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Monday, 2 January 2017

यह लोकतंत्र की लड़ाई है पिता के सम्पत्ति की नहीं ------ रजनीश कुमार श्रीवास्तव

लेकिन जब शरीर और दिमाग दोनों थक जाएँ लेकिन राजनीतिक वासना पहले से भी ज्यादा लोलुप हो जाए तो परिणाम मुलायम हो ही जाता है।किसी बड़ी मजबूरी के तहत मुलायम सिंह यादव का रिमोट किसी और के पास चला गया है।वो समाजवादी पार्टी का निर्विवादित भूत तो हैं लेकिन वर्तमान और भविष्य कतई नहीं।............................अखिलेश यादव को विष का पान कर महादेव बनने का अवसर मिल गया है।राजनीति में नेता वही है जिसके साथ जनता है।अखिलेश को आसुरी शक्तियों का विनाश करना ही चाहिए।ये आगे बढ़ने का समय है।



Rajanish Kumar Srivastava

समाजवादी पार्टी का संघर्ष वास्तव में एक लोकप्रिय मुख्यमंत्री और एक भटके एवं भ्रमित पार्टी अध्यक्ष के सही गलत फैसलों से सम्बन्धित है उसे पिता और पुत्र के पारिवारिक संघर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दरअसल राजनीति ही एकमात्र ऐसा पेशा है जिसमें रिटायरमेंट की कोई उम्र ही नहीं होती।लेकिन जब शरीर और दिमाग दोनों थक जाएँ लेकिन राजनीतिक वासना पहले से भी ज्यादा लोलुप हो जाए तो परिणाम मुलायम हो ही जाता है।किसी बड़ी मजबूरी के तहत मुलायम सिंह यादव का रिमोट किसी और के पास चला गया है।वो समाजवादी पार्टी का निर्विवादित भूत तो हैं लेकिन वर्तमान और भविष्य कतई नहीं।
सारी दिक्कत दो पृथक मुद्दों को पृथक रूप से नहीं देख पाने के कारण हो रही है।यह भारतीय राजनीति में पहली बार हुआ है कि ठीक चुनाव के पहले एक लोकप्रिय मुख्यमंत्री को एक पार्टी अध्यक्ष ने पार्टी से निष्कासित कर दिया हो। जबकि हर सर्वे में अखिलेश की लोकप्रियता अपनी पार्टी से लगभग दोगुनी है।यह उसी तरह है कि एक पिता खुद पुत्र का विवाह तय करे और बारात के दिन जिद्द करे कि बारात पुत्र के बिना जाएगी।एक मुख्यमंत्री लगातार गुहार लगा रहा था कि इस चुनाव में चूँकि जनता मेरे कार्यों का मुल्याँकन करने जा रही है इसलिए उत्तरपुस्तिका मुझे लिखने दी जाए।लेकिन निष्ठुर पिता और स्वयं से निर्णय कर पाने में असमर्थ पार्टी अध्यक्ष ने अपने मुख्यमंत्री को बिना उत्तरपुस्तिका दिए ही परीक्षा में बैठाने की जिद्द पकड़ रखी थी।लोकतंत्र में अलग पार्टी वो बनाता है जिसे पार्टी में बहुमत प्राप्त ना हो। यह पूरा मसला लोकतंत्र और राजनीति का है।यह पूरी लड़ाई एक मुख्यमंत्री और एक पार्टी अध्यक्ष के सही गलत फैसलों की है ना कि कोई पारिवारिक विरासत की।लोकतंत्र में बहुमत ही निर्णायक होता है और चुने सांसदों तथा विधायकों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं में 90% का बहुमत अखिलेश के पास है।अलग पार्टी मुलायम सिंह यादव को बनानी पड़ेगी।यह लोकतंत्र की लड़ाई है पिता के सम्पत्ति की नहीं।
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1769884630002810&set=a.1488982591426350.1073741827.100009438718314&type=3




क्या मुलायम सिंह यादव का रिमोट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के हाथ में है? सभ्य और शिष्ट तथा विकास के नाम पर चुनाव लड़ने की घोषणा करने और बाहुबलियों को टिकट ना देने की भरपूर कोशिश करने वाले अपने ही लोकप्रिय मुख्यमंत्री को पार्टी से निकालने का दुस्साहस भला कोई यूँ ही कर सकता है।मुलायम सिंह यादव किसी बहुत बड़ी मजबूरी में ऐसा विनाश काले विपरीत बुद्धि वाला निर्णय ले सकते हैं । लेकिन सारे सर्वे यही बताते हैं कि लोकप्रिय युवा मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव को अपनी समाजवादी पार्टी से भी ज्यादा लोकप्रियता हासिल है।यकीन मानिए मुलायम सिंह यादव का रिमोट किसी और के पास है वरना कोई यूँ ही अपने पैर पर कुल्हाडी नहीं मार लेता है।

समुद्र मंथन में पहले विष निकला था बाद में अमृत।अमृत के लिए राक्षस और देवता लड़ मरे थे लेकिन विष का पान कर मानवता को जिसने बचाया था वह गरलकंठ महादेव कहलाए थे।अखिलेश यादव को विष का पान कर महादेव बनने का अवसर मिल गया है।राजनीति में नेता वही है जिसके साथ जनता है।अखिलेश को आसुरी शक्तियों का विनाश करना ही चाहिए।ये आगे बढ़ने का समय है।
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1768165316841408&set=a.1488982591426350.1073741827.100009438718314&type=3

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02-01-2016 

Tuesday, 9 August 2016

क्या ऐसा होगा? ------ विजय राजबली माथुर

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 क्या ऐसा होगा?
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अयोध्या के बाबरी प्रकरण के बाद उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन की सरकार का अस्तित्व आया था। काशीराम जी को अपने गृह जनपद इटावा से मुलायम सिंह जी ने सांसद तक बनवाया था। यदि यह गठबंधन कायम रहता तो सदा-सर्वदा के लिए उत्तर प्रदेश से भाजपा का अस्तित्व समाप्त हो जाता। अतः संघप्रिय गौतम के माध्यम से मायावती जी को मुलायम सिंह जी के विरुद्ध करके वह सरकार गिरा दी गई। भाजपा के समर्थन से कई बार मायावती जी मुख्यमंत्री बनीं किन्तु उनकी सरकार भाजपा द्वारा ही हर बार गिरा दी गई। इसके बावजूद गुजरात नर-संहार के बाद 2002 में मायावती जी ने अटल व मोदी के साथ भाजपा का वहाँ प्रचार किया था।


2014 के लोकसभा चुनावों से काफी पहले  व्हाईट हाउस में बराक हुसैन ओबामा द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय गोपनीय बैठक की गई थी जिसमें भारत से भी कई दलित कहे जाने वाले चिंतक शामिल हुये थे जिनमें से एक लखनऊ के विद्वान भी थे। वहीं पर मुस्लिमों के विरुद्ध विश्व व्यापी मुहिम चलाये जाने और उसमें प्रत्येक देश के दलित माने जाने वाले लोगों का सहयोग लेने की रूप रेखा तय की गई थी। उसी अनुसार 2014 के लोकसभा चुनावों में समस्त दलित कहे जाने वाले वर्ग का वोट बसपा के बजाए भाजपा को गया था और बसपा का एक भी सांसद न जीत सका था। उसी मुहिम का परिणाम है बसपा से हाल ही में हुई टूटन। मायावती जी को उनके खास लोगों ने उसी अंदाज़ में उनको झटका दिया है जिस अंदाज़ में 1995 में उन्होने खुद मुलायम सिंह जी को झटका दिया था तब उनको भी भाजपा का समर्थन हासिल था जिस प्रकार अब उनको झटका देने वालों को हासिल हुआ है।
2017 के आसन्न चुनावों में यदि बसपा-सपा गठबंधन बना कर चुनाव लड़ा जाये तो अब भी भाजपा के मंसूबों को ध्वस्त किया जा सकता है वरना अभी तो भाजपा बसपा को ध्वस्त करने के लिए गोपनीय समर्थन देकर सपा सरकार फिर से बनवा देगी लेकिन उसके बाद सपा को उसी प्रकार तोड़ेगी जिस प्रकार अभी बसपा को तोड़ा है। मायावती जी व मुलायम सिंह जी दूरदर्शिता का परिचय दें तो दीर्घकालीन मजबूत गठबंधन बना कर न केवल उत्तर प्रदेश में वरन सम्पूर्ण देश में भाजपा को परास्त कर सकते हैं। लेकिन क्या ऐसा होगा?
https://www.facebook.com/vijai.mathur/posts/1137504919644816
 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश

Thursday, 15 October 2015

मुलायम का बयान साफ करता है कि वे हैं आरएसएस के एजेंट --- मोहम्मद शोएब

केंद्र सरकार के इशारे पर मानवाधिकार आयोग सदमे से मरे किसान की मौत को
बता रहा स्वाभाविक मौत- रिहाई मंच

बिना किसान के घर गए मानवाधिकार आयोग ने लगा दी रिपोर्ट
मुलायम का बयान साफ करता है कि वे हैं आरएसएस के एजेंट
मैनपुरी के मुस्लिम विरोधी हिंसा के मास्टरमाइंड संजीव यादव का सपा से
निलम्बन न होना मुलायम के बयान को सही साबित करता है
दलितों और मुसलमानों के हत्यारे रणवीर सेना के संस्थापक के बेटे को बिहार
में सपा द्वारा चुनाव लड़ाना शर्मनाक


लखनऊ 14 अक्टूबर 2015। रिहाई मंच ने केंद्र सरकार पर किसान विरोधी होने
का आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार किसानों की आत्महत्या के मामलों की
जांच में लीपा-पोती में लिप्त है और किसानों की फसल बर्बाद हो जाने के
बाद हुई मौतों को प्राकृतिक साबित करने पर तुली हुई है। मंच ने बिहार
चुनाव में बिहार के सैकड़ों दलितों और मुसलमानों के हत्यारे रणवीर सेना
के संस्थापक बरमेश्वर मुखिया के बेटे इंदू भूषण सिंह को सपा द्वारा तरारी
विधान सभा सीट से चुनाव लड़ाने को सपा के दलित और मुसलमान विरोधी राजनीति
का ताजा उदाहरण बताया है।

रिहाई मंच द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में मंच के नेता राजीव यादव ने
कहा है कि 14 अप्रैल 2014 को आजमगढ़ के पल्हनी ब्लाक के सराय सादी गांव
के किसान रामजन्म राजभर की तुफान और ओला वृष्टि के कारण फसल नुकसान होने
पर सदमे से हुई मौत पर केंद्र सरकार अधिकारीयों से झूठे रिपोर्ट लगवा रही
है कि किसान की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई। उन्होंने बताया कि इस घटना
पर रिहाई मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम द्वारा सवाल उठाने पर राष्ट्रीय
मानवाधिकार आयोग द्वारा इसकी जांच कृष्ण कांत नामक अधिकारी से कराई और
संगठन को अपनी रिपोर्ट भी भेजी है। जिसमें मौत को प्राकृतिक बताई गई है।
राजीव यादव ने कहा कि रिपोर्ट आ जाने के बाद जब इंसाफ मुहिम के तहत
किसानों की बदहाली का सवाल उठाने वाले मसीहुद्दीन संजरी के नेतृत्व में
विनोद यादव, अनिल यादव और तारिक शफीक ने पीडि़त परिवार के घर का दौरा
किया तो पीडि़त परिवार के लोगों ने आश्चर्य व्यक्त किया कि यहां तो कोई
भी जांच करने आया ही नहीं था तो रिपोर्ट कैसे लगा दी गई। उन्होंने सवाल
उठाया कि किसान रामजनम की मौत के बाद स्थानीय मजिस्ट्रेट के कोश से दो
लाख रुपए की लिखित आर्थिक सहायता का आश्वासन देने के बावजूद आज तक अखिलेश
यादव सरकार द्वारा सहायता न देना सरकार के किसानों को ठगने की नीति को
उजागर करता है।

रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने मुलायम सिंह के इस बयान कि सपा और
भाजपा की विचारधारा देशभक्ति के सवाल पर बिल्कुल एक जैसी है को मुलायम
सिंह द्वारा सच्चे दिल से दिया गया बयान बताया है। उन्होंने कहा कि उम्र
के इस पड़ाव पर जो सच उन्होंने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है उसको
जनता पहले से जानती है कि वे संघ परिवार के एजंेट हैं और इसीलिए बाबरी
मस्जिद को तोड़ने और मुसलमानों की हत्याओं को देशभक्ति बताने वाले भाजपा
नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती और मुरली मनोहर जोशी को उनकी पिछली
सरकार ने रायबरेली कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि इन तीनों की बाबरी
मस्जिद ढ़हाने में कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को
राष्ट्रविरोधी मानने और उनके कत्लेआम को देशभक्ति बताने वाली संघ परिवार
की विचारधारा में यकीन रखने के कारण ही शायद उन्होंने कानपुर में हुई
मुस्लिम विरोधी हिंसा के मास्टरमाइंड रहे तत्कालीन एसएसपी एसी शर्मा
जिनकी उस घटना में संल्पितता की जांच के लिए जस्टिस माथुर कमीशन बनाया
गया था कि रिपोर्ट को उन्होंने लगातार सिर्फ दबाए ही नहीं रखा बल्कि
कानपुर के मुसलमानों के इस हत्यारे को डीजीपी भी बना दिया।

रिहाई मंच अध्यक्ष ने कहा कि पिछले दिनों मैनपुरी के तीनी करहाल इलाके
में गोकशी के झूठे अफवाह के बाद हुई मुस्लिम विरोधी हिंसा में मुख्य
भूमिका निभाने वाले नगर पंचायत अध्यक्ष और सपा नेता संजीव यादव का अभी तक
सपा से निलम्बन न होना और पुलिस की तहरीर में सपा नेता के भाई टीटू
द्वारा किरोसिन तेल और डीजल लाकर मुस्लिमों और पुलिस की गाड़ीयों को
जलाने की बात आना भी साबित करता है कि सपा मुखिया की संघी मार्का
देशभक्ति मुसलमानों की सुरक्षा के लिए खतरा बनती जा रही है। मोहम्मद शुऐब
ने कहा कि मुलायम सिंह के पैतृक क्षेत्र में उनके नगर पंचायत अध्यक्ष और
इस मुस्लिम विरोधी हिंसा के मास्टरमाइंड संजीव यादव द्वारा 2012 में
चुनाव के दौरान खुलेआम यह घोषणा करना कि उसे मुसलमानों का वोट नहीं
चाहिए, भी मुलायम सिंह द्वारा भाजपा से अपनी वैचारिक नजदीकी के कबूलनामे
को सही साबित करता है। रिहाई मंच अध्यक्ष ने कहा कि सपा के तथाकथित
मुस्लिम चेहरे आजम खान को मुलायम सिंह के इस बयान पर अपनी स्थिति स्पष्ट
करनी चाहिए।

द्वारा जारी-
शाहनवाज आलम
(प्रवक्ता, रिहाई मंच)
09415254919

Sunday, 8 September 2013

पी एम साहब का मनोरंजक बयान ---विजय राजबली माथुर

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 विशेष विमान में दिया गया पी एम साहब का बयान नितांत भ्रामक है जबकि कुरील साहब का बनाया गया कार्टून वास्तविकता का चित्रण कर रहा है। वस्तुतः सोनिया जी ने 2009 के चुनावों के बाद मनमोहन जी के बजाए प्रणव मुखर्जी साहब को पी एम बनाना चाहा था लेकिन सिंह साहब न हटने पर एड़ गए थे। फिर 2011 में भी उनके बदले मुखर्जी साहब की चर्चा उठने पर हज़ारे आंदोलन चलवा दिया गया जिसके दौरान स्वाधीनता दिवस पर ब्लैक आउट घोषित किया गया था। 2012 में उनके बदले जब फिर मुखर्जी साहब का नाम आया और उनको राष्ट्रपति पद पर प्रोन्नत करने की बात चली तब उस समय भी विदेश यात्रा से लौटते समय विमान में ही कहा था कि वह जहां हैं वहीं ठीक हैं एवं वह तीसरी बार भी पी एम बनने हेतु चुस्त-दुरुस्त हैं। 

अब अपने रिटायरमेंट का संकेत इसलिए दिया है कि सोनिया कांग्रेस को चुनावों में परास्त करने का मुक्कमल बंदोबस्त कर चुके हैं। इसमे भी 'राहुल गांधी' को पी एम बनाने का शगूफा भ्रमित करने के लिए इसलिए छोड़ा गया है क्योंकि वह बखूबी जानते हैं कि 'राहुल' की माता जी एवं ननिहाल के लोग राहुल को पी एम बनने ही नहीं देंगे तो चटकारा लेने में हर्ज ही क्या  है?

राष्ट्रपति महोदय अपने निर्वाचन के समय वेंकट रमण साहब द्वारा वी पी सिंह साहब को दिये आश्वासन    
 की भांति ही 'मुलायम सिंह जी' तथा 'ममता बनर्जी साहिबा' को आश्वासन दे चुके हैं कि स्पष्ट बहुमत न होने की दशा में वह इन लोगों को वरीयता देंगे। इन दोनों में से ही अगला पी एम बनने की संभावना है बाकी सभी मनोरंजन करने का काम कर रहे हैं।

 संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त माथुर