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Sunday, 2 February 2020

इनका असल निशाना संविधान है ------ उर्मिलेश

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सन् 1948 की 30 जनवरी को सांप्रदायिक-फासीवादियों ने 'राष्ट्रपिता' पर निशाना साधा। तब से वे लंबे समय तक समाज और सियासत में हाशिए पर रहे! लेकिन पिछले कुछ वर्षों से वे बड़ी ताकत के साथ उभरे हैं। इस बार 30 जनवरी के शहादत-दिवस को फिर रक्तरंजित किया गया! यह एक असमाप्त सिलसिले का हिस्सा है! इनका असल निशाना संविधान है! 30 जनवरी की हालिया घटना पर वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश का विश्लेषण:


 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Monday, 5 November 2018

पटना हो या लखनऊ पुलिस का कार्पोटीकरण व सांप्र्दायिकीकरण हो चुका है

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 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Friday, 4 May 2018

जिन्ना संघ परिवार की ढाल है ------ राजीव नयन बहुगुणा

*  जिन्ना का जन्म भारतीय मुसलमानों को दारुण दुख देकर उन्हें नुकसान पंहुचाने , और हर तरह की साम्प्रदायिक ताकतों को लाभ पंहुचाने के लिए हुआ है । अब वह मरणोपरांत भी भारतीय मुसलमानों के लिए एक बड़ी आपदा , और संघ परिवार के लिए ढाल बनने जा रहा है । 
** जिन्ना की समझ मे यह बेसिक बात नहीं आयी , कि जिस मुस्लिम क़ौम का एकछत्र भाग्य विधाता होने का वह दावा कर रहा है , भारतीय जुलाहों में सबसे बड़ी तादाद उन्हीं की है । एक व्यक्ति के खादी पहनने से कितने ही मुस्लिम किसानों , कत्तीनों , जुलाहों और दर्ज़ियों का चूल्हा जलता है ।
*** जिन्ना को बढ़िया से जानो और सावरकर को समझो। बंगाल में मुस्लिम लीग की सरकार की साझेदार बनी हिन्दू महासभा क्या हिन्दुत्व का झाल बजाने जिन्ना से गलबहियाँ करने गयी थी? 
****   जिन्ना इतिहास का वो अध्याय है जो हिन्दू महासभा की कलई उतारता है। ------ नवेन्दु कुमार 
Rajiv Nayan Bahuguna Bahuguna
जैसे जैसे जिन्ना तस्वीर विवाद का रंग गहरा हो रहा है , मेरा यह विश्वास भी सुदृढ होता जा रहा है , कि जिन्ना का जन्म भारतीय मुसलमानों को दारुण दुख देकर उन्हें नुकसान पंहुचाने , और हर तरह की साम्प्रदायिक ताकतों को लाभ पंहुचाने के लिए हुआ है । अब वह मरणोपरांत भी भारतीय मुसलमानों के लिए एक बड़ी आपदा , और संघ परिवार के लिए ढाल बनने जा रहा है । 
उसकी अलीगढ़ के विश्व विद्यालय में लगी एक तस्वीर के सिवा वह भारतीय मुस्लिमों का रहनुमा कभी नहीं रहा । जो मुस्लिम उसे अपना इमाम मानते थे , वे तभी उसके साथ पाकिस्तान चले गए थे , और उन्होंने नरक भोगा । 
वस्तुतः जिन्ना इस सचाई को जान अत्यधिक कुंठित रहता था , कि भारत मे गांधी पर विश्वास करने वाले मुस्लिमों की तादाद उसके मुक़ाबले काफी ज्यादा है । 
जिस प्रकरण पर जिन्ना कांग्रेस से छिटक कर अलग हुआ , वह बहुत मामूली और हल करने योग्य था । कांग्रेस का नेतृत्व गांधी के हाथ मे आने के बाद , इस पार्टी ने खादी और हिंदी को लेकर टेक पकड़ ली थी । कांग्रेस अधिवेशन में जिन्ना की हूटिंग भी सूट बूट पहनने और अंग्रेज़ी में भाषण झाड़ने के कारण हुई थी । वह गुजराती अथवा टूटी फूटी हिंदी में भी भाषण दे सकता था । स्वयं गांधी भी उसी की तरह गुजराती थे , और अंतिम समय तक अशुद्ध व्याकरण वाली हिंदी बोलते रहे । लेकिन उनकी अशुद्ध हिंदी भी व्याकरणाचार्यों पर भारी पड़ती थी । जिन्ना गुजराती में भी भाषण दे सकता था , बजाय इंग्लिश के , जो उसे आती थी । दक्षिण के एक बड़े राष्ट्रीय नेता के कामराज मरते दम तक तमिल बोलते रहे । लेकिन इसके बावजूद उनकी प्रतिष्ठा में कमी न आई । स्वयं गांधी के समधी चक्रवर्ती राजगोपालाचारी अंग्रेज़ी में वार्तालाप करते थे । उन्हें भी हिंदी नहीं आती थी । गांधी हर बार उन्हें चेतावनी देते थे , कि मैं इस बार आपको अंतिम अवसर दे रहा हूँ । अगली बार आपसे हिंदी में बात करूंगा , अन्यथा कोई बात नहीं करूंगा । यस , नेक्स्ट टाइम श्योर , कह कर राजा जी उन्हें बहला देते । जिन्ना भी यही सब कुछ करते हुए बीच का रास्ता निकाल सकता था । पर उस जैसे दम्भी मनुष्य के लिए यह कैसे सम्भव था ?
रही खादी की बात । सो तन मन से बीमार जिन्ना की समझ मे यह बेसिक बात नहीं आयी , कि जिस मुस्लिम क़ौम का एकछत्र भाग्य विधाता होने का वह दावा कर रहा है , भारतीय जुलाहों में सबसे बड़ी तादाद उन्हीं की है । एक व्यक्ति के खादी पहनने से कितने ही मुस्लिम किसानों , कत्तीनों , जुलाहों और दर्ज़ियों का चूल्हा जलता है ।

शैतान किसी प्रदूषण कारी वाहन की तरह अपने गुज़र जाने के बाद भी अपने पीछे दूषित धुएं की लकीर छोड़ जाता है । जगद्गनियंता इस महा देश को शैतान के आफ्टर इफेक्ट से बचाये ।
जिन्ना को बढ़िया से जानो और सावरकर को समझो। बंगाल में मुस्लिम लीग की सरकार की साझेदार बनी हिन्दू महासभा क्या हिन्दुत्व का झाल बजाने जिन्ना से गलबहियाँ करने गयी थी? 
नहीं देश हिंदोस्तान को तोड़ने के षड्यन्त्र का रिहर्सल कर रहे थे सत्ता के भूखे मुस्लिम-हिन्दू विघटन के सियासी सरदार। जिन्ना इतिहास का वो अध्याय है जो हिन्दू महासभा की कलई उतारता है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्व विद्यालय में लगे जिन्ना के चित्र को श्रद्धा का नहीं , अपितु इतिहास का विषय मानना चाहिए। इस विश्व विद्यालय की स्थापना सर सैयद अहमद खां ने की थी , जो भले ही अंग्रेजों के हिमायती थे , पर मुस्लिमों में आधुनिक शिक्षा के प्रबल पक्षधर भी थे। इस लिहाज से उनका दृष्टिकोण रूढ़िवादी मौलवियों से भिन्न था। 
जिन्ना का यह चित्र आज कल नहीं लगा , बल्कि 1938 में लग चुका था। जबकि इससे पहले इसी विश्व विद्यालय में महात्मा गांधी का चित्र लग चुका था , जो आज भी है। 
जिन्ना अकस्मात एवं परिस्थिति वश मुस्लिमों का धर्म ध्वजी बना। अन्यथा वह पाश्चात्य रहन सहन का आदी एक वकील था , और ऐसी चीजें खाता पीता था , जिनका नाम सुन कर ही धर्म ग्राही मुस्लिमों को कै आने लगती है। भारत की राजनीति में अनफिट होकर वह लन्दन जा बसा था। क्योंकि उसे न हिंदी आती थी और न उर्दू। उसे लन्दन से कई साल बाद शायर इक़बाल भारत वापस लाये , क्योंकि तब तक द्विराष्ट्र बाद का सिद्धान्त जन्म ले चुका था , और एक मुस्लिम राष्ट्र की पैरवी के लिए जिन्ना जैसे कानून जानने वाले और कुतर्क करने वाले वकील की ज़रूरत थी। 
द्वित्तीय विश्व युद्ध के उपरांत जब राज्यों में सरकारों का गठन हुआ , तो बंगाल में उसकी पार्टी मुस्लिम लीग के साथ हिन्दू महा सभा भी सरकार में साझीदार थी। क्योंकि दोनों देश को तोड़ने में विश्वास रखते थे , और आज भी रखते हैं। 
वह अपने गुजराती सम प्रदेशीय गांघी से बहुत द्वेष रखता था , और उन्हें चिढ़ाता था। उनके सामने वार्ता के लिए बुलाई गई बैठकों में सिगरेट फूंकता रहता था , और उनकी बकरी की ओर ललचाई बुरी नज़रों से देखता था। फिर भी गांधी उसकी क्षुद्रताओं को बर्दाश्त करते थे , और उसे क़ायदे आज़म की संज्ञा उन्हीने दी थी। 
गांघी ने देश विभाजन रोकने का भरसक प्रयत्न किया , लेकिन जब जिन्ना ने गृह युद्ध की धमकी दी तो वह मन मसोस कर रह गए। 
पाकिस्तान बनने के बाद वह तत्काल धर्म निरपेक्ष बन गया , जो असल मे वह था भी। पाकिस्तान के राष्ट्राध्यक्ष के रूप में दिए गए अपने पहले भाषण से ही वह वहां के कट्टरपंथियों की किरकिरी बन गया , क्योंकि उसने कहा था कि इस देश मे हर धर्मावलंवी को अपना धर्म मानने की छूट है। इसके कुछ ही समय बाद वह tb से मर गया । अगर न मरता , तो मुस्लिम कट्टर पंथी उसे मारने वाले थे , जैसा कि भारत में हिन्दू कट्टरपंथियों ने गांधी को मारा।
जब वह मरने वाला था , और उसकी बहन उसे कराची से इस्लामाबाद लायी , तो हवाई अड्डे पर उसे रिसीव करने वाला कोई न था। यही नहीं , उसे वहां से हॉस्पिटल तक लाने के लिए एक खटारा एम्बुलेंस भेजी गई , जो रास्ते मे खराब हो गयी , और जिन्ना उसमे तड़पता रहा। 
वह अपने अंतिम दिनों में देश विभाजन की अपनी भूल को महसूस करने लगा था , साथ ही यह भी कि वह अपने लाखों धर्म बन्धु मुस्लिमों की हत्या का उत्तरदायी है। आज भारतीय उप महाद्वीप में मुस्लिम जिन्ना की वजह से ही अब तक आक्रांत हैं। आज देश विभाजित न होता , तो भारत विश्व का नम्बर 1 मुल्क़ होता।
बहरहाल, जिन्ना की तसवीर हमारा क्या बिगाड़ेगी , जब जिन्ना खुद कुछ न बिगाड़ पाया। उसकी तस्वीर लगी रहने दो। वह भारतीय मुसलमानों का आदर्श कभी नहीं रहा , कभी नहीं रहेगा। समय समय पर इतिहास का तापमान परखने के लिए उसकी तस्वीर ज़रूरी है।
https://www.facebook.com/rajivnayanbahuguna.bahuguna/posts/2087992498092181
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Thursday, 28 December 2017

राहुल गांधी जी की गुजरात वाली गलती क्यो दुहराने पर आमादा हैं।अखिलेश जी! ------ Mahesh Donia

Mahesh Donia
28-12-2017
आप ही भ्रम में थे मित्रवर वरना अखिलेशजी ने तो हर जगह अपना हिंदुत्ववादी मुस्लिम-दलित विरोधी चेहरा दिखाया है. ये तो आप ही थे जो उनके भोलेपन पर लहालोट हुए जाते थे. आप ही क्यों कुछ समय पहले तो कुछ सो-कॉल्ड अम्बेडकरवादी यवा अखिलेश भैया से बहुजनो का नेतृत्व सँभालने के लिए मनुहारी कर रहे थे.
उधर लालू भी अपने कहते नहीं थकते की वो भी हिन्दू हैं.
आप लोग ग़लत दरवाजा खटखटा रहे हैं....अखिलेश जी!रेगिस्तान में तपती गर्मी में जैसे हिरन गर्मी की ऊष्मा से उपजे रेखाओं को पानी समझ दौड़ता रहता है पर वह पानी नही पाता वैसे ही आपके लिए हिंदुत्व मृग मरीचिका साबित होगा और आप 2019 एवं 2022 में हिंदुत्व रूपी मृग मरीचिका में झुलस के रह जाएंगे पर सत्ता रूपी पानी नही मिलेगी।.............................
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गजब हैं आप भी श्री अखिलेश यादव जी!
भाजपा के हिंदुत्व का मुकाबला आप सपाई हिंदुत्व से करेंगे?
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क्या अखिलेश जी!आप भी हद कर देते हैं।अब आप भाजपा के हिंदुत्व का मुकाबला 2019 में सपाई हिंदुत्व से करेंगे?मैंने आपका यह बयान जनेश्वर मिश्र पार्क घूमते समय पढा।मै आपके इस बयान "हिंदुत्व की राह पर चलेगी सपा, भाजपा को साबित करेगी हिन्दू विरोधी" पढ़कर बड़ी देर तक हंसा फिर आंखे डबडबा गयीं कि आखिर क्या हश्र होने वाला है पिछड़ो/दलितों/अल्पसंख्यको की राजनीति का?क्या अब कोई दूसरा अम्बेडकर,कांशीराम,लोहिया,पेरियार, ललई सिंह यादव,फुले,छत्रपति शाहू जी,वीपी सिंह,रामस्वरूप वर्मा,जगदेव कुशवाहा आदि नही जन्मेगा?
क्या अब बहुजन की राजनीति करने वाले लोग आप जैसे ही होंगे?क्या अब आरक्षण,सामाजिक न्याय,भागीदारी का सवाल इतिहास बन जायेगा?क्या अब सत्ता के लिए सभी के सभी हिन्दू-हिन्दू ही रटेंगे?क्या अब विचारधारा के लिए कोई जोखिम उठाने की जहमत नही मोल लेगा?क्या कोई अब अम्बेडकर की तरह "आरक्षण" {अनुच्छेद 340,341,342,15(4),16(4)} के प्राविधान जैसा कुछ करने वाला न होगा?क्या अब सवर्ण लोहिया की तरह कोई यह न बोलेगा कि "सोशलिस्टों ने बांधी गांठ,पिछड़े पावें सौ में साठ"?क्या अब कोई कांशीराम की तरह यह नही कहेगा कि "जिसकी जितनी संख्या भारी,उसकी उतनी हिस्सेदारी"?क्या अब कोई वीपी सिंह की तरह "मण्डल" जैसा कोई कानून लागू करने की हिम्मत नही करेगा?
अखिलेश जी! आप विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर इंजीनियर व्यक्ति हैं पर आप बिल्ली के रास्ता काटने से डर जांय, सत्ता जाने के डर से नोएडा न जांय,खुद को सबसे बड़ा हनुमान भक्त बताये,हिंदुत्व की डगर अपनाएं,गोभक्त बन जांय तो मुझे लगता है कि अब समाजवाद,लोहियावाद का यह सबसे बुरा दिन होगा।
अखिलेश जी!आप हिंदुत्व की राह चलेंगे पर जब आप मुख्यमंत्री आवास खाली करेंगे तो वह आप जैसे हिन्दू के रहने से अपवित्र होने के कारण गंगाजल व गोमूत्र से उसे धुला जाएगा।क्या आपको अभी भी हिंदुत्व में कुछ शेष बचा दिख रहा है क्या?
अखिलेश जी!आप हिंदुत्व की राह चलेंगे।जानते हैं हिंदुत्व मतलब क्या होता है?हिंदुत्व का मतलब प्रभु वर्ग के लिए सुरक्षा,सम्मान,सम्पत्ति,शिक्षा,ब्यापार,सत्ता आदि की गारन्टी।
अखिलेश जी!आपने अपनी पिछली 5 साल की सरकार में हिंदुत्व पर चलने में कोई कोर-कसर छोड़ा था क्या?आपने हिंदुत्व के लिए सम्पूर्ण पिछड़ों को समाजवादी पेंशन,लैपटॉप,कन्या विद्याधन,जनेश्वर मिश्र व लोहिया गांव व आवास में आरक्षण से विरत कर सामान्य कटेगरी में डाल दिया था।आपने हिंदुत्व को खुश रखने के लिए पिछडो के पीसीएस में त्रिस्तरीय आरक्षण को खत्म कर दिया था।आपने हिंदुत्व की हिफाजत के लिए पदोन्नति में आरक्षण की ऐसी की तैसी कर डाली थी।आपने सरकारी खर्चे से तीर्थयात्राएं करवायीं थीं।पिछडो की बैक लाग नियुक्ति नही की गई।सिद्धार्थ विश्वविद्यालय-सिद्धार्थनगर में सारी नियुक्तियां ब्राह्मण की कर दी गईं।आरक्षित पदों में 1.5 या इससे आगे 1.99 तक को 2 की बजाय एक ही पद मानने का सर्कुलर आपकी सरकार ने ला दिया था। अयोध्या,मथुरा,बनारस,कुम्भ आदि में सरकारी धन हिंदुत्व हित मे पानी की तरह बहाया था लेकिन अखिलेश जी! आपको अभिजात्य वर्गो ने कितना वोट दिया?आपने पिछडो और दलितों का जितना नुकसान अपने सरकार में किया उससे लाभान्वित कितना अगड़ा आपको वोट दिया?क्या इतना सब करने के बावजूद आप अहीर से कुछ और बन सके?
अखिलेश जी!आपने अभिजात्य समाज को 5 साल सर पर बिठाए रखा,अभी भी आपके अगल-बगल मौजूद ये अभिजात्य लोग आपको हिंदुत्व की राह चल करके सत्ता दिलाने का स्वप्न दिखा रहे हैं।अखिलेश जी! आप मृग मरीचिका से वाकिफ होंगे क्योंकि लायन सफारी बनाने वाले लायन के डियर डीयर की कहानी जरूर सुने होंगे।अखिलेश जी!रेगिस्तान में तपती गर्मी में जैसे हिरन गर्मी की ऊष्मा से उपजे रेखाओं को पानी समझ दौड़ता रहता है पर वह पानी नही पाता वैसे ही आपके लिए हिंदुत्व मृग मरीचिका साबित होगा और आप 2019 एवं 2022 में हिंदुत्व रूपी मृग मरीचिका में झुलस के रह जाएंगे पर सत्ता रूपी पानी नही मिलेगी।
अखिलेश जी! मैंने सुना है कि लोग गलतियों से सीखते हैं पर आप पता नही क्यो गलतियों से सीखने की बजाय उसे ही दुहराते जा रहे हैं।अखिलेश जी!आपने 5 साल की अपनी सरकार में पिछड़ा शब्द का नाम तक नही लिया,दलित को अपने दरवाजे से खदेड़ दिया,अल्पसंख्यको के मसायल को हल करने से बचते रहे लेकिन क्या आप यह सब करने के बावजूद 2012 में सरकार बनाने के बाद शहरों में अधिकाधिक अभिजात्य वर्गो की उपस्थिति वाले नगर निकाय चुनावों में कुछ कर पाए,2014 लोकसभा चुनाव में अभिजात्य वर्गो का दुलारा बन पाए,2017 विधानसभा चुनाव में सवर्ण परस्ती की हद करने के बावजूद सवर्ण वोट पाए या अभी 2017 में सम्पन्न नगर निकाय चुनाव में इन अभिजात्य वर्ग के वोटों को अपने पाले में अपनी सवर्ण परस्ती,नोटबन्दी,जीएसटी आदि के बावजूद अपनी तरफ ला पाए?
अखिलेश जी! अभी गुजरात चुनाव सम्पन्न हुआ है।राहुल गांधी जी गुजरात मे हिंदुत्व का काट हिंदुत्व से करने चले थे।राहुल जी के मंदिर-मन्दिर परिक्रमा तथा नोटबन्दी,जीएसटी,व्यवसायिक मंदी आदि के बावजूद भाजपा का हिंदुत्व जीत गया क्योंकि हिंदुत्व का पेटेंट अहीर,चमार या पारसी/ईसाई आदि से जन्मे स्वयम्भू जनेऊधारी राहुल गांधी जी के पास नही है,वह नागपुर के सावरकर/गोलवरकर व भागवत को प्राप्त है।
अखिलेश जी!आप भाजपा को हिंदुत्व विरोधी साबित करेंगे?क्या है आपके पास?कोई वैचारिक पाठशाला है आपके पास?कोई कैडराइज फोर्स है आपके पास सिवाय दिशाहीन जवानी कुर्बान गैंग के?बालू की भीत पर बिना विचार,कैडर के चले हैं भाजपा को हिंदुत्व विरोधी सिद्ध करने आप?
अखिलेश जी!आप जान रहे होंगे कि भाजपा के पास कट्टर 10 करोड़ हिन्दू सदस्य हैं।केंद्र के साथ 19 राज्यो में उनकी सरकार है।प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति,सभी राज्यपाल,लोकसभा/राज्यसभा सभापति उनके कैडराइज हिन्दू स्वयंसेवक हैं।भाजपा के पास 1631 विधायक,283 सांसद हिंदुत्व वाले हैं।भारतीय जनता पार्टी की मातृ संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदुत्व की यूनिवर्सिटी है जिसके पास भारतीय मजदूर संघ,राष्ट्रीय सेविका समिति,सेवा भारती,दुर्गा वाहिनी,बजरंग दल,अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद,विश्व हिंदू परिषद,स्वदेशी जागरण मंच,सरस्वती शिशु मंदिर, विद्या भारती,बनवासी कल्याण आश्रम,मुस्लिम राष्ट्रीय मंच,अनुसूचित जाति मोर्चा,लघु उद्योग भारती,भारतीय विचार केंद्र,विश्व सम्बाद केंद्र,गायत्री पीठ,सन्त अखाड़ा परिषद,सिख संगठन,विवेकानन्द केंद्र,महिला मोर्चा आदि सैकड़ो अनुसांगिक संगठन हैं अफलेटेड महाविद्यालयों की तरह हैं।
अखिलेश जी!भाजपा के पास 28500 सरस्वती विद्या मंदिर,2 लाख 80 हजार आचार्य,49 लाख छात्र,600 प्रकाशन समूह,1लाख पूर्व सैनिक,6 लाख 90 हजार कारसेवा करने वाले जंगजू बजरंगी व विहिप के सदस्य हैं।भाजपा के पास 4000 अविवाहित पूर्णकालिक/ईमानदार/मिशनरी हिंदुत्व को समर्पित स्वयंसेवक हैं जिन्होंने अपना सारा जीवन भाजपा/संघ को दान दे रखा है।भाजपा की मातृ संस्था रोजाना सुबह हथियार सहित निश्चित ड्रेस में पूर्ण अनुशासन के साथ 56 हजार 859 शाखाये लगाती है जहां 55 लाख 20 हजार स्वयंसेवक रोजाना भाजपा/संघ के लिए मरने-जीने की कसमें खाते हैं।
अखिलेश जी!देश भर के लाखों मंदिरों के समस्त साधु,सन्त,महात्मा,शंकराचार्य,जगतगुरु भाजपा के साथ हैं।सारी प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया,सभी उद्योगपति भाजपा के साथ हैं।देश का सम्पूर्ण सवर्ण,प्रभु वर्ग,अभिजात्य तबका भाजपा के साथ है फिर आप किस गफलत के शिकार हैं?कौन आप जैसे "अहीर" के हिंदुत्व की बात सुनेगा।किसके जरिये भाजपा के इस जाल से आप मुकाबला करेंगे?
अखिलेश जी! मुझे समझ नही आता है कि आप राहुल गांधी जी की गुजरात वाली गलती क्यो दुहराने पर आमादा हैं।अखिलेश जी! आपको मेरी बात कितनी अच्छी लगेगी यह तो मैं नही जानता हूँ लेकिन मुझे आप के वैचारिक दरिद्रता पर रोना आता है।जिसके सवर्ण पुरखो ने हिंदुत्व के मुकाबले सोशल जस्टिश,भागीदारी,आरक्षण जैसे अकाट्य,अमोघ हथियार दे रखे हो वह हिंदुत्व का काट हिंदुत्व में ढूंढ रहा हो तो रोना ही आएगा।
अखिलेश जी!2019 मे भाजपा को शिकस्त देना जरूरी है जो सामाजिक न्याय के एजेंडे से ही पूरा होगा।जातिवार जनगढ़ना, आबादी के अनुपात में आरक्षण,प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण,उच्च न्यायपालिका में आरक्षण,पदोन्नति में आरक्षण आदि सवाल जब बलवती तरीके से उठेंगे तो सवर्ण हकमार हिन्दुओ को छोड़ करके 85 प्रतिशत पिछड़ा/दलित हिन्दू तथा अल्पसंख्यक खुद ब खुद हिंदुत्व की ऐसी की तैसी कर डालेगा।
अखिलेश जी!अपनी इन बयानबाजियों से सेक्युलर व सोशल जस्टिश समर्थक ताकतों को निराश न करिए बल्कि बहुजन बुद्धिजीवियों को बुलाइये,परामर्श कीजिये और कम्युनल/अनजस्टिश लोगो से बचिए वरना वे खुद तो नही डूबेंगे पर आपको और समस्त बहुजन नेतृत्व व उनके वर्गीय हितों को नेस्तनाबूद कर डालेंगे।
https://www.facebook.com/mahesh.donia/posts/1182776255188544















Saturday, 12 January 2013

'भ्रष्ट जर्जर पूंजीवादी' संस्कृति का खुलासा ---विजय राजबली माथुर

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हमारे भारतीय जनता पार्टी के तथाकथित जागरुक साथिओ की आज अखबारों में खबर और फोटो छापी है और लिखा है की इन्होने पकिस्तान को घर में बैठ कर चेतावनी भी दी है |आज कुछ अखबार नयी दुनिया में यह फोटो भी छापी है जिसमे भाजपा के नेताओं ,कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के साथ राज्योत्सव के कार्यक्रमों में अपने निकृष्ट कर्मो के लिए पुरस्कार लेती आमदुला ,डौंडी कन्या आश्रम की अधीक्षिका अनिता ठाकुर है |भारतीय जनता पार्टी और संघ के नेताओ और नीतिओ की खासियत यही है की ये लोग अफवाह उड़ाने ,मुद्दे भड़काने और अपने ऊपर लगे आरोपों को दबाने और आम आदमी का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे हथकंडे अपनाते है चाहे वो स्थानीय स्थर पर हो या राष्ट्रीय स्तर पर |कंदर ,डौंडी के साथ ही आने वाले दिनों में पुरे राज्य के आश्रम और केंद्र जिनमे बहुत से भाजपा के समर्थित लोगो के स्वयंसेवी संस्थाओ के द्वारा संचालित होती है उनकी कारगुजारिओ को दबाने के ऐसे बहुत से प्रयास जारी है |
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उपरोक्त स्कैन कटिंग एवं फेसबुक नोट यह सोचने पर बाध्य करता है कि,भारतीय संस्कृति-भारतीय संस्कृति का राग अलापने वाली पार्टी के शासन मे सरकारी विद्यालय के सरकारी छात्रावास मे हुये जिन कारनामों का खुलासा हुआ है उनको पढ़ सुन कर कौन कहेगा कि यही भारतीय संस्कृति है?वस्तुतः उस शासक पार्टी का प्रेरक RSS है जिसका वास्तविक अर्थ ही है-'रियूमर स्पीचुएटेड सोसाईटी'। अर्थात अफवाहे फैलाना ही उनका मुख्य कार्य है और वही उनका मूल उद्देश्य भी है। 
 
16 दिसंबर के वीभत्स कांड पर घड़ियाली आँसू बहाने वाले RSS/भाजपा के अपने शासित राज्य मे सरकारी संरक्षण मे हुये घृणित एवं निंदनीय जघन्य कुकृत्य की जितनी भी भर्त्सना की जाये कम है। जनता को अब तो समझ लेना चाहिए कि भारत के स्वतन्त्रता आंदोलन को कमजोर करने हेतु ही सांप्रदायिक RSS व मुस्लिम लीग का गठन ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने अपने शासन को और अधिक समय तक बनाए रखने हेतु करवाया था। आज भी पाकिस्तान और भारत तथा बांग्लादेश मे भी ऐसे तत्व साम्राज्यवाद के हितों के संरक्षणार्थ फिरकापरस्त बयानबाजी और हरकतें करते रह कर जनता को भटकाते आ रहे हैं। 
 
अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहते हुये जनता को ऐसे सभी तत्वों को जड़-मूल से ठुकरा देना चाहिए। 
 


 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर