थी। अब 'मुक्त' मनमोहन सिंह ने बाजपाई जी की अधूरी तमन्ना को परवान चढ़ाया है। कुछ पत्रकार वालमार्ट का स्वागत कर रहे हैं। वे आम जनता से कटे होने के कारण उसके दुख-दर्द को समझने मे असमर्थ हैं। कोई भी विवेक् शील  राष्ट्र-भक्त 'वालमार्ट' जैसी अमेरिकन धूर्त कंपनी के भारत आगमन का समर्थन नहीं कर सकता ,हम भी उसका पुरजोर विरोध करते हैं।

 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर